MP Government Agriculture : मप्र के सरकारी कृषि फार्म में सामान्य किसानों के खेतों से भी कम हो रही पैदावार  

मप्र के सरकारी कृषि फार्म फसल पैदावार के मामले में सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। आलम यह है कि जिन स्थानों पर ये कृषि फार्म हैं उसके आसपास के किसान प्रति एकड़ कई गुना ज्यादा फसल उपजा रहे हैं। रिकॉर्ड सामने आने पर कृषि विभाग ने अब नया प्लान बनाया है।
Follow on Google News
मप्र के सरकारी कृषि फार्म में सामान्य किसानों के खेतों से भी कम हो रही पैदावार   
AI Image

विजय एस. गौर, भोपाल। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग का चांचेड़ फार्म भोपाल सिंचित है, जिसकी औसतन गेहूं पैदावार 7 से 9 क्विंटल प्रति एकड़ है।  लेकिन पड़ोसी गांव फतेहपुर के किसान रणवीर सिंह के अनुसार वे 20 से 22 क्विंटल प्रति एकड़ गेहूं उपजा रहे हैं। इसी तरह मप्र बीज एवं फार्म विकास निगम बेगमगंज, जिला रायसेन में प्रति एकड़ गेहूं की पैदावार औसतन 15 से 18 एकड़ है। इसके ठीक बगल में किसान अजय जैन की कृषि भूमि है, उनके अनुसार औसतन 24 से 25 क्विंटल गेहूं प्रति एकड़ पैदा होता है। यह हाल है खेती के संसाधनों की भरमार वाले सरकार के फार्मों (कृषि प्रक्षेत्र) के, जिनकी स्थापना किसानों को गेहूं, चना, मसूर आदि के अच्छे बीज मुहैया करवाने के लिए की गई थी। कई फार्मों में तो पड़ोसी किसानों के मुकाबले आधी से भी कम पैदावार हो रही है।

हर महीने वेतन पर 5 से 6 लाख खर्च

एक फार्म में डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर या वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी और करीब आधा दर्जन कर्मचारियों सहित खेतिहर मजदूर होते हैं। इनके वेतन पर मासिक 5 से 6 लाख रुपए के अलावा इक्यूपमेंट, बिजली बिल का खर्च होता है।

ये भी पढ़ें: श्योपुर: कूनो में छोड़ी गईं दो मादा चीते, अब संख्या बढ़कर हुई 16, रेडियो टेलीमेट्री से हो रही निगरानी

समीक्षा के बाद सुधार के लिए सख्ती

सूत्रों के अनुसार कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव और संचालक की समीक्षा में सामने आया कि फार्मों की हालत आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया वाली हो गई है। अफसरों और कर्मचारियों की घोर लापरवाही उजागर हुई। इसके बाद सख्ती करते हुए अब संयुक्त संचालक और उपसंचालक स्तर के अधिकारियों को मॉनिटरिंग करके प्रति सप्ताह रिपोर्ट देने के साथ ही पैदावार बढ़ाने को कहा है। जहां ट्रैक्टर या अन्य संयत्रों की कमी है, वहां कृषि अभियांत्रिकी संस्थानों से ट्रैक्टर मिलेंगे।

प्रदेश में कृषि फार्मों की स्थिति

  • 46 कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के फार्म हैं
  • 37 मप्र बीज एवं फार्म विकास निगम के फार्म हैं 

ये भी पढ़ें: बांधवगढ़ में गिद्धों की गिनती : गरुड़ ऐप से हर टीम की लाइव लोकेशन और डेटा पहुंचेगा कंट्रोल रूम

बीज निर्माण नहीं हो पा रहा

कृषि प्रक्षेत्रों में उपज बेहद कम है, जिससे अपेक्षित बीज निर्माण नहीं हो पा रहा है। इसमें ट्रैक्टर की कमी के साथ ही फार्म अधिकारियों की लापरवाही है। ऐसे में कृषि अभियांत्रिकी संस्थानों से ट्रैक्टर दिलवाए गए हैं। अब सतत मॉनिटरिंग होगी, फार्म स्टाफ की जिम्मेदारी भी तय होगी।

उमाशंकर भार्गव, संचालक, कृषि

सुधार के लिए प्लान बनाया गया है

संचालक कृषि के अधीन प्लान तैयार किया गया है, ताकि कृषि फार्मों की सतत निगरानी के साथ ही अपेक्षित सुधार हो सके। मॉनिटरिंग के साथ ही इक्यूपमेंट के लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था तय करके निर्देश दिए गए हैं।

निशांत वरबड़े, सचिव, कृषि विभाग

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

नई दिल्ली
--°
बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
Source:AccuWeather
icon

Latest Posts