Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

फादर्स डे स्पेशल:पिता-पुत्र की वकील जोड़ी बनी मिसाल, बेटा दिला रहा इंसाफ

हाईकोर्ट के एक चैंबर में वकालत का पेशा केवल मुकदमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां पिता और पुत्र के विश्वास, अनुभव और सीख का अनोखा संगम भी दिखाई देता है। वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश सक्सेना और उनके पुत्र सारांश सक्सेना की जोड़ी आज न्यायालय में एक सफल वकील जोड़ी के रूप में पहचान बना चुकी है।
पिता-पुत्र की वकील जोड़ी बनी मिसाल, बेटा दिला रहा इंसाफ

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल।  20 वर्षों से वकालत कर रहे राजेश सक्सेना के साथ उनके पुत्र सारांश सक्सेना पिछले तीन वर्षों से कानून की दुनिया में सक्रिय हैं। दोनों का मानना है कि वकालत केवल पेशा नहीं, बल्कि न्याय और सच के पक्ष में खड़े होने की जिम्मेदारी है।

चैंबर में पिता-पुत्र का अनोखा रिश्ता

हाईकोर्ट के चैंबर में रोज फाइलों पर चर्चा होती है और मुकदमों की रणनीति बनाई जाती है। यहां एक मेज के दोनों ओर बैठे राजेश सक्सेना और सारांश सक्सेना केवल वकील नहीं, बल्कि पिता और पुत्र भी हैं। कभी पिता को काला कोट पहनकर अदालत जाते देखने वाला बेटा आज उन्हीं के साथ बैठकर मुकदमों की तैयारी करता है। अदालत के भीतर उनकी पहचान एक सफल वकील जोड़ी के रूप में है।

ये भी पढ़ें: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जबलपुर पहुंचीं: योग दिवस और दीक्षांत समारोह में होंगी शामिल, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

पहले केस में मिला अनुभव काम आया 

सारांश सक्सेना के करियर का पहला बड़ा मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा था, जिसे कथित रूप से गलत साक्ष्यों के आधार पर जेल भेज दिया गया था। मामले की फाइल लेकर जब वह पिता के पास पहुंचे तो राजेश सक्सेना ने उन्हें कानूनी धाराओं के साथ जिरह की बारीकियां भी समझाईं। सारांश ने हर तथ्य और दस्तावेज का गहराई से अध्ययन किया और अदालत में मजबूती से पक्ष रखा। इस मामले में मिली सफलता ने उनके आत्मविश्वास को नई दिशा दी।

17 किसानों की लड़ाई बनी यादगार मुकदमा

पिता-पुत्र की जोड़ी के लिए 17 किसानों का मामला सबसे यादगार मुकदमों में से एक रहा। किसानों ने एक बड़ी कंपनी से बीज खरीदे थे, लेकिन कथित रूप से बीज नकली निकलने से उनकी फसल बर्बाद हो गई थी। दूसरी ओर कंपनी ने अपने पक्ष में 10 से अधिक वकीलों की टीम उतार दी थी। अनुभव और नई सोच के मेल से दोनों ने किसानों के पक्ष में मजबूती से दलीलें रखीं और आखिरकार फैसला किसानों के पक्ष में आया।

ये भी पढ़ें: CG NEWS : कोरिया तिहरा हत्याकांड में बड़ा खुलासा: 4 आरोपियों ने किया सरेंडर, BJP नेता को कार में जिंदा जलाने का मामला

'सच कभी नहीं हारता' बना जीवन का मंत्र

सारांश बताते हैं कि वकालत शुरू करने से पहले पिता ने उन्हें एक ही सीख दी थी हमेशा सच का साथ दो, क्योंकि सच कभी नहीं हारता। आज भी किसी नए मामले की तैयारी करते समय वह इसी बात को याद रखते हैं। वहीं राजेश सक्सेना मानते हैं कि नई पीढ़ी कानून और तकनीक के बदलते स्वरूप को बेहतर समझती है। यही वजह है कि चैंबर में सीखने की प्रक्रिया दोनों दिशाओं में चलती रहती है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

Latest Posts