सुप्रीम कोर्ट में इमोशनल हुए राजपाल यादव, कहा - ‘मेरे 17 करोड़ डूब गए’, सुनाई दिलचस्प कहानी

एक्टर राजपाल यादव इन दिनों अपनी फिल्मों से ज्यादा करीब 16 साल पुराने चेक बाउंस मामले को लेकर चर्चा में हैं। इस मामले में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने बची हुई रकम जमा करने को लेकर राजपाल यादव को सख्त निर्देश दिए और कहा कि उन्हें तय रकम जल्द जमा करनी होगी। हालांकि, सुनवाई के दौरान जज और राजपाल यादव के बीच हल्की-फुल्की बातचीत भी देखने को मिली, जिसने माहौल थोड़ा सहज कर दिया।
CJI ने पूछा- अब फिल्म बना रहे हैं या नहीं?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राजपाल यादव से पूछा कि क्या वह अब कोई फिल्म बना रहे हैं? इस पर राजपाल यादव ने अपने फिल्मी सफर का जिक्र करते हुए कहा कि 16 साल में वह करीब 250 फिल्मों में काम कर चुके हैं। राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ का जिक्र करते हुए कहा कि इस फिल्म में करीब 5 करोड़ रुपये लगाए गए थे, लेकिन इससे उन्हें भारी नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि फिल्म से जुड़े मामले में उनका काफी पैसा फंस गया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को 1 करोड़ 15 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया। साथ ही बाकी 85 लाख रुपये सोमवार तक RTGS के जरिए जमा करने को कहा गया।
कोर्ट में फिल्म को लेकर भी हुई मजेदार बात
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने हल्के अंदाज में कहा कि राजपाल यादव को कोई अच्छी फिल्म बनानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट में कई ऐसे वकील हैं, जो अच्छे अभिनेता बन सकते हैं। इस पर राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ का जिक्र करते हुए कहा कि इस फिल्म में उन्हें काफी नुकसान हो चुका है। उन्होंने बताया कि करीब 17 करोड़ रुपये डूब गए और फिल्म थिएटर में भी ठीक से रिलीज नहीं हो पाई। राजपाल यादव ने कहा कि फिल्म का कुल बजट करीब 22 करोड़ रुपये था और इससे कोई कमाई नहीं हो सकी।
2010 में शुरू हुआ था पूरा मामला
यह मामला साल 2010 का है। उस समय राजपाल यादव ने ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपये की मदद ली थी। फिल्म तैयार हुई और 2012 में रिलीज हुई, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। पैसे लौटाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। राजपाल यादव की ओर से दिए गए सात चेक बाउंस होने के बाद साल 2012 में दोनों पक्षों के बीच समझौता भी हुआ था। इसमें ब्याज समेत करीब 11 करोड़ रुपये चुकाने की बात सामने आई थी।
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मामला अदालत तक पहुंचा, जेल भी जाना पड़ा
इसके बाद मामला अदालत पहुंच गया। साल 2018 में ट्रायल कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी माना। बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने जुलाई 2026 में उनकी तीन महीने की जेल की सजा बरकरार रखी। फरवरी 2026 में राजपाल यादव को तिहाड़ जेल भी जाना पड़ा था। इसके बाद करीब 1.5 करोड़ रुपये जमा करने के बाद उन्हें राहत मिली थी। अब सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान उन्हें बची हुई रकम जमा करने के लिए समय दिया गया है। यानी करीब 16 साल से चल रही ‘अता पता लापता’ की यह कहानी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।




















