फर्जी IAS तृप्ति ने AI से बनवाए जॉइनिंग लेटर, नौकरी के नाम पर ठगी; 90 लाख की ठगी का आरोप

भोपाल। चंदेरी पुलिस ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले प्रखर को लखनऊ से गिरफ्तार कर उसका लैपटॉप जब्त किया है। पुलिस अब उसके डिजिटल डिवाइस की जांच कर फर्जी दस्तावेजों और नेटवर्क से जुड़ी जानकारी जुटा रही है। तृप्ति और सुधांशु को 3 सितंबर को बाग सेवनिया पुलिस प्रोडक्शन वारंट पर भोपाल लाई थी और दोनों 7 सितंबर तक रिमांड पर हैं। पूछताछ में चंदेरी के एक टूरिस्ट गाइड से उसकी बेटी को नौकरी दिलाने के नाम पर 3 लाख रुपए लेने की बात सामने आई है। तृप्ति ने शुरुआत में खुद को IAS बताने का काम मजे के लिए शुरू किया था, लेकिन बाद में इसी पहचान का इस्तेमाल लोगों से ठगी करने के लिए किया।
फर्जी दस्तावेज तैयार करता था प्रखर
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि तृप्ति और उसका भाई सुधांशु नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से संपर्क करते थे। इसके बाद फर्जी जॉइनिंग लेटर और दूसरे दस्तावेज तैयार कर पीड़ितों को भरोसा दिलाया जाता था। इन दस्तावेजों को तैयार करने की जिम्मेदारी उनके साथी प्रखर की थी, जो AI की मदद से सरकारी दस्तावेजों जैसी सामग्री तैयार करता था।
ये भी पढ़ें: 27 नवंबर को दुनिया उठाएगी बाल विवाह के खिलाफ आवाज! UN ने घोषित किया अंतरराष्ट्रीय दिवस
चंदेरी पुलिस ने लैपटॉप किया जब्त
चंदेरी पुलिस ने प्रखर को लखनऊ से गिरफ्तार किया और उसके कब्जे से लैपटॉप जब्त किया है। पूछताछ के बाद उसे जेल भेज दिया गया था, लेकिन पुलिस अब उसके डिजिटल डिवाइस से मामले की कड़ियां जोड़ रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फर्जी दस्तावेज कैसे बनाए जाते थे और इस काम में उसके साथ और कौन लोग शामिल थे।
तृप्ति-सुधांशु से पूछताछ में कई खुलासे
इधर, आरोपी भाई-बहन तृप्ति और सुधांशु को 3 सितंबर को भोपाल की बाग सेवनिया पुलिस प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आई थी। दोनों 7 सितंबर तक पुलिस रिमांड पर हैं और पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, दोनों ने फिलहाल दो ठगी की वारदातों को अंजाम देने की बात स्वीकार की है।
IAS बनकर बनाया रसूख, फिर शुरू की ठगी
तृप्ति ने पुलिस को बताया कि शुरुआत में उसने खुद को IAS अधिकारी बताने का काम केवल मजे के लिए शुरू किया था। धीरे-धीरे सरकारी अधिकारियों और दूसरे लोगों के बीच उसकी पहचान का असर दिखने लगा और वह सरकारी रेस्ट हाउस, टूरिज्म स्पॉट तक पहुंच बनाने में सफल होने लगी। इसके बाद उसका आत्मविश्वास बढ़ा और उसने इसी पहचान का इस्तेमाल ठगी के लिए करना शुरू कर दिया।
सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से की ठगी
बाग सेवनिया पुलिस के मुताबिक, तृप्ति और सुधांशु ऐसे लोगों की तलाश करते थे, जिन्हें सरकारी नौकरी की जरूरत होती थी। उन्हें सरकारी विभाग में नौकरी लगवाने का भरोसा देकर रकम मांगी जाती थी, जबकि सुधांशु अपने रसूख का दिखावा कर बड़े कारोबारियों से मुलाकात कराने का दावा करता था। इसके अलावा होटलों और रिजॉर्ट के ठेके दिलाने का झांसा देकर भी लोगों को ठगने की कोशिश की जाती थी।
ये भी पढ़ें: स्वतंत्र भारद्वाज कोर्ट में पेश, अदालत ने एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा
टूरिस्ट गाइड से लिए 3 लाख रुपए
जांच में चंदेरी के किला कोठी का एक मामला भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, यहां तृप्ति की मुलाकात एक टूरिस्ट गाइड से हुई थी और उसने खुद को IAS अधिकारी बताते हुए उसकी बेटी की MP Tourism यानी MPT में नौकरी लगवाने का भरोसा दिया था। इसके बदले गाइड से 3 लाख रुपए लिए गए थे। तृप्ति ने अपने मोबाइल से गाइड के मोबाइल नंबर पर जॉइनिंग लेटर भी भेजा था। जांच में पता चला कि जॉइनिंग लेटर भेजने के करीब 37 मिनट बाद उसे डिलीट कर दिया गया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह दस्तावेज किस डिवाइस पर तैयार किया गया था और भेजने के बाद उसे डिलीट करने का फैसला किसने लिया था।




















