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उपभोक्ता आयोग का आदेश : दुर्घटनाग्रस्त बाइक की मरम्मत के लिए देनी होगी जुर्माने सहित क्लेम की राशि

जिला उपभोक्ता आयोग ने दुर्घटनाग्रस्त बाइक की मरम्मत संबंधी क्लेम के मामले में उपभोक्ता को राहत दिलाई है। मामले में दुर्घटना के वक्त बाइक उपभोक्ता का दोस्त चला रहा था। बीमा कंपनी बजाज एलायंज जनरल इंश्योरेंस ने कहा कि जमा किया गया लाइसेंस उपभोक्ता का नहीं बल्कि उनके दोस्त का है, इस तर्क को आयोग ने नहीं माना।
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दुर्घटनाग्रस्त बाइक की मरम्मत के लिए देनी होगी जुर्माने सहित क्लेम की राशि

भोपाल। जिला उपभोक्ता आयोग ने दुर्घटना बाइक की मरम्मत मामले में उपभोक्ता को क्लेम देने का आदेश दिया है। बीमा कंपनी बजाज एलायंज जनरल इंश्योरेंस ने कहा कि जमा किया गया लाइसेंस उपभोक्ता का नहीं बल्कि उनके दोस्त का है। साथ ही उपभोक्ता अस्पताल में भी भर्ती नहीं हुआ, इससे अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि वास्तव में एक्सीडेंट हुआ था या नहीं। मामले में आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कंपनी को 15 हजार रुपए जुर्माने और मरम्मत के लिए 32 हजार रुपए सहित करीब 45 हजार रुपए की राशि एक माह में देने के आदेश दिए हैं।

यह है मामला

यह दुर्घटना बीते साल जून माह में हुई थी। करोद निवासी परिवादी चंदन वर्मा अपने दोस्त के साथ अपनी बाइक से जा रहे थे, उसी वक्त तेज रफ्तार से आ रही गाड़ी ने उन्हें टक्कर मार दी। इसमें दोनों दोस्तों को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन बाइक को नुकसान हुआ। दुर्घटना के बाद, मोटरसाइकिल को अधिकृत सर्विस सेंटर में दिखाया गया और बीमा कंपनी को सूचित किया गया। सर्वेयर ने वाहन का सर्वे किया और मरम्मत का अनुमान (एस्टीमेट) मांगा। अनुमान जमा करने के बाद, बीमा कंपनी ने उपभोक्ता के क्लेम को रद्द कर दिया। कई बार बात करने के बाद भी जब बीमा कंपनी अड़ी रही तो उपभोक्ता ने आयोग में केस लगाया।

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कंपनी ने दिया कारण 

बीमा कंपनी ने आयोग को बताया कि परिवादी के पास ड्राइविंग लाइसेंस, घटना के फोटोग्राफ आदि नहीं हैं। वहीं, यदि उसे चोट आई थी तो उसने घर में इलाज कराया और अस्पताल में एडमिट नहीं हुआ, इसलिए यह कहना मुश्किल है कि दुर्घटना कितनी गंभीर थी। इसके जवाब में उपभोक्ता की ओर से तर्क दिया गया कि यह मेडिक्लेम नहीं बल्कि बाइक की मरम्मत के संबंधी क्लेम है इसलिए उपभोक्ता का अस्पताल में भर्ती होना आवश्यक नहीं माना जा सकता। वहीं, दुर्घटना के समय घायल व्यक्ति का ध्यान तत्काल इलाज पर होता है, न कि फोटोग्राफी पर। 

अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं थी

चोट इतनी गंभीर नहीं थीं कि अस्पताल जाना पड़े, इसलिए घर पर ही इलाज किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि घटना के समय मोटरसाइकिल उनका मित्र चला रहा था, जिसका ड्राइविंग लाइसेंस संलग्न किया गया था। आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद वादी के पक्ष में निर्णय सुनाया। आयोग ने अपने आदेश में लिखा कि जुर्माने सहित क्लेम की राशि समय पर न देने पर अतिरिक्त 9 फीसद ब्याज की दर से भुगतान करना होगा। 

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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