FB-Instagram से बच्चों को खतरा?US कोर्ट ने मेटा पर लगाया 3100 करोड़ का जुर्माना, जानें पूरा मामला

अमेरिका के न्यू मेक्सिको में जूरी ने सोशल मीडिया कंपनी Meta पर 375 मिलियन डॉलर (करीब 3100 करोड़ रुपए) का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने माना कि कंपनी ने बच्चों की सुरक्षा और मानसिक सेहत से जुड़े खतरों को छिपाया और नियमों का उल्लंघन किया। यह फैसला टेक कंपनियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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US कोर्ट ने मेटा पर लगाया 3100 करोड़ का जुर्माना, जानें पूरा मामला
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    वॉशिंगटन डीसी। दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों में से एक Meta को अमेरिका में बड़ा कानूनी झटका लगा है। न्यू मेक्सिको की एक जूरी ने कंपनी को बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े खतरों को छिपाने का दोषी ठहराते हुए 375 मिलियन डॉलर (करीब 3100 करोड़ रुपए) का भारी जुर्माना लगाया है।

    यह फैसला सात हफ्तों तक चली लंबी सुनवाई के बाद आया है। अदालत ने माना कि Meta को अच्छी तरह पता था कि, उसके प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए जोखिम भरे हो सकते हैं, लेकिन कंपनी ने इन खतरों को सार्वजनिक रूप से उजागर नहीं किया और मुनाफे को प्राथमिकता दी। यह मामला टेक कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। 

    क्या है पूरा मामला?

    यह केस न्यू मेक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज द्वारा 2023 में दायर किया गया था। राज्य सरकार ने आरोप लगाया था कि Meta के प्लेटफॉर्म Facebook, Instagram और WhatsApp बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं हैं और कंपनी को इस खतरे की जानकारी होने के बावजूद उसने इसे छिपाया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि Meta को पता था कि उसके प्लेटफॉर्म पर बच्चे कई तरह के खतरों का सामना कर सकते हैं, जैसे-

    • ऑनलाइन यौन शोषण
    • सेक्सुअल प्रिडेटर्स का संपर्क
    • मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव
    • सोशल मीडिया की लत

    इसके बावजूद कंपनी ने इन जोखिमों को लेकर यूजर्स को स्पष्ट जानकारी नहीं दी और भ्रामक दावे किए।

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    सात हफ्तों तक चली सुनवाई

    इस मामले की सुनवाई करीब सात हफ्तों तक चली। इस दौरान अदालत में कई अहम सबूत पेश किए गए। मामले में करीब 40 गवाहों की गवाही सुनी गई, जिनमें कंपनी के पूर्व कर्मचारी और व्हिसलब्लोअर भी शामिल थे। इसके अलावा सैकड़ों दस्तावेज, रिपोर्ट्स और ईमेल्स अदालत में पेश किए गए। जूरी ने इन सभी साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद पाया कि Meta ने बच्चों की कम उम्र और अनुभवहीनता का फायदा उठाया और प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन किया कि बच्चे अधिक समय तक ऑनलाइन रहें।

    बच्चों की कमजोरियों का फायदा उठाने का आरोप

    अदालत ने माना कि Meta ने अपने प्लेटफॉर्म को इस तरह बनाया कि बच्चे लंबे समय तक उसमें व्यस्त रहें। जांच में सामने आया कि, कंपनी के एल्गोरिदम और फीचर्स बच्चों को बार-बार प्लेटफॉर्म पर लौटने के लिए प्रेरित करते हैं। राज्य के वकीलों का कहना था कि-

    • प्लेटफॉर्म में ऐसे फीचर्स शामिल किए गए जो बच्चों में लत पैदा करते हैं।
    • कंपनी को मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी थी।
    • इसके बावजूद कंपनी ने सुरक्षा उपायों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी।
    • जूरी ने इसे अनुचित व्यापारिक प्रैक्टिस माना।

