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China US Trade :अमेरिका को चीन का जवाब, कंपनियों से कहा- अमेरिकी प्रतिबंध न मानें

पिछले महीने अमेरिकी ट्रेजरी के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल  (OFAC) ने वैश्विक वित्तीय संस्थानों को चेतावनी दी थी कि चीन की छोटी स्वतंत्र रिफाइनरियों, जिन्हें टीपॉट रिफाइनरी कहा जाता है, से जुड़े लेन-देन जोखिम भरे हो सकते हैं
अमेरिका को चीन का जवाब, कंपनियों से कहा- अमेरिकी प्रतिबंध न मानें

वॉशिंगटीन डीसी/बीजिंग। अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक टकराव बढ़ गया है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाते हुए अपनी घरेलू कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन न करने का निर्देश दिया है। यह फैसला खासतौर पर उन चीनी पेट्रोकेमिकल कंपनियों को राहत देने के लिए लिया गया है, जिन पर संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के तेल कारोबार से जुड़े होने का आरोप लगाया है।

ब्लॉकिंग स्टैच्यूट का पहली बार इस्तेमाल

चीन ने पहली बार अपने ब्लॉकिंग स्टैच्यूट का उपयोग किया है। यह एक कानूनी तंत्र है, जिसका मकसद विदेशी कानूनों के प्रभाव को देश के भीतर निष्प्रभावी करना है। इस कदम को सिर्फ कूटनीतिक विरोध नहीं, बल्कि कानूनी जवाबी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में ईरान से जंग के बीच चीन ने अमेरिका का ध्यान दूसरी ओर भटका दिया है।

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किन कंपनियों को मिला संरक्षण

चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ के अनुसार, इस आदेश के तहत पांच प्रमुख कंपनियों को सुरक्षा दी गई है:

  • हेंगली पेट्रोकेमिकल (डालियान) रिफाइनिंग कंपनी लिमिटेड
  • शेडोंग शौगुआंग लुकिंग पेट्रोकेमिकल कंपनी लिमिटेड
  • शेडोंग जिनचेंग पेट्रोकेमिकल ग्रुप कंपनी लिमिटेड
  • हेबेई शिनहाई केमिकल ग्रुप कंपनी लिमिटेड
  • शेडोंग शेंगशिंग केमिकल कंपनी लिमिटेड

अमेरिका ने इन कंपनियों को अपनी स्पेशली डिज़िग्नेटेड नेशनल्स (SDN) सूची में शामिल किया है, जिसके तहत उनकी संपत्तियां फ्रीज की जा सकती हैं और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन पर रोक लगाई जा सकती है।

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अमेरिका के कदम पर चीन की प्रतिक्रिया

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिकी प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की है। प्रवक्ता के अनुसार:

अमेरिका 2025 से लगातार कार्यकारी आदेशों के जरिए चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगा रहा है, इन आरोपों में कहा गया है कि कंपनियां ईरान के तेल कारोबार में शामिल हैं। इससे चीन और अन्य देशों के बीच सामान्य व्यापार बाधित हो रहा है। चीन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक व्यापार नियमों का उल्लंघन बताया।

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‘टीपॉट’ रिफाइनरियों पर अमेरिकी नजर

पिछले महीने अमेरिकी ट्रेजरी के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल  (OFAC) ने वैश्विक वित्तीय संस्थानों को चेतावनी दी थी कि चीन की छोटी स्वतंत्र रिफाइनरियों, जिन्हें टीपॉट रिफाइनरी कहा जाता है, से जुड़े लेन-देन जोखिम भरे हो सकते हैं। खासतौर पर शेडोंग प्रांत की ये रिफाइनरियां 2026 तक ईरानी कच्चे तेल के आयात में अहम भूमिका निभा रही हैं।

हेंगली पर पहले भी कार्रवाई

अमेरिका पहले ही हेंगली पेट्रोकेमिकल पर प्रतिबंध लगा चुका है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह कंपनी ईरान से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल खरीदती रही है और वहां की तेल अर्थव्यवस्था को मजबूती देती है।

चीन का साफ संदेश

  • वह एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता है।
  • ऐसे प्रतिबंध जिनको संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी नहीं है, उन्हें मान्यता नहीं देगा।
  • यह कदम राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है।
Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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