Rajya Sabha Election 2026 :मप्र में पछतावा...पर इस प्रदेश में कांग्रेस ने जीत ली चार में से तीन राज्यसभा सीटें

नेशनल डेस्क। राज्यसभा चुनाव 2026 में कर्नाटक से कांग्रेस के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे एक बार फिर निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए हैं। उनके साथ पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा और वरिष्ठ नेता मंसूर अली खान भी संसद के उच्च सदन में पहुंच गए हैं।
पांच प्रत्याशी थे मैदान में, लेकिन चुनाव की नौबत नहीं आई
कर्नाटक की चार राज्यसभा सीटों के लिए शुरुआत में पांच उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। 18 जून को मतदान प्रस्तावित था और विधायकों को विधान सौधा में वोट डालना था। हालांकि, नामांकन पत्रों की जांच के दौरान एक निर्दलीय उम्मीदवार का पर्चा खारिज हो गया। इसके बाद नाम वापसी की अंतिम तिथि समाप्त होने तक केवल चार उम्मीदवार मैदान में बचे रहे। परिणामस्वरूप निर्वाचन अधिकारियों ने सभी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया।
डीके शिवकुमार ने दी शुभकामनाएं
कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने तीनों कांग्रेस नेताओं को बधाई देते हुए कहा कि वे संसद में राज्य की मजबूत आवाज बनेंगे। वहीं, राज्यसभा पहुंचने के बाद पवन खेड़ा ने कांग्रेस नेतृत्व का आभार जताया और कहा कि कर्नाटक के लोगों की सेवा करना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने यह भी वादा किया कि भविष्य में वह कन्नड़ भाषा सीखकर लोगों को उसी भाषा में संबोधित करने की कोशिश करेंगे।
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मंसूर अली बोले- जनता की आवाज संसद तक पहुंचाऊंगा
नवनिर्वाचित सांसद मंसूर अली खान ने पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसे पूरी निष्ठा से निभाएंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कर्नाटक और देश से जुड़े अहम मुद्दों को राज्यसभा में प्रभावी ढंग से उठाएंगे। मंसूर अली खान पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा के पूर्व उपसभापति रहमान खान के पुत्र हैं।
मध्य प्रदेश में भाजपा की निर्विरोध जीत
दूसरी ओर मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा की तीनों सीटों पर कब्जा जमा लिया। भाजपा उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल, तरुण चुघ और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद मुकाबला एकतरफा हो गया। निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि नामांकन पत्र में आवश्यक जानकारी अधूरी थी और एक लंबित कानूनी मामले का उल्लेख भी नहीं किया गया था।
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नटराजन बोलीं-चुनाव आयोग की साठगांठ से यह हुआ
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि मैं तो पहले दिन से कह रही हूं कि चुनाव आयोग की साठगांठ है। और आज ये एक तरह ये भी सिद्ध हो गया कि स्टेट ऑफ एमपी के वकील वहां पर खड़े होते हैं। ये स्टेट ऑफ एमपी का मामला ही नहीं है। ये कोई हम राज्यों के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ रहे थे, हम चुनाव आयोग की बात कर रहे थे। हम अपने रिटर्निंग ऑफिसर की मिलीभगत की बात कर रहे थे। और वो जनता के सामने एक्सपोस हुए हैं।
हमारा केस रिटर्निंग ऑफिसर और ईसीआई के खिलाफ था
ECI के पास जब हमारे लोग गए तो उन्होंने 48 घंटे तक जवाब नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कम से कम हमारी बात सुनी। चुनाव आयोग इस तरह से मिला है कि उन्होंने उस पर कोई जवाब तक नहीं दिया। हमारा मामला रिटर्निंग ऑफिसर और ईसीआई के खिलाफ था। लेकिन आज स्टेट ऑफ एमपी ने अपना भी वकील खड़ा किया। इससे आराम से समझ में आता कि क्या सांठगांठ चल रही है।












