Money Laundering Case : ED का दावा- जैकलीन फर्नांडिस को थी जानकारी, फिर भी सुकेश से लेती रहीं महंगे गिफ्ट

नई दिल्ली। ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े 200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने जैकलीन को ईडी के जवाब पर प्रत्युत्तर दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 12 मई तक के स्थगित कर दी। ईडी ने अदालत को बताया है कि अभिनेत्री कथित ठग सुकेश के आपराधिक कृत्यों और उसकी पृष्ठभूमि से परिचित थीं।
जानकारी होने के बाद संपर्क बनाए रखा
ईडी के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्यों से यह संकेत मिलता है कि सुकेश चंद्रशेखर की वास्तविक पहचान और आपराधिक इतिहास की जानकारी होने के बावजूद अभिनेत्री ने उससे संपर्क बनाए रखा और कथित तौर पर महंगे उपहार भी स्वीकार किए। यह बयान उस याचिका के जवाब में आया है जिसमें जैकलीन फर्नांडिस ने हाल ही में दिल्ली की अदालत में अनुरोध किया था कि उन्हें इस मामले में सरकारी गवाह बनने की अनुमति दी जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाही रद्द करने से किया था इनकार
जैकलीन के खिलाफ कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया था, जिससे उनके खिलाफ मामला आगे बढ़ा हुआ है। मामले में जेल में बंद आरोपी सुकेश यह दावा करता रहा है कि वह अभिनेत्री का बॉयफ्रेंड था। दोनों की कुछ तस्वीरें भी सामने आई थीं, जिनसे उनके बीच नजदीकी के संकेत मिलने की बात कही गई थी।
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सुकेश ने खुद को कारोबारी बताया था : जैकलीन
वहीं, जैकलीन फर्नांडिस का कहना है कि सुकेश ने उनसे खुद को एक बड़े कारोबारी के रूप में परिचित कराया था और उन्हें उसकी कथित आपराधिक पृष्ठभूमि की जानकारी नहीं थी। 200 करोड़ रुपए के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद आरोपी सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े प्रकरण की जांच ईडी द्वारा की जा रही है। एजेंसी इस मामले में वित्तीय लेन-देन और कथित अवैध धन के स्रोतों की मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है। ईडी ने अदालत में पहले भी यह दलील दी है कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह संकेत मिलता है कि अभिनेत्री सुकेश चंद्रशेखर के आपराधिक नेटवर्क और उसकी गतिविधियों से पूरी तरह अनजान नहीं थीं।
क्या है सुकेश पर आरोप
दिल्ली पुलिस ने सुकेश पर आरोप लगाया था कि उसने रैनबैक्सी के पूर्व प्रवर्तकों शिविंदर सिंह और मालविंदर सिंह की पत्नियों से करीब 200 करोड़ रुपये की कथित ठगी की थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस मामले में सुकेश के साथ उसकी पत्नी लीना मारिया पॉल और अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया था। यह मामला देशभर में फैले कई अन्य धोखाधड़ी और आर्थिक अपराध मामलों से भी जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
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हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल करने का भी आरोप
पुलिस ने इस केस में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) भी लगाया है, जिससे जांच एजेंसियों को संगठित अपराध के एंगल से व्यापक जांच करने का अधिकार मिलता है। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोप है कि चंद्रशेखर और पॉलोज ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर अवैध धन को ठिकाने लगाने के लिए हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किया और इसके जरिए अपराध से अर्जित रकम को अलग-अलग चैनलों में घुमाया। इसके साथ ही यह भी आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क ने धन को छिपाने और वैध दिखाने के लिए कई शेल कंपनियां (मुखौटा कंपनियां) बनाई थीं, जिनका उपयोग संदिग्ध लेन-देन को वैध व्यावसायिक गतिविधियों के रूप में दिखाने के लिए किया गया।












