Bhojshala Dispute Case :हाईकोर्ट में पक्षकारों की बहस पूरी होने के करीब, कल फिर सुनवाई

इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद से जुड़े विभिन्न मामलों पर सोमवार को विस्तृत सुनवाई हुई। मामले में हिंदू पक्ष, मुस्लिम पक्ष, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), केंद्र और राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क रखे। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मामले को 12 मई के लिए सूचीबद्ध किया है।
एडवोकेट विष्णु शंकर जैन, सलमान खुर्शीद ने दी दलीलें
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने सोमवार को कई याचिकाओं और अपीलों पर एक साथ सुनवाई की। इनमें वर्ष 2013 से लंबित याचिका सहित 2022 और 2026 में दायर याचिकाएं और अपीलें शामिल हैं। मामले में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ट्रस्ट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्ष रखा। उनके साथ बड़ी संख्या में अधिवक्ता भी उपस्थित रहे। वहीं मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दलीलें पेश कीं। इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता एके चितले, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन, वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन सहित अन्य पक्षकारों के वकीलों ने भी अदालत में अपने तर्क रखे।
राज्य सरकार और एएसआई ने भी रखा पक्ष
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह सहित अतिरिक्त महाधिवक्ताओं और उप महाधिवक्ताओं की टीम मौजूद रही। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और अन्य अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। कोर्ट में विभिन्न याचिकाओं से जुड़े हस्तक्षेपकर्ताओं और अन्य पक्षकारों की ओर से भी दलीलें पेश की गईं।
मंगलवार को होगी आगे की सुनवाई
खंडपीठ ने सुनवाई के बाद कहा कि मंगलवार 12 मई को शेष पक्षकार अपनी जवाबी दलीलें पूरी करेंगे। कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता एके चितले, एएसआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन, हस्तक्षेपकर्ता पक्ष के अधिवक्ता सैयद अशहर अली वारसी और अधिवक्ता विश्वजीत जोशी को अगली तारीख पर अपनी बहस पूरी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अदालत ने संबंधित पक्षों को लिखित तर्क भी प्रस्तुत करने की अनुमति दी है।
ये भी पढ़ें: Bhojshala Case : हिंदू पक्ष ने कहा- राम मंदिर केस की तरह पेश किए गए दस्तावेजों को अहम माना जाए












