पिता के संघर्ष ने दिलाई पहचान:बॉक्सर आशा रोका अब फिल्म 'जेलर-2' में आएंगी नजर, नेशनल गेम्स में 6 सिल्वर पदक जीते

मनोज चौरसिया, भोपाल। जिला अस्पताल की रसोई में कार्यरत पिता ने आर्थिक तंगी के बावजूद बेटी के खेल करियर को कभी रुकने नहीं दिया। आज आशा रोका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के साथ ही दक्षिण भारतीय सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म 'जेलर-2' में भी नजर आने वाली हैं।
पिता के संघर्ष ने बनाई सफलता की राह
आशा रोका बताती हैं कि उनके पिता रिक्की राम रोका पिछले 39 वर्षों से भोपाल के जिला अस्पताल जयप्रकाश की रसोई में कार्यरत हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, लेकिन पिता ने कभी उनकी हिम्मत टूटने नहीं दी। उन्होंने हमेशा बेटी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। आशा का कहना है कि आज जो कुछ भी वह हैं, उसमें सबसे बड़ा योगदान उनके पिता का है।
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सपनों को पूरा करने के लिए किया हर संभव प्रयास
आशा ने बताया कि उनके खिलाड़ी बनने के सपने को पूरा करने के लिए पिता ने कई कठिनाइयों का सामना किया। कभी साइकिल से स्टेडियम तक आना-जाना किया, तो कभी ट्रेनिंग, यूनिफॉर्म और प्रतियोगिताओं के खर्च के लिए कर्ज तक लिया। संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने बेटी की तैयारी नहीं रुकने दी। यही त्याग और मेहनत आज उनकी सफलता की नींव बना।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान
आशा रोका ने अपनी मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पांच सिल्वर पदक जीते हैं। इसके अलावा नेशनल गेम्स में भी उन्होंने 6 सिल्वर पदक अपने नाम किए। यूएफसी फाइट में भाग लेकर कांस्य पदक हासिल किया। उन्होंने बैंकॉक, रूस और कजाकिस्तान जैसी विदेशी धरती पर भी शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन किया।
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अब फिल्म 'जेलर-2' में दिखेगा दम
खेल जगत में पहचान बनाने के बाद अब आशा रोका अभिनय की दुनिया में भी कदम रख रही हैं। वे दक्षिण भारतीय सुपरस्टार रजनीकांत की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'जेलर-2' में फाइट सीन करती नजर आएंगी। उनके पिता रिक्की राम रोका का कहना है कि बचपन से ही बेटी की खेलों में रुचि थी और उन्होंने कभी संसाधनों की कमी को उसकी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया। आज बेटी की उपलब्धियां उनके लिए सबसे बड़ा गर्व हैं।












