क्लीन चिट के बाद भी ठेकेदार का भुगतान रोकना गलत, हाईकोर्ट ने नगर पालिका को 22 लाख देने कहा

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सिवनी के दल सागर तालाब पर फुट ओवर ब्रिज निर्माण और सौंदर्यीकरण का काम करने वाले ठेकेदार राहुल जैन को राहत दी है। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने सिवनी नगर पालिका परिषद को निर्देश दिया है कि वह ठेकेदार की करीब 22 लाख रुपए की अविवादित बकाया राशि 45 दिनों के भीतर जारी करे। तय समय में भुगतान नहीं होने पर 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। इसके साथ ही कोर्ट ने नगर पालिका को याचिकाकर्ता को 15 हजार रुपए हर्जाना देने का भी आदेश दिया है।
2023 में मिला था फुट ओवर ब्रिज का काम
याचिकाकर्ता राहुल जैन ने 10 मई 2023 को सिवनी नगर पालिका परिषद के साथ रजिस्टर्ड वर्क कॉन्ट्रैक्ट एग्रीमेंट किया था। इसके तहत उन्हें दल सागर तालाब पर फुट ओवर ब्रिज के निर्माण और सेंट्रल आइलैंड के विकास का काम सौंपा गया था। ठेकेदार की ओर से बताया गया कि काम के लिए बड़ी संख्या में मैनपावर, मशीनरी और निर्माण सामग्री लगाई गई थी और काफी काम पूरा भी कर लिया गया था। इसी बीच दल सागर तालाब से जुड़े मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में कार्रवाई शुरू हो गई।
NGT के निर्देश से रुक गया निर्माण
NGT के अंतरिम निर्देशों के चलते फुट ओवर ब्रिज और अन्य निर्माण कार्य रोकना पड़ा। बाद में NGT ने तालाब को उसकी मूल स्थिति में बहाल करने और अधूरे फुट ओवर ब्रिज को गिराने के निर्देश दिए। काम रुकने के बाद ठेकेदार ने नगर पालिका से अपने बकाए का भुगतान करने और अनुबंध को औपचारिक रूप से समाप्त करने की मांग की। याचिका के अनुसार, इसके बाद नगर पालिका की ओर से भुगतान को लेकर आनाकानी की गई।
EOW जांच के चलते रोका गया था भुगतान
नगर पालिका की ओर से फुट ओवर ब्रिज निर्माण में तकनीकी और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों का हवाला दिया गया। इन शिकायतों की जांच आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) द्वारा की जा रही थी। इसी जांच के चलते ठेकेदार की शेष राशि का भुगतान रोके जाने की बात सामने आई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिनव उमाशंकर तिवारी ने कोर्ट को बताया कि ठेकेदार को EOW की जांच में क्लीन चिट मिल चुकी है। इसके बावजूद राज्य शासन और नगर पालिका की ओर से फंड जारी नहीं होने और भुगतान लंबित रखने के लिए अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं।
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सरकारी फंड का बहाना देकर भुगतान नहीं रोक सकते
हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि जब ठेकेदार को EOW से क्लीन चिट मिल चुकी है और निर्माण कार्य उसकी गलती के बिना NGT की कार्रवाई और जांच के कारण प्रभावित हुआ, तो उसकी वैध बकाया राशि को अनिश्चित समय तक नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने नगर पालिका को करीब 22 लाख रुपए की अविवादित राशि 45 दिनों के भीतर ठेकेदार को देने का निर्देश दिया है। निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर 8 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा। इसके अलावा नगर पालिका को ठेकेदार को 15 हजार रुपए का हर्जाना भी देना होगा। इस आदेश के साथ हाई कोर्ट ने साफ किया कि सरकारी अनुदान या फंड उपलब्ध नहीं होने का आधार बनाकर ठेकेदार की वैध और अविवादित राशि का भुगतान अनिश्चित समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता।




