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    यौन शोषण से जुड़े जोखिम छिपाने का आरोप

    मुकदमे के दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि Meta के प्लेटफॉर्म पर बच्चों को यौन शोषण से जुड़े संदेश और सामग्री मिलने का खतरा रहता है। जांच एजेंसियों ने इस मामले में एक प्रयोग भी किया। अधिकारियों ने बच्चों के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाए और पाया कि कुछ समय के भीतर ही उन प्रोफाइल्स पर यौन शोषण से जुड़े संदेश आने लगे। राज्य सरकार का दावा था कि, Meta को इन समस्याओं की जानकारी थी, लेकिन कंपनी की प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं थी।

    हजारों उल्लंघनों पर लगाया गया जुर्माना

    जूरी ने पाया कि Meta ने उपभोक्ता संरक्षण कानून का हजारों बार उल्लंघन किया। हर उल्लंघन के लिए अलग-अलग जुर्माना तय किया गया, जिसके बाद कुल राशि 375 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई।

    जुर्माने से जुड़े मुख्य तथ्य

    बिंदु

    जानकारी

    कुल जुर्माना

    375 मिलियन डॉलर

    भारतीय मुद्रा में

    लगभग 3100 करोड़ रुपये

    केस दायर

    2023

    सुनवाई अवधि

    लगभग 7 सप्ताह

    गवाहों की संख्या

    करीब 40

    हालांकि, यह राशि अभियोजन पक्ष द्वारा मांगी गई रकम से काफी कम है। राज्य ने लगभग 2.2 बिलियन डॉलर तक का हर्जाना मांगा था।

    टेक कंपनियों के लिए बड़ा संदेश

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला टेक उद्योग के लिए एक बड़ा संदेश है। अब सोशल मीडिया कंपनियों पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का दबाव और बढ़ सकता है। अमेरिका के 40 से ज्यादा राज्यों ने पहले ही Meta के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर रखे हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म युवाओं की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस फैसले के बाद अन्य राज्यों में भी ऐसे मामलों को गति मिल सकती है।

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    निवेशकों पर खास असर नहीं

    दिलचस्प बात यह रही कि, फैसले के तुरंत बाद Meta के शेयरों में लगभग 5% की बढ़ोतरी देखी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, निवेशकों को लगता है कि कंपनी इस फैसले को चुनौती दे सकती है और अंतिम कानूनी परिणाम आने में अभी समय लग सकता है।

    Meta की प्रतिक्रिया

    फैसले के बाद Meta ने स्पष्ट किया है कि, वह इस निर्णय से सहमत नहीं है और इसे चुनौती देने की योजना बना रही है। कंपनी का कहना है कि वह बच्चों की सुरक्षा के लिए लगातार काम कर रही है और इस दिशा में करोड़ों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं। Meta के प्रवक्ता के अनुसार, कंपनी लगातार सुरक्षा फीचर्स में सुधार कर रही है। हानिकारक सामग्री को पूरी तरह रोकना चुनौतीपूर्ण है। अदालत के फैसले के खिलाफ अपील की जाएगी।

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    बच्चों की सुरक्षा पर बढ़ती चिंता

    दुनिया भर में सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के साथ बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ी है। मनोवैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों में कई समस्याएं पैदा कर सकता है, जैसे-

    • चिंता और अवसाद
    • आत्म-सम्मान में कमी
    • ऑनलाइन उत्पीड़न
    • सोशल मीडिया की लत

    इसी वजह से कई देशों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए सख्त नियम बनाने की मांग उठ रही है।

    क्यों अहम है यह फैसला?

    न्यू मेक्सिको का यह फैसला कई कारणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    • यह पहली बार है जब किसी जूरी ने बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे पर Meta को दोषी ठहराया है।
    • यह फैसला टेक कंपनियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
    • इससे भविष्य में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए नए नियम बन सकते हैं।
    • बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर वैश्विक बहस को नई दिशा मिल सकती है।
    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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