फादर्स डे स्पेशल:ट्रेन से उतारे जाने की घटना ने बदल दी जिंदगी, पिता ने ठाना और बेटी पहुंची भारतीय क्रिकेट टीम तक

प्रभा उपाध्याय, इंदौर। मेरे पिता सिर्फ मेरे पापा नहीं बल्कि मेरे पहले कोच, ट्रेनर, न्यूट्रिशनिस्ट, मार्गदर्शक और सबसे बड़े समर्थक हैं। मैं आज जहां हूं उसमें उनका सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने मेरे सपनों को अपना सपना बनाकर जिया है। भारतीय महिला अंडर-19 क्रिकेट टीम की खिलाड़ी अनादि तागड़े जब अपने पिता अनुराग तागड़े के बारे में यह कहती हैं तो उनके शब्दों में वर्षों का संघर्ष, समर्पण और एक पिता का त्याग साफ झलकता है। फादर्स डे पर यह कहानी सिर्फ एक उभरती हुई क्रिकेटर की नहीं बल्कि उस पिता की भी है जिसने अपनी बेटी के सपनों को उड़ान देने के लिए खुद के सपनों और सुविधाओं से समझौता कर लिया।

ट्रेन से उतारे जाने की घटना बनी टर्निंग पॉइंट
अनादि जब कक्षा तीसरी में थीं तब उनका चयन एक क्रिकेट टीम में हो गया था। परिवार और अनादि के लिए यह बेहद खुशी का पल था लेकिन यात्रा के दौरान एक ऐसी घटना हुई जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। नियमों के अनुसार टीम में शामिल होने के लिए खिलाड़ी का कम से कम कक्षा पांचवीं में होना जरूरी था। चयन होने के बावजूद अनादि को ट्रेन से उतार दिया गया। उस समय छोटी सी बच्ची के लिए यह घटना निराशाजनक थी, लेकिन पिता अनुराग तागड़े ने उसी पल एक संकल्प लिया। उन्होंने तय कर लिया कि उनकी बेटी सिर्फ टीम में चयनित नहीं होगी बल्कि एक दिन भारत के लिए क्रिकेट खेलेगी। यही संकल्प आगे चलकर अनादि के क्रिकेट करियर की सबसे बड़ी ताकत बना।
बेटी के सपनों के लिए खुद के सपनों से किया समझौता
अनुराग तागड़े बताते हैं कि उन्होंने हमेशा अपने करियर से पहले बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता दी।
मध्यम वर्गीय परिवार के लिए आसान नहीं था सफर
क्रिकेट को महंगे खेलों में गिना जाता है। कोचिंग, उपकरण, यात्रा और प्रतियोगिताओं में भागीदारी का खर्च किसी भी मध्यम वर्गीय परिवार के लिए चुनौती बन सकता है। अनुराग तागड़े बताते हैं कि आर्थिक चुनौतियां कई बार सामने आईं लेकिन परिवार ने कभी अनादि के सपनों को रुकने नहीं दिया। उनका कहना है कि संघर्ष आज भी जारी है लेकिन बेटी की उपलब्धियां हर मुश्किल को छोटा बना देती हैं।
भारतीय क्रिकेट के दरवाजे तक पहुंचीं अनादि
पिता के त्याग और अपनी कड़ी मेहनत के दम पर अनादि तागड़े ने कम उम्र में ही कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। आज वह भारतीय महिला अंडर-19 टीम का हिस्सा हैं और भविष्य में सीनियर भारतीय टीम के लिए खेलने का सपना देख रही हैं।
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अनादि तागड़े की प्रमुख उपलब्धियां
- दक्षिण अफ्रीका त्रिकोणीय सीरीज 2024 में इंडिया-बी टीम का प्रतिनिधित्व किया।
- श्रीलंका सीरीज 2026 के लिए भारतीय महिला अंडर-19 टी-20 और वनडे टीम में चयन।
- अंडर-19 महिला विश्व कप 2025 की 18 सदस्यीय भारतीय टीम में जगह बनाई।
- बीसीसीआई अंडर-19 महिला टी-20 ट्रॉफी में हैट्रिक सहित 6 विकेट हासिल किए।
- नेशनल क्रिकेट एकेडमी के टेस्ट मैच में हैट्रिक के साथ कुल 10 विकेट झटके।
- मध्य प्रदेश अंडर-15 और अंडर-19 टीम की कप्तानी की।
- एमपीसीए अंडर-19 डिविजनल ट्रॉफी जीतने वाली इंदौर टीम की कप्तान रहीं।
- आईडीसीए द्वारा 'इमर्जिंग प्लेयर' और इंदौर कोल्ट्स द्वारा 'बेस्ट अपकमिंग क्रिकेटर' सम्मान से नवाजी गईं।
- मध्य प्रदेश प्रीमियर लीग में चंबल घड़ियाल टीम का हिस्सा रहीं।
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पिता के भरोसे ने बनाया मजबूत खिलाड़ी
अनादि मानती हैं कि क्रिकेट मैदान पर मिली हर सफलता के पीछे उनके पिता का अटूट विश्वास है। जब भी मुश्किल समय आया, पिता ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। यही वजह है कि आज वह भारतीय क्रिकेट में एक मजबूत पहचान बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही हैं। फादर्स डे पर अनादि और अनुराग तागड़े की यह कहानी बताती है कि जब किसी पिता का विश्वास, त्याग और समर्पण अपने बच्चे के सपनों के साथ जुड़ जाता है, तो मंजिल चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, उसे हासिल किया जा सकता है।












