भारत-न्यूजीलैंड FTA 19 अक्टूबर से लागू होने की उम्मीद, भारतीय निर्यात को मिलेगी ड्यूटी फ्री एंट्री

भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA के 19 अक्टूबर से लागू होने की उम्मीद है। एक अधिकारी ने 15 सितंबर को यह जानकारी दी। दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते का उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं के कारोबार को बढ़ाने के साथ निवेश को प्रोत्साहित करना है। भारत और न्यूजीलैंड ने 27 अप्रैल को इस व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौता लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार के कई क्षेत्रों में टैरिफ और बाजार पहुंच से जुड़ी शर्तों में बदलाव होगा।
न्यूजीलैंड में भारत का 100% निर्यात ड्यूटी फ्री
FTA के तहत न्यूजीलैंड ने भारत से होने वाले 100% निर्यात को टैक्स फ्री करने की बात कही है। इसका मतलब है कि समझौता लागू होने के बाद भारत से न्यूजीलैंड भेजे जाने वाले सामान पर वहां इम्पोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी। फिलहाल न्यूजीलैंड भारत के कुछ प्रमुख उत्पादों पर अधिकतम 10% तक शुल्क लगाता है। इनमें सिरेमिक, कालीन, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट जैसे उत्पाद शामिल हैं। FTA के बाद इन उत्पादों समेत भारत के सभी निर्यात को न्यूजीलैंड के बाजार में ड्यूटी फ्री पहुंच मिलने की उम्मीद है।
15 साल में भारत में 20 अरब डॉलर निवेश
दोनों देशों के बीच समझौते में निवेश को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत न्यूजीलैंड से अगले 15 साल में भारत में 20 बिलियन डॉलर, यानी करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है। इससे भारत में निवेश, कारोबार और रोजगार से जुड़े नए अवसर बनने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को लंबे समय तक मजबूत करने में यह निवेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
IT, शिक्षा और टूरिज्म में भारतीयों के लिए अवसर
FTA में भारत के सर्विस सेक्टर के लिए भी बाजार पहुंच को बेहतर किया गया है। भारत को IT, शिक्षा, फाइनेंशियल सर्विसेज, कंस्ट्रक्शन और टूरिज्म जैसे हाई-वैल्यू सेक्टरों में न्यूजीलैंड के बाजार तक पहुंच मिलेगी। इसके अलावा AYUSH, योग इंस्ट्रक्टर्स, इंडियन शेफ और म्यूजिक टीचर्स के लिए भी काम के अवसर बढ़ने का रास्ता खुलेगा। समझौते में टेम्परेरी एम्प्लॉयमेंट एंट्री वीजा की व्यवस्था भी शामिल है। इसके तहत हर साल 5,000 भारतीय स्किल्ड प्रोफेशनल्स न्यूजीलैंड जाकर अधिकतम तीन साल तक काम कर सकेंगे। इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और एजुकेशन जैसे क्षेत्रों में भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए विशेष अवसर बनने की उम्मीद है।
भारतीय वाइन और स्पिरिट्स को भी मिलेगा फायदा
समझौते के तहत भारतीय वाइन और स्पिरिट्स को न्यूजीलैंड के बाजार में ड्यूटी फ्री एक्सेस मिलेगा। इससे भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड के बाजार में अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
भारत ने 70% टैरिफ लाइन्स खोलीं
न्यूजीलैंड को भारतीय बाजार में पहुंच देने के लिए भारत ने करीब 70% टैरिफ लाइन्स खोलने पर सहमति जताई है। इसमें सेब, कीवीफ्रूट और मनुका हनी जैसे कृषि उत्पाद शामिल हैं। हालांकि इन उत्पादों पर दी गई टैरिफ रियायतें पूरी तरह बिना शर्त नहीं होंगी। इनके लिए कोटा लिमिट और मिनिमम इम्पोर्ट प्राइस जैसी शर्तें लागू रहेंगी। इसके अलावा न्यूजीलैंड के 54% से ज्यादा निर्यात को भारत में समझौता लागू होने के साथ ही शून्य ड्यूटी मिलेगी। इसमें शीप मीट, ऊन, कोयला और फॉरेस्ट्री प्रोडक्ट्स शामिल हैं। वहीं सीफूड, आयरन, स्टील और एल्युमीनियम स्क्रैप जैसे उत्पादों पर टैरिफ को अगले 10 साल में चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाएगा।
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डेयरी और कुछ संवेदनशील उत्पाद बाहर
भारत ने अपने घरेलू हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को टैरिफ रियायतों से बाहर रखा है। इनमें डेयरी उत्पाद, दूध, क्रीम, पनीर, प्याज, दालें, चीनी, आर्म्स-अम्युनिशन और कुछ मेटल्स शामिल हैं। इसका मकसद घरेलू उत्पादकों और संवेदनशील क्षेत्रों को विदेशी प्रतिस्पर्धा के संभावित असर से बचाना है।
2010 में शुरू हुई थी बातचीत
भारत और न्यूजीलैंड के बीच इस व्यापार समझौते को लेकर बातचीत काफी पुरानी है। दोनों देशों के बीच FTA पर चर्चा 2010 में शुरू हुई थी। करीब नौ दौर की बातचीत के बाद वर्ष 2015 में प्रक्रिया रोक दी गई थी। इसके बाद मार्च 2025 में बातचीत दोबारा शुरू हुई और 22 दिसंबर 2025 को दोनों देशों ने वार्ता सफलतापूर्वक पूरी होने की घोषणा की। अब समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।
FTA में कुल 20 चैप्टर
भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौते में कुल 20 चैप्टर शामिल हैं। इनमें गुड्स, सर्विसेज, रूल्स ऑफ ओरिजिन, टेक्निकल बैरियर और कस्टम प्रोसेस जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। समझौते से भारत को न्यूजीलैंड के बाजार में अपने सामान और सेवाओं के लिए बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है, जबकि न्यूजीलैंड के लिए भारत का बड़ा उपभोक्ता बाजार खुलता है। FTA के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।




















