IAS अवॉर्ड के लिए रचा गया फर्जी फैसले का खेल: निलंबित जज गिरफ्तार

इंदौर के बहुचर्चित फर्जी फैसला कांड में विशेष जांच दल (SIT) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अमनसिंह भूरिया को गिरफ्तार किया है। हालांकि, हाईकोर्ट से पहले ही अग्रिम जमानत मिलने के कारण उन्हें औपचारिक गिरफ्तारी के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया। SIT ने उनसे करीब दो घंटे तक पूछताछ भी की। यह मामला राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे संतोष वर्मा से जुड़ा है। वर्ष 2021 में हर्षिता अग्रवाल की शिकायत पर एमजी रोड थाना पुलिस ने संतोष वर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। बाद में जांच के दौरान स्पेशल जज विजेंद्रसिंह रावत का नाम भी सामने आया और पुलिस ने उन्हें भी आरोपी बनाया।
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फर्जी बरी आदेश बनवाने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार संतोष वर्मा उस समय भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अवार्ड के लिए विचाराधीन थे। लेकिन उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरण इस प्रक्रिया में बाधा बन सकता था। आरोप है कि इसी कारण एक साजिश के तहत उन्हें बरी दिखाने वाला फर्जी न्यायिक आदेश तैयार कराया गया।SIT का दावा है कि संतोष वर्मा ने तत्कालीन सीजेएम अमनसिंह भूरिया और स्पेशल जज विजेंद्रसिंह रावत के साथ मिलकर कथित साजिश रची थी। इसी साजिश के तहत विजेंद्रसिंह रावत की अदालत से बरी किए जाने का फर्जी फैसला तैयार किया गया।
केस ट्रांसफर पर भी सवाल
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि जिस आपराधिक प्रकरण में संतोष वर्मा आरोपी थे, उसे अमनसिंह भूरिया ने स्पेशल जज विजेंद्रसिंह रावत की अदालत में ट्रांसफर कर दिया था। जबकि संबंधित थाना क्षेत्र रावत की अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। हालांकि अमनसिंह भूरिया ने जांच एजेंसियों को दिए जवाब में कहा है कि उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही केस ट्रांसफर किया था और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं थी।
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कोर्ट कर्मचारी भी आरोपी
SIT ने जांच के दौरान स्पेशल जज की अदालत में पदस्थ कर्मचारी नीतू को भी आरोपी बनाया है। पुलिस का मानना है कि फर्जी आदेश तैयार करने और रिकॉर्ड में हेरफेर करने में उसकी भूमिका हो सकती है।
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हाईकोर्ट ने किया था निलंबित
अमनसिंह भूरिया पूर्व में सिंगरौली जिले के बेड़न क्षेत्र में पदस्थ रहे हैं। मामले की जांच के बाद हाईकोर्ट ने उन्हें निलंबित कर दिया था। एसीपी विनोद दीक्षित के अनुसार भूरिया एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के साथ स्वयं SIT के समक्ष पेश हुए थे। कोर्ट के निर्देशों के अनुसार गिरफ्तारी की कार्रवाई कर उन्हें जमानत पर रिहा किया गया।अब SIT पूरे प्रकरण में न्यायिक रिकॉर्ड, आदेशों और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि फर्जी फैसले की कथित साजिश में किन-किन लोगों की भूमिका रही।












