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PU Special :दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे बना हादसों का हॉटस्पॉट, MP में 3 साल में 1500 हादसे; 85 की मौत

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर सफर तेज और आरामदायक है, लेकिन यही सुविधा अब हादसों का कारण भी बन रही है। मध्यप्रदेश में एक्सप्रेस-वे के करीब 245 किलोमीटर हिस्से में पिछले तीन साल में लगभग 1,500 हादसे हुए हैं, जिनमें 85 लोगों की मौत और दो हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे बना हादसों का हॉटस्पॉट, MP में 3 साल में 1500 हादसे; 85 की मौत
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे बना हादसों का हॉटस्पॉट

अशोक गौतम, भोपाल। पूरे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर इसी अवधि में करीब 400 लोगों की जान जा चुकी है। हादसों के प्रमुख कारणों में ओवरस्पीड, गलत लेन में वाहन चलाना और लंबी दूरी में चालक को नींद आना सामने आया है। हादसों को रोकने के लिए एनएचएआई अब चालकों को अलर्ट करने और तेज रफ्तार पर नियंत्रण के लिए नए सिस्टम तैयार कर रहा है।

कैमरों से घर पहुंचेगा चालान

ओवरस्पीडिंग पर कार्रवाई के लिए एनएचएआई पुलिस को एक्सप्रेस-वे पर लगे कैमरों का एक्सेस देने की तैयारी कर रहा है। इसके बाद कैमरों से वाहनों की गति रिकॉर्ड कर ऑनलाइन चालान भेजना संभव होगा। इससे तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई आसान हो सकेगी।

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अलग लेन के बावजूद नियमों की अनदेखी

एक्सप्रेस-वे पर कार, बस और ट्रक के लिए अलग-अलग लेन निर्धारित हैं। कार के लिए 120, बस के लिए 100 और ट्रक के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा है। इसके बावजूद वाहन चालक गलत लेन में पहुंच जाते हैं। तेज रफ्तार में लेन बदलने और गलत तरीके से ओवरटेक करने से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।

लंबी दूरी में नींद बन रही चुनौती

एक्सप्रेस-वे की लंबी और एक जैसी सड़क पर वाहन चलाते समय चालक की सतर्कता बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। हादसों के प्रमुख कारणों में चालक को नींद आना भी सामने आया है। इसी को देखते हुए एनएचएआई ड्राइवर को नींद आने की स्थिति में अलर्ट करने वाले नए सिस्टम तैयार करने पर काम कर रहा है।

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सुरक्षा के इंतजाम, फिर भी हादसे

एनएचएआई ने सुरक्षा के लिए 25 एम्बुलेंस, 27 क्रेन, 27 रूट पेट्रोल वाहन, 901 पीटीजेड, 810 एएनपीआर कैमरे, 160 रडार, 150 स्पीड डिस्प्ले, 262 वीडियो घटना पहचान प्रणाली और 82 परिवर्तनीय संदेश संकेत लगाए हैं। इसके बावजूद हादसों का आंकड़ा चिंता बढ़ा रहा है। अब इन संसाधनों को प्रभावी कार्रवाई और चालक सुरक्षा से जोड़ना बड़ी चुनौती है।

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चालान के साथ जागरूकता पर भी जोर

सड़क हादसों को कम करने के लिए अलग-अलग स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। हाईस्पीड में चालान की व्यवस्था, नींद तोड़ने के लिए उपाय और वाहन चालकों को जागरूक करने और यातायात नियमों की जानकारी देने का काम किया जा रहा है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवेन्द्र चेपेकर ने बताया कि तेज रफ्तार पर नियंत्रण और चालक की सतर्कता बढ़ाने के लिए नए उपायों पर काम किया जा रहा है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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