दिवाली स्पेशल: 36 से 350 बच्चों तक- एकजुट संस्था बेसहारा बच्चों के जीवन में भर रही शिक्षा का उजाला

भोपाल। दीपावली पर हर घर में रोशनी होती है, लेकिन कुछ बचपन ऐसे भी होते हैं, जिनके हिस्से में खुशियों की जगह संघर्ष और अंधेरा आता है। किसी के सिर से माता-पिता का साया उठ जाता है, तो कोई पारिवारिक कलह और हिंसा के बीच बचपन बिताने को मजबूर होता है।
ऐसे ही बच्चों की जिंदगी में शिक्षा का उजाला भरने का काम एकजुट संस्था कर रही है। वर्ष 2000 के आसपास 36 बेसहारा बच्चों के लिए एक घर से शुरू हुई यह पहल अब 350 बच्चों के सपनों को नई दिशा दे रही है। संस्था ने शुरुआत में बच्चों के रहने, भोजन और शिक्षा की व्यवस्था की, ताकि वे मुश्किल परिस्थितियों से निकलकर बेहतर जीवन की ओर बढ़ सकें।
मोबाइल लाइब्रेरी से बस्तियों तक पहुंची पढ़ाई
समय के साथ संस्था ने अपनी पहुंच झुग्गी बस्तियों तक बढ़ाई। वर्ष 2014 में मोबाइल लाइब्रेरी शुरू की गई। इसके लिए एक वैन तैयार की गई, जिसके माध्यम से बस्तियों में जाकर बच्चों को पढ़ाया जाता था। उद्देश्य बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करना और उन्हें स्कूलों से जोड़ना था।
संस्था ने बच्चों के दाखिले कराए और स्कूल की पढ़ाई के साथ गृहकार्य, कौशल विकास तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी मदद की। वर्तमान में छोटे बच्चों के लिए प्री-प्राइमरी स्कूल और बड़ी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए अलग कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। संस्था के संस्थापक डॉ. उमेश दीक्षित के प्रयासों से यह पहल लगातार आगे बढ़ रही है।
किताबों के साथ हुनर को भी मिल रही पहचान
संस्था में बच्चों को पढ़ाई के साथ कला और हस्तशिल्प का प्रशिक्षण दिया जाता है। वे मधुबनी सहित कई पारंपरिक कलाओं पर काम करते हैं। बच्चों की बनाई मधुबनी कला से सजी साड़ियां हजारों रुपए में बिकती हैं। इससे उन्हें अपने हुनर को पहचानने और निखारने का अवसर मिल रहा है।
समाज के सहयोग से संवर रहा बच्चों का भविष्य
मैनिट सहित कई कॉलेजों के विद्यार्थी, डॉक्टर, सेवानिवृत्त अधिकारी और सामाजिक संस्थाएं बच्चों को पढ़ाने तथा मार्गदर्शन देने में सहयोग करती हैं। इन प्रयासों का नतीजा है कि संस्था से जुड़े कई बच्चे आज डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य महत्वपूर्ण पदों तक पहुंच चुके हैं।




















