CWC की बैठक कल; छात्रों और राम मंदिर मामले पर सरकार को घेरने की बनेगी रणनीति, पांच राज्यों के चुनावों को लेकर भी हो सकता है चिंतन

नई दिल्ली। कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक बुधवार को इंदिरा भवन में होगी। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे करेंगे। इसमें देश के मौजूदा राजनीतिक हालात समेत विभिन्न मुद्दों पर पार्टी की आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल समेत कई वरिष्ठ नेता बैठक में शामिल होंगे।
छात्रों के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी
बैठक में छात्रों से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरने की कांग्रेस की रणनीति पर चर्चा हो सकती है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, छात्रों के मुद्दों के साथ राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोप को भी बैठक के एजेंडे में शामिल किया गया है। कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साध सकती है।
पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों पर भी चर्चा
अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों की भी बैठक में समीक्षा होने की संभावना है। पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। कांग्रेस इन राज्यों में संगठन की स्थिति, चुनावी तैयारियों और पार्टी की रणनीति पर चर्चा कर सकती है।
ये भी पढ़ें: राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025 का ऐलान, 17 खिलाड़ियों को अर्जुन अवॉर्ड; खेल रत्न के लिए इस बार कोई नाम नहीं
महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा भी अहम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विपक्षी दलों से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने के वास्ते परिसीमन से जुड़े विधेयक का समर्थन करने की अपील पर भी CWC में चर्चा हो सकती है। सरकार निकट भविष्य में इससे संबंधित संविधान संशोधन विधेयक फिर ला सकती है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर 19 अगस्त की बैठक में चर्चा की बात कही थी।
परिसीमन पर कांग्रेस ने पहले भी उठाए सवाल
कांग्रेस ने अप्रैल में हुई CWC की पिछली बैठक के बाद महिला आरक्षण कानून को लेकर मोदी सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया था। पार्टी ने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को संवैधानिक नहीं बताते हुए इसके गंभीर परिणाम होने की बात कही थी। अब माना जा रहा है कि बुधवार की बैठक में कांग्रेस इस मुद्दे पर अपनी रणनीति और आगे की राजनीतिक दिशा तय करेगी।
ये भी पढ़ें: बहनों के लिए खुशखबरी-मप्र में पांच साल तक जारी रहेगी लाड़ली बहना योजना












