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ईमेल्स से उठा तूफान :हर्षा रिछारिया के ‘लव जिहाद’ दावे ने सोशल मीडिया पर छेड़ी बड़ी बहस

महाकुंभ से चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया ने एक वीडियो में कथित ईमेल्स के आधार पर ‘लव जिहाद’ और ब्रेनवॉश का दावा किया। जानिए पूरा मामला, क्या हैं आरोप और क्यों उठ रहे हैं सवाल।
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हर्षा रिछारिया के ‘लव जिहाद’ दावे ने सोशल मीडिया पर छेड़ी बड़ी बहस

भोपाल। महाकुंभ के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल होकर चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि उनके द्वारा साझा किया गया एक वीडियो है, जिसमें उन्होंने कथित ईमेल्स के आधार पर लव जिहाद और ब्रेनवॉश जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इस वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है-कुछ लोग उनके दावों का समर्थन कर रहे हैं, तो कई इसे एकतरफा और भड़काऊ करार दे रहे हैं। हर्षा ने दावा किया कि उन्हें मोहम्मद अशहर नाम के व्यक्ति से लगातार ईमेल्स मिले, जिनमें सहानुभूति और व्यक्तिगत चिंता जताई गई। उनके अनुसार इसी तरह की बातचीत के जरिए लड़कियों को मानसिक रूप से प्रभावित किया जाता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है, जिससे इस पूरे मामले पर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

ईमेल्स से शुरू हुआ विवाद

हर्षा रिछारिया ने अपने वीडियो में बताया कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें एक व्यक्ति की ओर से लगातार ईमेल्स मिल रहे थे। इन मेल्स में सीधे तौर पर कोई अपमानजनक भाषा नहीं थी बल्कि चिंता जताने वाले सवाल थे-जैसे कि उनकी सेहत कैसी है, वे सोशल मीडिया पर एक्टिव क्यों नहीं हैं और भविष्य की क्या योजना है। हर्षा का कहना है कि यही तरीका सबसे खतरनाक होता है क्योंकि इसमें सामने वाला व्यक्ति भरोसा जीतने की कोशिश करता है। उनके मुताबिक यह एक तरह की रणनीति है जिसमें पहले भावनात्मक जुड़ाव बनाया जाता है और फिर धीरे-धीरे व्यक्ति को प्रभावित किया जाता है।

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ब्रेनवॉश की प्रक्रिया पर हर्षा का दावा

वीडियो में हर्षा ने विस्तार से बताया कि किस तरह लड़कियां कथित रूप से इस जाल में फंसती हैं। उनके अनुसार, जब कोई लड़की अपने ही समाज या परिवार से उपेक्षित महसूस करती है, तब वह भावनात्मक रूप से कमजोर हो जाती है। ऐसे समय में अगर कोई व्यक्ति उसे सहारा देता है, तो वह उस पर जल्दी भरोसा कर लेती है। हर्षा ने कहा कि यही वह बिंदु होता है जहां से ब्रेनवॉश की प्रक्रिया शुरू होती है। उनके अनुसार पहले सहानुभूति फिर विश्वास और उसके बाद धीरे-धीरे विचारों में बदलाव- यह पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से चलती है। हालांकि इस तरह के दावों पर विशेषज्ञ अक्सर यह कहते हैं कि किसी भी सामाजिक या व्यक्तिगत संबंध को इस तरह सामान्यीकृत करना सही नहीं होता और हर मामले को अलग दृष्टिकोण से देखना जरूरी होता है।

समाज पर भी उठाए सवाल

हर्षा रिछारिया ने अपने बयान में केवल दूसरे पक्ष को ही जिम्मेदार नहीं ठहराया बल्कि अपने समाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति को अपने ही लोग समझने के बजाय उसका मजाक उड़ाते हैं या उसे फेक और पाखंडी कहकर खारिज कर देते हैं तो वह भावनात्मक रूप से टूट जाता है। उनका मानना है कि ऐसी स्थिति में कोई बाहरी व्यक्ति अगर सहानुभूति दिखाता है, तो वह अधिक प्रभावी हो जाता है। हर्षा ने इसे समाज की बड़ी कमी बताया और कहा कि अगर लोग अपने ही लोगों का साथ दें, तो ऐसी स्थितियां पैदा ही नहीं होंगी।

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सोशल मीडिया पर दो धड़े

जैसे ही यह वीडियो सामने आया सोशल मीडिया पर दो अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। एक वर्ग ने हर्षा के दावों का समर्थन करते हुए इसे जागरूकता बताया जबकि दूसरे वर्ग ने इसे भड़काऊ नैरेटिव करार दिया। कुछ यूजर्स का कहना है कि बिना ठोस प्रमाण के इस तरह के आरोप लगाना समाज में गलत संदेश फैलाता है। वहीं, कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इन ईमेल्स की सत्यता की कोई स्वतंत्र जांच हुई है या नहीं।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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