नसबंदी से भी नहीं लगी डॉग बाइट पर ‘पाबंदी’

अशोक गौतम-भोपाल। कोलार एच सेक्टर निवासी रामलाल रावत को कुछ दिन पहले कुत्तों ने हमला कर लहूलुहान कर दिया। वे काल सेंटर से नौकरी कर घर जा रहे थे, रास्ते में कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया, जिससे वे बाइक से गिर गए। यह अकेले रामलाल पर कुत्तों पर हमले का मामला नहीं है बल्कि पूरे प्रदेश में रोज औसतन 100 अधिक ऐसे मामले सामने आते हैं।
अगर हम पिछले 5 साल के आंकड़े देखें तो भोपाल, इंदौर सहित दस निकायों में कुत्तों की नसबंदी पर 50 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इसके बाद भी इनके हमलों की घटनाओं पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। राजधानी भोपाल में सात करोड़ रुपए खर्च हुए हैं, यहां सबसे ज्यादा 1854 हजार शिकायतें साल भर में सीएम हेल्प लाइन में दर्ज हुई हैं।
खाने की कमी से बैचेनी
ज्यादा ठंड और गर्मी में कुत्ते बेचैन हो जाते हैं। ठंड में ब्रीडिंग का समय रहता है। वे अपने बच्चों को बचाने के लिए राह चलते लोगों को काटने दौड़ पड़ते हैं। वहीं गर्मी में कुत्ते अपने शरीर का टेम्प्रेचर मेंटेन नहीं कर पाते हैं। इसलिए वे सांस के जरिए अपने शरीर का टेम्प्रेचर सामान्य रखते हैं। यदि खाने-पीने में कोई कमी है तो उनकी बेचैनी और भी बढ़ जाती है।
डॉग बाइट के बड़े मामले
- अगस्त 2022: बांसखेड़ी इलाके में एक सात साल की बच्ची को कुत्ते ने हमला कर दिया था। उसकी आंख और मुंह बुरी तरह से जख्मी हो गए।
- 10 जनवरी 2024: मिनाल रेसीडेंसी इलाके में 7 महीने के बच्चे को नोंच कर मार डाला था।
- 15 जनवरी 2024: चौकी इमामवाड़ा कॉलोनी में 4 लोगों को कुत्तों ने काट लिया। इनमें एक डेढ़ साल का बच्चा भी शामिल हैं।
- 9 जुलाई 2024 : बाइक सवार पिता-बेटे पर कुत्ते का हमला, बाइक फिसलने से एक की मौत।
राज्यसभा में पेश मप्र में डॉग बाइट के आंकड़े
वर्ष मामले 2024 1,00,462 2023 1,02,275 2022 65,833 2021 84,478 2020 1,79,930 2019 2,48,680 2018 2,80,940 2024 के आंकड़े सितंबर तक के हैं।उज्जैन में सबसे कम खर्च हुआ
शहर नसबंदी पर खर्च एजेंसियां इंदौर 16.46 करोड़ 02 भोपाल 7.31 करोड़ 04 उज्जैन 31.40 हजार 03 रतलाम 1.68 करोड़ 02 जबलपुर 3.78 करोड़ 03 कटनी 45 हजार 02 रीवा 18 लाख 01 देवास 14.71 लाख 01 ग्वालियर 3.10 करोड़ 04डॉग बाइट पर नियंत्रण करने के लिए चल रहे हैं प्रयास
शहरों में डॉग बाइट की घटनाओं की शिकायतें आ रही हैं। इस पर नियंत्रण करने के लिए नगरीय निकायों के माध्यम से आवारा कुत्तों की नसबंदी अभियान चलाए जाते हैं। डॉग बाइट की घटनाओं को रोकने के लिए और भी प्रयास किए जा रहे हैं। -लखन पटेल, मंत्री, पशुपालन एवं डेयरी विभाग
कोई भी डॉग अपनी मर्जी और स्वाभाविक रूप से इंसान पर हमला नहीं करता है, उसे जब कोई छेड़ता है, तो हमला करता है। वर्तमान में कई ऐसी बाइक आ रही हैं, जिससे बहुत तेज आवाज होती है। इस तरह की आवाजों से वे इरीटेट होते हैं। इससे वे काटने दौड़ते हैं। दौड़ते हैं। -अजय रामटेके,प्रभारी, राज्य स्तरीय पशु चिकित्सा अस्पताल भोपाल





















