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गीता और कबीर बीजक का विदेशी लेखक कर रहे अनुवाद

साहित्य उत्सव में विदेशी लेखकों ने हिंदी बोलकर किया श्रोताओं को प्रभावित, सुनाए कबीर के भजन
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गीता और कबीर बीजक का विदेशी लेखक कर रहे अनुवाद

21 साल की उम्र यूएस में रहने वाली एक लड़की लिंडा हीज भारत आती है और यहां कबीर बीजक से उनका लगाव हो जाता है। 77 साल की उम्र में पहुंच रहीं लिंडा अभी भी कबीर की वाणी को अमेरिका में रचाने-बसाने का प्रयास कर रही हैं। इसके लिए न सिर्फ उन्होंने हिंदी सीखी बल्कि लोकभाषा मालवी भी सीखी जिसे रवींद्र भवन के सभागार में सुनकर श्रोता दंग रह गए। ऐसा होना भी था क्योंकि कबीर के कुमार गंधर्व की आवाज में गूंथे गए भजन राम निरंजन न्यारा रे, अंजन सकल पसारा रे, अंजन उतपति वो ओंकार, अंजन मांड्या सब बिस्तार... सुनाया तो सभागार में जोरदार तालियां बजी। मौका था, साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित उन्मेष का।

लिंडा विदेशी भाषाओं में भारतीय साहित्य सेशन की अध्यक्षता कर रहीं थीं। लिंडा का सेशन काफी रोचक रहा क्योंकि उन्होंने वक्ताओं की समय -सीमा पूरा होने का संकेत देने के लिए मालवी मंजीरा हाथ में थाम रखा था। लिंडा कबीर के साहित्य पर 50 साल से ज्यादा समय से काम करती आ रही हैं। वो कहती हैं, अब तो मेरी दोस्त शबनम कहती हैं, तुम कबीर पर काम कर रही तो या कबीर तुम्हारे ऊपर।

रामचरित मानस का जापानी में करूंगा अनुवाद

मैंने तुलसीदास की हनुमान चालीसा और सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता झांसी की रानी का जापानी में अनुवाद किया है। मैं रामानंद सागर की रामायण और बीआर चोपड़ा की महाभारत जापानी लोगों को अपनी भाषा में दिखाना चाहता हूं। मैंने भागवत गीता का सरल अनुवाद किया है क्योंकि यह विद्वानों के लिए नहीं बल्कि आम जापानी लोगों के लिए है। मैंने गीता को इसलिए चुना क्योंकि इसमें भारत की आत्मा है और दुनिया में इस बात पर किसी को संदेह नहीं है। मेरा मानना है कि यदि नौजवान में चलचित्र के माध्यम से साहित्य में रुचि लेते हैं और फिर जब उन्हें इस माध्यम से साहित्य पसंद आता है तो वे किताबों में उसे पढ़ते हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है। अब मैं रामचरित मानस का अवधी भाषा से जापानी में अनुवाद करूंगा। -हिरोयुकी सातो, जापानी लेखक

Javedakhtar Ansari
By Javedakhtar Ansari

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