🌤️
--Bhopal, India

PlayBreaking News

चीन के टैरिफ से बचने में मदद कर रहा भारत? अमेरिका ने लगाए गंभीर आरोप

अमेरिका ने भारत समेत 40 से ज्यादा देशों पर चीन को अमेरिकी टैरिफ से बचाने वाले ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क में मदद का आरोप लगाया है। पीटर नवारो की रिपोर्ट में भारत का भी जिक्र है। अमेरिका अब AI आधारित 'डिटेक्टिव बॉर्डर' सिस्टम से संदिग्ध खेपों की निगरानी करेगा और गलत मूल देश बताने वाले आयात पर कार्रवाई करेगा।
Follow on Google News
चीन के टैरिफ से बचने में मदद कर रहा भारत? अमेरिका ने लगाए गंभीर आरोप

अमेरिका ने टैरिफ को लेकर भारत पर फिर निशाना साध रहा है। अमेरिका ने भारत पर हैरान करने वाला एक आरोप लगाया है। उसका कहना है कि भारत 'गुप्त माल ढुलाई नेटवर्क' का हिस्‍सा है और चीन को अमेरिका के भारी टैरिफ से बचने में मदद करता है। यह आरोप भारत समेत 40 से ज्यादा देशों पर लगाए हैं। अमेरिका का कहना है कि चीन अपने सामान को सीधे अमेरिका भेजने के बजाय दूसरे देशों के रास्ते वहां पहुंचा रहा है, ताकि उस पर लगाए गए भारी टैरिफ से बचा जा सके। इस व्यवस्था में भारत समेत कई बड़े व्यापारिक साझेदार देशों का नाम सामने आया है। हालांकि, अमेरिकी रिपोर्ट का आरोप इन देशों की सरकारों पर सीधे तौर पर चीन के साथ मिलीभगत का नहीं, बल्कि ऐसे ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क को रोकने में नाकामी या उसे सक्षम बनाने से जुड़ा है।

'द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम' में भारत का भी जिक्र

व्हाइट हाउस के व्यापार और विनिर्माण सलाहकार पीटर नवारो की रिपोर्ट 'द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम' में चीन पर 40 से ज्यादा देशों के जरिए अपने निर्यात को अमेरिकी टैरिफ से बचाने का आरोप लगाया गया है। नवारो के मुताबिक, चीन ने 2018 में अमेरिकी टैरिफ लगाए जाने के बाद अपने सामान को दूसरे देशों के रास्ते अमेरिकी बाजार तक पहुंचाने का तरीका ज्यादा इस्तेमाल करना शुरू किया। नवारो ने कहा कि इस नेटवर्क में मैक्सिको, कनाडा, यूरोपीय संघ, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे अमेरिका के बड़े व्यापारिक साझेदार शामिल हैं। रिपोर्ट में आरोप है कि चीन इन देशों का इस्तेमाल सामान की सीमित प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, री-लेबलिंग, री-इनवॉइसिंग या रूट बदलने के लिए करता है। इसके बाद सामान को ऐसे देश का उत्पाद दिखाकर अमेरिकी बाजार में भेजा जाता है, जहां चीन की तुलना में कम टैरिफ लागू हो सकता है।

अमेरिका को हर साल अरबों डॉलर के राजस्व का नुकसान

अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह के ट्रांसशिपमेंट से हर साल करीब 34.2 अरब डॉलर से 303 अरब डॉलर तक के सामान का कारोबार हो सकता है। रिपोर्ट ने लगभग 75 अरब डॉलर को केंद्रीय अनुमान मानकर गणना की है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस वजह से उसे हर साल करीब 19 अरब से 26 अरब डॉलर के टैरिफ राजस्व का नुकसान हो सकता है। नवारो ने इस व्यवस्था को चीन की ओर से अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था में सेंध लगाने का तरीका बताया। उनका कहना है कि चीन पर सीधे लगाए गए शुल्क का असर कम करने के लिए तीसरे देशों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ अमेरिका के राजस्व का मामला नहीं है, बल्कि इससे अमेरिकी कंपनियों और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग पर भी दबाव पड़ता है।

Breaking News

भारत को लेकर क्या कहा गया?

रिपोर्ट में भारत के पुणे-गुजरात-चेन्नई औद्योगिक क्षेत्र का भी उल्लेख किया गया है। नवारो ने पंप और कंप्रेसर जैसे उत्पादों का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि अगर भारत में बिकने वाला कोई उत्पाद चीन से आता है और बाद में उसकी सप्लाई चेन बदलकर उसे दूसरे देश के उत्पाद के तौर पर पेश किया जाता है, तो अमेरिकी कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा का माहौल प्रभावित होता है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टिंग में अमेरिका ने भारत पर किसी विशेष भारतीय कंपनी या सरकारी एजेंसी के खिलाफ अलग से कार्रवाई की घोषणा नहीं की है। आरोप मुख्य रूप से उस व्यापक नेटवर्क को लेकर है, जिसके जरिए चीन के उत्पादों को तीसरे देशों के माध्यम से अमेरिकी बाजार तक पहुंचाने की बात कही गई है।

AI से होगी संदिग्ध खेपों की निगरानी

अमेरिका अब ऐसे मामलों की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने की तैयारी में है। नवारो ने इसे 'डिटेक्टिव बॉर्डर' नाम दिया है। इस सिस्टम के जरिए अमेरिकी कस्टम अधिकारी शिपमेंट डेटा, सामान की रूटिंग हिस्ट्री, उत्पाद की जानकारी, उत्पादन क्षमता और दूसरे व्यापारिक रिकॉर्ड का विश्लेषण कर सकेंगे। नवारो के मुताबिक, अगर किसी आयातक ने सामान के वास्तविक मूल देश की गलत जानकारी दी, तो अमेरिका उस पर बाद में भी टैरिफ लगा सकता है। अमेरिकी प्रशासन ने कहा है कि इस तकनीक का उद्देश्य उन सामानों की पहचान करना है, जो कागजों पर किसी तीसरे देश के उत्पाद दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तव में चीन से जुड़े होते हैं।

अपनों से बिछड़े, घर छूटा फिर भी नहीं टूटा हौसला! बंटवारे का दर्द याद कर भावुक हुए PM मोदी, बोले- उजड़कर भी लोगों ने फिर बनाई जिंदगी

2018 के बाद बढ़ा ट्रांसशिपमेंट का इस्तेमाल

अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने 2018 के बाद इस रणनीति का ज्यादा इस्तेमाल किया। उस समय तत्कालीन ट्रंप प्रशासन ने चीन की व्यापार नीतियों को लेकर धारा 301 के तहत टैरिफ लगाए थे। इसके बाद चीन से सीधे अमेरिका जाने वाले सामान पर बढ़े शुल्क से बचने के लिए तीसरे देशों के जरिए निर्यात करने का चलन बढ़ने का दावा किया गया है। अब ट्रंप प्रशासन इस व्यवस्था पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है। नवारो ने संकेत दिया है कि भविष्य में अमेरिका दूसरे देशों के साथ होने वाले व्यापार समझौतों में भी ऐसे ट्रांसशिपमेंट को रोकने और इसमें शामिल देशों पर कार्रवाई का प्रावधान शामिल कर सकता है।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

icon

Latest Posts