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इंदौर:डेली कॉलेज विवाद में नया मोड़, सोसायटी का पलटवार, एफआईआर वापस लेने से इनकार

इंदौर के डेली कॉलेज में चल रहा विवाद अब और गहराता नजर आ रहा है। डेली कॉलेज सोसायटी ने प्रेस नोट जारी कर विरोध कर रहे समूह पर गंभीर आरोप लगाए हैं और साफ कर दिया है कि दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली जाएगी।
डेली कॉलेज विवाद में नया मोड़, सोसायटी का पलटवार, एफआईआर वापस लेने से इनकार
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंदौर। सोसायटी ने संदीप पारिख और उनके साथियों पर भ्रामक अभियान चलाने, संस्थान की छवि खराब करने और अवैध तरीके से विरोध करने का आरोप लगाया है। साथ ही संविधान संशोधन को पूरी तरह वैध बताते हुए कहा गया है कि पूरी प्रोसेस नियमों के अनुसार पूरी की गई हैं और कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

    एफआईआर और आरोपों पर सख्त रुख

    सोसायटी ने स्पष्ट किया कि संदीप पारिख और अनुराग जैन के खिलाफ दर्ज एफआईआर गंभीर मामलों से जुड़ी हुई है और इसे वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं उठता। आरोपों में फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर संस्थान की छवि खराब करना, महिला शिक्षकों का आपत्तिजनक चित्रण करना और पदाधिकारियों के परिवारों पर अभद्र टिप्पणियां करना शामिल है। सोसायटी के मुताबिक इन मामलों की गंभीरता को अदालत भी मान चुकी है, क्योंकि अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। सोसायटी का कहना है कि यह कोई सामान्य विवाद नहीं बल्कि संस्थान की गरिमा से जुड़ा मामला है। इसलिए इस पर सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि कानून के तहत हर कदम उठाया जा रहा है और आगे भी प्रक्रिया जारी रहेगी।

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    विरोध प्रदर्शन को बताया गलत 

    सोसायटी ने विरोध प्रदर्शन को अवैध और तथ्यों से परे बताया है और कहा कि केवल 30 से 35 लोग बिना अनुमति के परिसर में इकट्ठा हुए थे। उस समय परिसर में बच्चे भी मौजूद थे, जिससे उनकी सुरक्षा पर सवाल खड़े हुए। सोसायटी का कहना है कि यह समूह पूरे ओल्ड डेलियंस एसोसिएशन का प्रतिनिधित्व नहीं करता बल्कि एक छोटा गुट है। जानकारी के अनुसार 300 से अधिक सदस्यों ने इस विरोध से खुद को अलग कर लिया है और संदीप पारिख के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई है। सोसायटी ने इसे इस बात का संकेत बताया कि विरोध कर रहा समूह व्यापक समर्थन से वंचित है। उनका मानना है कि इस तरह के विरोध से संस्था का माहौल खराब होता है और छात्रों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    संविधान संशोधन को बताया पूरी तरह वैध

    सोसायटी ने बायलॉज में किए गए संशोधनों को पूरी तरह कानूनी बताया है और कहा कि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार पूरी की गई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 15 दिन का अनिवार्य नोटिस पीरियड दिया गया और लीगल टीम की सलाह के अनुसार ही संशोधन किया गया। इन बदलावों के तहत ओडीए के बोर्ड प्रतिनिधित्व को बढ़ाकर 2 से 3 सीटें किया गया है और किसी के अधिकारों में कटौती नहीं हुई है। एजीएम बुलाने और चुनाव कराने का अधिकार बोर्ड के पास ही रहता है। सोसायटी ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने वाले पक्ष को कई बार बातचीत के लिए बुलाया गया लेकिन उन्होंने हर बार इनकार किया। इससे यह संकेत मिलता है कि संवाद की बजाय विवाद को बढ़ाने की कोशिश की गई।

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    राजनीतिक मकसद का आरोप

    सोसायटी ने पूरे विवाद को एक सुनियोजित और भ्रामक अभियान करार दिया है जिसका उद्देश्य संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाना और राजनीतिक लाभ लेना है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि बार-बार बातचीत के अवसर देने के बावजूद उन्हें ठुकराया गया, जिससे यह साफ होता है कि समाधान की बजाय टकराव पैदा करने की मंशा थी। सोसायटी ने दोहराया कि वह छात्रों की सुरक्षा, अनुशासन और संस्थान की गरिमा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या दबाव की राजनीति को स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही सभी पक्षों से जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार करने की अपील की गई है ताकि संस्थान का माहौल सकारात्मक बना रहे।

    Rohit Sharma
    By Rohit Sharma

    पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

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