ट्रंप का सख्त रुख!पाकिस्तान के जरिए आया प्रस्ताव किया रिजेक्ट, ईरान को दी सीधी चेतावनी

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। ईरान की तरफ से भेजे गए नए प्रस्ताव को उन्होंने साफ तौर पर खारिज कर दिया है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया गया था, लेकिन इसकी शर्तों ने ट्रंप को नाराज कर दिया।
प्रस्ताव से नाखुश ट्रंप, जताई नाराजगी
ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान का प्रस्ताव पढ़कर उन्हें कोई संतुष्टि नहीं मिली। उनके मुताबिक, ईरान समझौता तो करना चाहता है, लेकिन उसकी शर्तें अमेरिका के लिए स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बातचीत लंबी खींच रही है और इसमें स्पष्टता की कमी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं।
ईरान का नेतृत्व बिखरा हुआ- ट्रंप का आरोप
ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ईरान में यह स्पष्ट नहीं है कि असल में निर्णय कौन ले रहा है। उनके मुताबिक, वहां नेतृत्व बिखरा हुआ है और अलग-अलग समूह अपनी-अपनी दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान समझौता करना तो चाहता है, लेकिन अंदरूनी उलझनों के कारण वह एक ठोस प्रस्ताव नहीं दे पा रहा है। यही वजह है कि बातचीत बार-बार अटक रही है।
परमाणु समझौते पर फिर फंसा पेंच
अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा मुद्दा परमाणु समझौता ही है। ईरान चाहता है कि पहले अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर लगी पाबंदियां हटाए, उसके बाद ही वह परमाणु समझौते पर आगे बढ़ेगा। वहीं, ट्रंप का रुख बिल्कुल उल्टा है। उनका कहना है कि पहले ईरान को परमाणु समझौते पर सहमत होना होगा, तभी अमेरिका आगे विचार करेगा।
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पाकिस्तान बना माध्यम, नहीं निकला हल
इस पूरे मामले में पाकिस्तान एक अहम कड़ी के रूप में सामने आया है। ईरान ने अपना प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया। हालांकि, यह कोशिश भी फिलहाल सफल नहीं हो सकी। जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान ने ईरान का प्रस्ताव अमेरिका को भेजा, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इसे तुरंत खारिज कर दिया।
ईरान की कोशिशें तेज
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय हैं। वे कई देशों के विदेश मंत्रियों से बातचीत कर चुके हैं, जिनमें तुर्की, मिस्र, कतर, सऊदी अरब, इराक और अजरबैजान शामिल हैं। इन बैठकों में उन्होंने युद्ध को टालने और तनाव कम करने के प्रयासों की जानकारी दी। इसके अलावा यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास से भी उनकी बातचीत हुई, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के मुद्दे पर चर्चा हुई।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। यहां का असर सीधे वैश्विक तेल बाजार पर पड़ता है। ईरान ने प्रस्ताव में इस स्ट्रेट को खोलने की शर्त रखी है, ताकि तेल की सप्लाई सामान्य हो सके। हालांकि, अमेरिका इस मुद्दे को परमाणु समझौते से जोड़कर देख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी जरूर आई है, लेकिन कीमतें अब भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।
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क्या आगे बढ़ेगा टकराव?
ट्रंप के ताजा बयान से यह साफ हो गया है कि अमेरिका फिलहाल नरम रुख अपनाने के मूड में नहीं है। वहीं, ईरान भी अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है। ऐसे में सवाल यही है कि क्या दोनों देश बीच का रास्ता निकाल पाएंगे या फिर यह तनाव और गहराएगा?











