Digital Attendance : प्रोफेसरों और स्टाफ को वेतन चाहिए तो कॉलेज को देने होंगे 6 घंटे

जबलपुर। प्रदेशभर के सरकारी कॉलेजों में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के शुरू होने से पहले उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों की फैकल्टी और गैर शैक्षणिक स्टाफ पर नकेल कसना शुरू कर दिया है। इसके लिए विभाग ने सभी क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालकों व प्राचार्यों को एक बार फिर से चेताया है कि यदि प्रोफेसर, स्टाफ कार्य दिवस में कम से कम 6 घंटे रुकना ही होगा। इस तरह से पोर्टल पर ही अवकाश के समायोजन सहित अन्य बिंदुओं के आधार पर ही वेतन बनेगा।
इसलिए कॉलेजों में हुई सख्ती
प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो सार्थक ऐप के माध्यम से डिजिटल अटेंडेंस की मॉनिटरिंग की जा रही है। आयुक्त उच्च शिक्षा ने नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिए हैं कि यदि किसी कर्मचारी की उपस्थिति सार्थक ऐप पर नियमानुसार नहीं पाई जाती है, तो उनका वेतन तब तक आहरित नहीं किया जाएगा जब तक क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक से विशेष अनुमोदन प्राप्त न हो जाए।
वेतन भुगतान के लिए नई शर्तें
जारी आदेश के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026 की शुरुआत से ही उपस्थिति की मॉनिटरिंग सख्त कर दी गई है। प्राचार्यों और डीडीओ को निर्देशित किया गया है कि वेतन पत्रक तैयार करते समय केवल उन्हीं कर्मचारियों का वेतन बनेगा जिनकी उपस्थिति सार्थक ऐप पर दर्ज होगी। प्रत्येक कार्य दिवस पर कम से कम 6 घंटे की उपस्थिति अनिवार्य है। आकस्मिक या अन्य अवकाशों को ईएचएमआरएस के 'लीव मैनेजमेंट सिस्टम' के माध्यम से ही समायोजित किया जाएगा।
इन पर लागू होंगे नियम
यह नियम महाविद्यालयों के सभी संवर्गों पर लागू होगा, जिनमें प्राध्यापक, सहायक और सह-प्राध्यापक, ग्रंथपाल एवं क्रीड़ा अधिकारी, अतिथि विद्वान, जनभागीदारी कर्मचारी और अन्य गैर-शैक्षणिक स्टाफ शामिल हैं।
डिजिटल हजिरी पर ही वेतन बनेगा

नए शैक्षणिक सत्र के पूर्व उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों के प्रोफेसरों व गैर शैक्षणिक कार्य करने वाले स्टाफ के लिए आदेश जारी किए है। सार्थक ऐप से लगातार मॉनिटरिंग चल रही है। कार्य दिवस पर कम से कम 6 घंटे की उपस्थिति अनिवार्य है। डिजिटल हजिरी पर ही वेतन बनेगा।
पीबी चंदेलकर, क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग जबलपुर संभाग












