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Peoples Update Special :DOPT ने रिटायर्ड IAS अंजू बघेल और एमएस भिलाला की दोबारा कराई जांच, रोके गए पेंशन और भुगतान

GAD ने मप्र के दो IAS अफसरों की जांच पुराने मामलों में दोबारा जांच कराई है। प्रारंभिक जांच में दोनों अफसरों को दोषी पाया गया था। दोनों अधिकारियों पेंशन और अन्य भुगतान रोके गए हैं।
DOPT ने रिटायर्ड IAS अंजू बघेल और एमएस भिलाला की दोबारा कराई जांच, रोके गए पेंशन और भुगतान
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    अशोक गौतम, भोपाल। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने कटनी में सरकारी जमीन एक निजी ठेकेदार को आवंटित करने और एससी-एसटी की जमीन अपने बेटे के नाम करने के मामले में तत्कालीन कलेक्टर और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अंजू सिंह बघेल की जांच एक बार फिर से कराई है। वहीं श्योपुर के पूर्व कलेक्टर एमएस भिलाला की पटवारी भर्ती परीक्षा में नंबर देने को लेकर भी फिर से जांच कराई गई है। अंजू सिंह बघेल की जांच पहले आयुक्त सुनील कुमार गुप्ता से कराई गई थी लेकिन संदेह होने पर उसे स्वीकार नहीं किया गया। इसी तरह भिलाला की जांच रिपोर्ट में भी कई तरह की कमियां मिली थीं।

    दस्तावेजों की प्रतियां मंगाई

    जीएडी ने दोनों अफसरों की जांच रिपोर्ट कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) को भेजी है। इसमें दोनों को दोषी माना गया है। हालांकि DOPT ने दोनों अधिकारियों की जांच से जुड़े दस्तावेजों की प्रतियां दोबारा बुलाई है, जिससे कि उनके संबंध में निर्णय लिया जा सके। फिलहाल दोनों अधिकारियों की पेंशन, ग्रेजुएटी सहित अन्य देयक सरकार ने रोक रखी है।

    अंजू सिंह बघेल : आदिवासी की जमीन बेटे के नाम कराई

    अंजू सिंह बघेल ने कटनी कलेक्टर रहते हुए आदिवासी रामदत्त गौंड की जमीन अपने बेटे अभियेन्द्र सिंह के नाम स्थानांतरित कर दी थी। इस मामले में रामदत्त गौंड को राशि का भुगतान भी नहीं किया गया था, जिसकी शिकायत EOW ने सितंबर 2017 में दर्ज कर जांच शुरू की थी। EOW की जांच में पाया कि कटनी जिले की ग्राम जगुआ बरई की 7.6 हेक्टेयर जमीन आदिवासी रामदत्त के नाम थी, जिसे सामान्य जाति के व्यक्ति को बेच दिया गया था। पुत्र से पहले जमीन पवन राव के नाम करने के बाद उसे अपने बेटे के नाम पर करा लिया था। एक दूसरे मामले में बघेल ने एक ठेकेदार को निजी तौर पर फायदा पहुंचाने के लिए उन्हें हाइवे किनारे की बेशकीमती जमीन के बदले किसी सस्ती जमीन से अदला-बदली करने की अनुमति दे दी थी। इस मामले की जांच नए सिरे से जांच संभागायुक्त जबलपुर से कराई गई है।

    एमएस भिलाला : परीक्षा के नंबरों में हेराफेरी

    एमएस भिलाला ने श्योपुर कलेक्टर रहते पटवारियों की भर्ती के दौरान इनके मेरिट लिस्ट के नंबरों में हेराफेरी की थी। इसका मामला लोकायुक्त में दर्ज हुआ था। मामले की जांच की गई तो पता चला कि इस मामले में तत्कालीन प्रशिक्षु एसडीएम कमलेश पुरी भी दोषी हैं। बताया जाता है कि इस मामले की नए सिरे से जांच कमिश्नर ग्वालियर से कराई गई है। जांच में भिलाला को दोषी पाया गया है।

    दोनों अधिकारियों की रिपोर्ट दोबारा डीओपीटी को भेजी जाएगी

    दोनों अधिकारियों की नए सिरे से जांच कराकर रिपोर्ट डीओपीटी को भेजी जाएगी। पहले भी इन दोनो अधिकारियों का मामला भेजा गया था, लेकिन इसमें कुछ रिपार्ट डीओपीटी ने मांगी थी। 

    एम. सेलवेंद्रन, PS GAD (कार्मिक)

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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