दिल्ली SIR को लेकल सुप्रीम कोर्ट सख्त, SC ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब

नई दिल्ली। याचिका में कहा गया है कि नोटिस पाने वाले मतदाताओं को यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उनके रिकॉर्ड में आखिर किस तरह की गड़बड़ी या विसंगति मिली है। याचिकाकर्ताओं ने नो मैपिंग और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी की श्रेणी तय करने वाले नियम और तकनीकी प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग की है। चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि बूथ लेवल अधिकारी मतदाताओं की पूरी मदद कर रहे हैं और सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। इस बीच आयोग की ओर से 33 लाख से ज्यादा नोटिस पाने वाले मतदाताओं की सूची सार्वजनिक किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
33 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस का मामला
दिल्ली SIR के दौरान करीब 33.13 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड को नो मैपिंग या लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी जैसी श्रेणियों में रखकर नोटिस भेजे गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नोटिस में केवल इन श्रेणियों का उल्लेख होने से मतदाता को यह समझने में परेशानी हो रही है कि उसके रिकॉर्ड में वास्तविक समस्या क्या है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट में मांग की गई है कि नोटिस पाने वाले सभी लोगों के नाम और उन्हें नोटिस भेजने का कारण स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराया जाए।
याचिकाकर्ताओं ने प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि SIR से पहले दिल्ली की मतदाता सूची में करीब 1.45 करोड़ मतदाता थे, जबकि 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट सूची में करीब 47.56 लाख नाम शामिल नहीं थे। इसके बाद ड्राफ्ट सूची में लगभग 97 लाख मतदाता रह गए। याचिका में यह भी कहा गया है कि नोटिस पाने वालों के नाम और उन्हें नोटिस दिए जाने की वजहों को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया है।
लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी का आधार बताने की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि चुनाव आयोग बताए कि किसी मतदाता के रिकॉर्ड को नो मैपिंग या लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी की श्रेणी में रखने का आधार क्या है। साथ ही इन श्रेणियों की पहचान के लिए इस्तेमाल किए गए नियम, तकनीकी प्रक्रिया और संबंधित मानकों की जानकारी भी सार्वजनिक करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि केवल एक सामान्य श्रेणी का उल्लेख करने से मतदाता को अपने रिकॉर्ड से जुड़ी वास्तविक आपत्ति का पता नहीं चलता। इसी वजह से नोटिस प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट बनाने की मांग की गई है।
चुनाव आयोग ने कहा, BLO कर रहे पूरी मदद
मामले में चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील डीएस नायडू ने याचिका का विरोध किया और कहा कि बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO मतदाताओं की सहायता कर रहे हैं। आयोग की ओर से यह भी बताया गया कि सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को अपनी जानकारी और पात्रता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने का मौका दिया जा रहा है। आयोग के मुताबिक ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए लोगों में ऐसे मतदाता भी शामिल हैं, जो सत्यापन के दौरान पुराने पते पर नहीं मिले या दूसरी जगह चले गए थे। मृत मतदाताओं और एक से अधिक जगह नाम दर्ज होने के मामलों को भी अलग श्रेणियों में रखा गया है।
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कई बड़े नाम भी नोटिस पाने वालों में शामिल
SIR के तहत जारी नोटिस की सूची में कई जाने-पहचाने नाम भी सामने आए हैं। इनमें पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व दिल्ली उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई प्रमुख लोगों के नाम बताए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक पूर्व RBI गवर्नर बिमल जालान और पूर्व वायुसेना प्रमुख एनएके ब्राउन समेत कई वरिष्ठ पूर्व अधिकारियों के नाम भी सूची में सामने आए हैं। हालांकि, SIR का नोटिस मिलना अपने आप में मतदाता सूची से नाम हटना नहीं है। संबंधित व्यक्ति को दस्तावेज देकर अपनी जानकारी और पात्रता सत्यापित कराने का अवसर मिलता है।




















