देवास ब्लास्ट: कैसे बना एक मजदूर चंद महीनों में फैक्ट्री मालिक-पूरी खबर पढ़े

इंदौर- देवास के समीप टोंककलां में गुरुवार को हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री विस्फोट ने पांच लोगों की जान ले ली, जबकि 25 से अधिक लोग घायल हो गए। इस दर्दनाक हादसे के बीच फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कई साथियों को मलबे से बाहर निकालकर उनकी जिंदगी बचाई। धमाका इतना भयानक था कि फैक्ट्री परिसर में काम कर रहे श्रमिकों के मोबाइल, कपड़े और बैग तक मलबे में दब गए। ब्लास्ट के बाद चारों तरफ धूल, धुआं और बारूद की गंध फैल गई थी। हालात ऐसे थे कि घायलों को बाहर निकालने वाले मजदूर खुद काले धुएं और राख से ढक गए थे, जिससे उन्हें पहचानना मुश्किल हो रहा था।
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“केमिकल लगे कपड़े उतारे और मलबे में कूद गए”
मजदूर चुन्नीलाल ऋषिदेव ने बताया कि सुबह लंच खत्म होने के कुछ देर बाद ही जोरदार धमाका हुआ। जिस कमरे में ब्लास्ट हुआ वहां 17-18 लोग मौजूद थे। धमाके के तुरंत बाद उन्होंने और उनके साथियों ने अपने केमिकल लगे कपड़े और पेंट उतार दिए, ताकि आग कपड़ों में न फैले। इसके बाद वे नंगे बदन ही मलबे की तरफ दौड़ पड़े।चुन्नीलाल ने बताया कि उनके जीजाजी अमित ईंटों और मलबे के नीचे दब गए थे, जिन्हें बड़ी मुश्किल से बाहर निकाला गया। कई मजदूर खुद घायल होने के बावजूद घायलों को गद्दों पर लादकर एंबुलेंस तक पहुंचाते रहे। एक साथी की वर्दी खून से सनी हुई थी, लेकिन वह लगातार लोगों की जान बचाने में जुटा रहा।
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“आधा घंटा तक सड़क पर मदद मांगते रहे”
फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर नवीन ने बताया कि ब्लास्ट के बाद उसके भाई के कपड़ों में आग लग गई थी। साथियों ने किसी तरह उसे पकड़कर बाहर निकाला, लेकिन इस दौरान वे खुद भी झुलस गए। नवीन के मुताबिक, घायल साथियों को अस्पताल पहुंचाने के लिए वे करीब आधे घंटे तक बाइक लेकर फोरलेन सड़क पर खड़े रहे और गुजरने वाले वाहनों को रोकने की कोशिश करते रहे, लेकिन कोई नहीं रुका। बाद में 112 वाहन की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।
हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस करेंगे जांच
इस हादसे के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। जांच आयोग अधिनियम 1952 के तहत एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया गया है। जांच की जिम्मेदारी सुभाष काकड़े को सौंपी गई है। आयोग को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।
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फैक्ट्री मालिक पर भी उठे सवाल
जानकारी के अनुसार फैक्ट्री के लाइसेंसी अनिल मालवीय का नाम कुछ महीने पहले तक बीपीएल सूची में दर्ज था। बताया जा रहा है कि पहले वह पिता के राशन कार्ड पर गेहूं लेता था, लेकिन बाद में फैक्ट्री संचालन के लिए इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल किया गया। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत चलाए गए डेटा सत्यापन अभियान में 15 नवंबर 2025 को उसका नाम बीपीएल सूची से हटाया गया था। इस जानकारी के सामने आने के बाद फैक्ट्री संचालन और लाइसेंस प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं।
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फैक्ट्री सील, एफएसएल जांच जारी
एफएसएल टीम ने फैक्ट्री परिसर से सैंपल एकत्र किए हैं। जिला प्रशासन ने फैक्ट्री को सील कर दिया है और औद्योगिक, प्रदूषण तथा बिजली विभाग की टीमें अलग-अलग जांच में जुटी हुई हैं। देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में भर्ती 11 घायलों को शुक्रवार को छुट्टी दे दी गई। उन्हें रेडक्रॉस सोसायटी की ओर से 10-10 हजार रुपए की सहायता और घर लौटने के लिए टिकट भी उपलब्ध कराए गए हैं।












