नेशनल हाईवे पर अपने डेस्टिनेशन पर सफर करते समय अक्सर हमें कई बार अपनी गाड़ी का टोल टैक्स कटवाना पड़ता है। जिसके लिए एक निर्धारित राशि पेमेंट करना पड़ता है। हम में से कई लोग इस टोल टैक्स से मिलने वाली रिसिप्ट का सही यूज नहीं जानते हैं। चूंकि हम अपने कार ड्राइव और गाने सुनने के दौरान इतने ज्यादा व्यस्त रहते हैं कि हमारा ध्यान इस पर नहीं जाता है।
सोशल मीडिया पर टोल टैक्स की पर्ची से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है जिसमें पुलिस अधिकारी इसके 3 बड़े फायदे के बारे में बता रहे हैं। जो आपको ऐसी परिस्थितियों में सही फैसलों के बारे में बता रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट में बताया गया कि अगर कोई कार ड्राइवर ऐसी सिचुएशन में फंसता है तो उसे इस दौरान की जाने वाले जरूरी चीजों के बारे में जानकारी दी गई है। यदि आपकी गाड़ी में चालू नहीं हो रही या मैकेनिक देखरेख की जरूरत है तो इसकी जिम्मेदारी टोल प्लाजा की होगी।
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हाईवे में कार में डीजल और पेट्रोल खत्म हो जाता है तो आप रसीद में दिए गए नंबर पर कॉल करके उन्हें अपने स्थान पर पेट्रोल पहुंचाने के लिए बोल सकते हैं। इसके अलावा यदि गाड़ी का खराब रोड, गड्ढों के कारण एक्सीडेंट होता है तो इसका जुर्माना आप टोल कंपनी से वूसल सकते हैं।
नेशनल हाईवे पर सफर करते समय अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या टोल रसीद रखना जरूरी है और क्या इसके बिना इमरजेंसी सेवाएं मिलती हैं। इस पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और इंडियन हाईवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड की ऑफिशियल जानकारी के अनुसार, इमरजेंसी सेवाओं के लिए टोल रसीद अनिवार्य नहीं है।
देशभर में 1033 टोल-फ्री हेल्पलाइन 24×7 सक्रिय रहती है। किसी भी तरह की परेशानी—जैसे वाहन खराब होना, एक्सीडेंट, मेडिकल इमरजेंसी—में इस नंबर पर कॉल करके हाईवे पेट्रोल, एम्बुलेंस या क्रेन सेवा मंगाई जा सकती है। खास बात यह है कि यह सुविधा हर यात्री को मिलती है, चाहे उसने टोल दिया हो या नहीं।
अगर आपकी गाड़ी हाईवे पर खराब हो जाती है, तो हाईवे पेट्रोल वैन या क्रेन आपकी मदद करती है। कई मामलों में यह सेवा फ्री या न्यूनतम शुल्क पर मिल सकती है, लेकिन यह टोल रसीद पर निर्भर नहीं करती।
हालांकि, रसीद रखने का एक फायदा यह जरूर है कि उस पर लोकल टोल प्लाजा का हेल्पलाइन नंबर छपा होता है, जिससे तुरंत संपर्क करना आसान हो जाता है। फिर भी 1033 नंबर से भी पूरी सहायता मिल जाती है।
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सोशल मीडिया पर अक्सर दावा किया जाता है कि टोल प्लाजा 5–10 लीटर पेट्रोल मुफ्त देता है, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। फैक्ट-चेक रिपोर्ट्स जैसे Factly के अनुसार, NHAI के नियमों में ऐसी कोई गारंटी नहीं दी गई है।
कुछ मामलों में हाईवे पेट्रोल इमरजेंसी में मदद कर सकता है, लेकिन फ्यूल का पैसा आपको ही देना होता है और यह सुविधा हर जगह उपलब्ध नहीं होती। इसलिए लंबी यात्रा से पहले टैंक फुल रखना ही बेहतर है।
अगर खराब सड़क (पॉटहोल) के कारण एक्सीडेंट होता है, तो मुआवजे का दावा किया जा सकता है—लेकिन यह ऑटोमैटिक नहीं मिलता। इसमें बॉम्बे हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों में मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि, क्लेम के लिए सिर्फ टोल रसीद काफी नहीं है। FIR, एक्सीडेंट की फोटो, मेडिकल रिपोर्ट, गवाह और सड़क की खराब स्थिति के सबूत जरूरी होते हैं। पूरी प्रक्रिया लंबी और कानूनी हो सकती है।