वन्य प्राणियों ने फसलें तबाह कीं, किसानों का सौंसर वन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन

छिंदवाड़ा के सौंसर क्षेत्र के ग्राम जाम में वन्य प्राणियों के झुंड ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। फसल बर्बाद होने से नाराज किसानों ने सौंसर वन परिक्षेत्र कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। किसान अपनी समस्या लेकर वन विभाग के अधिकारियों से मिलने पहुंचे थे, लेकिन कार्यालय में रेंजर मौजूद नहीं मिले। इसके बाद किसानों ने कार्यालय के बाबू को ज्ञापन सौंपकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि वन्य प्राणियों से फसलों को हो रहे नुकसान पर तत्काल रोक लगाई जाए और जिन किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं, उन्हें जल्द से जल्द क्षतिपूर्ति मुआवजा दिया जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में किसान कपीश जौंजाल, सौरभ आखरे, ज्ञानेश्वर बंसोड, पृथ्वीराज बंसोड, विजय सहस्त्रबुद्ध और संजय भोयर सहित अन्य किसान शामिल रहे।
अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर भी किसानों में नाराजगी
किसानों ने सौंसर उपवन मंडल में अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि अधिकारियों के मुख्यालय पर नियमित रूप से मौजूद नहीं रहने के कारण आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों के मुताबिक अंबाड़ा रेंज के रेंजर के पास दोहरा प्रभार है, जिसके चलते वे सौंसर मुख्यालय में नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहते। वहीं सौंसर रेंजर के पास भी अतिरिक्त जिम्मेदारी होने की बात कही गई है।
फाइलों पर हस्ताक्षर के लिए कर्मचारियों को लगानी पड़ती है दौड़
किसानों का कहना है कि सौंसर उपवन मंडल के अधिकारियों की अनुपस्थिति का असर विभागीय कामकाज पर भी पड़ रहा है। उनका आरोप है कि कर्मचारियों को फाइलों पर अधिकारियों के हस्ताक्षर कराने के लिए पांढुर्ना और छिंदवाड़ा तक जाना पड़ता है। इसके कारण आम लोगों से जुड़े कई जरूरी काम लंबे समय तक अटके रहते हैं। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि उपवन मंडल अधिकारी के छिंदवाड़ा से आने-जाने के कारण सौंसर मुख्यालय में उनकी नियमित मौजूदगी नहीं रहती।
पहले नियमित रूप से होता था कामकाज
ग्रामीणों के अनुसार, पहले पदस्थ उपवन मंडल अधिकारी और रेंजर मुख्यालय में नियमित रूप से मौजूद रहते थे। इससे ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान भी समय पर हो जाता था। किसानों का कहना है कि नई पदस्थापनाओं के बाद अधिकारियों की कथित अनुपस्थिति से कामकाज प्रभावित हुआ है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि वन्य प्राणियों से फसलों को हो रहे नुकसान को रोकने और मुआवजा देने की प्रक्रिया जल्द शुरू नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।




















