CG NEWS:बस्तर में बदली तस्वीर: गोलियों की गूंज थमी, अब स्कूलों में बज रही शिक्षा की घंटी

जहां कभी गोलियों और धमाकों की गूंज थी, वहां अब बच्चों की किलकारियां और पढ़ाई की आवाज सुनाई दे रही है। 21 साल बाद गांवों में खुले स्कूल उम्मीद की नई इबारत लिख रहे हैं। छत्तीसगढ़ का नया शिक्षा सत्र इस बार केवल कैलेंडर का बदलाव नहीं बल्कि इतिहास बदलने वाला अध्याय बनकर सामने आया है। लंबे समय तक नक्सल हिंसा की चपेट में रहे क्षेत्रों में अब बच्चों के हाथों में किताबें लौट रही हैं।
बस्तर में बदली तस्वीर: गोलियों की गूंज थमी, अब स्कूलों में बज रही शिक्षा की घंटी

PREM KUMAR, RAIPUR। नक्सल हिंसा से दशकों तक जूझते रहे छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग और आसपास के इलाकों में अब बदलाव साफ दिखाई देने लगा है। जिन गांवों में कभी गोलियों की आवाज आम थी, वहां अब स्कूलों की घंटियां बज रही हैं। वर्षों बाद खुले स्कूल केवल शिक्षा संस्थान नहीं, बल्कि शांति, विश्वास और विकास की नई शुरुआत का प्रतीक बन गए हैं।

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गोलियों की गूंज से शिक्षा की घंटी तक

छत्तीसगढ़ का नया शिक्षा सत्र इस बार केवल कैलेंडर का बदलाव नहीं बल्कि इतिहास बदलने वाला अध्याय बनकर सामने आया है। लंबे समय तक नक्सल हिंसा की चपेट में रहे क्षेत्रों में अब बच्चों के हाथों में किताबें लौट रही हैं। यह बदलाव केवल स्कूल खुलने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे समाज में सामान्य जीवन की वापसी का संकेत भी है।

शिक्षा पर सबसे बड़ा असर

नक्सल हिंसा के दौर में सबसे अधिक नुकसान शिक्षा व्यवस्था को उठाना पड़ा। अनेक स्कूल भवनों को नक्सलियों ने निशाना बनाया, कई भवन सुरक्षा बलों के अस्थायी कैंप में बदल दिए गए और हजारों बच्चे नियमित पढ़ाई से वंचित हो गए। शासन ने पोटा कैबिन जैसी वैकल्पिक व्यवस्था बनाकर शिक्षा जारी रखने की कोशिश की, लेकिन गांवों में सामान्य शैक्षणिक माहौल बनाना संभव नहीं हो सका।

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नक्सल मुक्त माहौल के बाद बदली तस्वीर

31 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ सहित देश को नक्सल हिंसा मुक्त घोषित किए जाने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिली। सुरक्षा बलों के कैंप धीरे-धीरे हटाए जाने लगे और खाली हुए भवनों को फिर से शिक्षा विभाग को सौंपा गया। वर्षों बाद स्कूलों में बच्चों की चहल-पहल लौटने लगी है।

तुमड़ीबोड़ बना बदलाव की मिसाल

मोहला-मानपुर जिले के तुमड़ीबोड़ में वर्षों तक आईटीबीपी का बेस कैंप रहे भवन को शिक्षा विभाग को सौंप दिया गया। अब उसी भवन में शासकीय हाईस्कूल संचालित हो रहा है। जो स्थान कभी सुरक्षा रणनीति का केंद्र था, वह आज शिक्षा और भविष्य निर्माण का केंद्र बन चुका है।

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21 साल बाद गांवों में लौटी पढ़ाई

बीजापुर जिले के पीडिया क्षेत्र के 11 गांवों में लगभग 21 वर्ष बाद स्कूल दोबारा शुरू हुए हैं। करीब 539 बच्चों को पहली बार अपने ही गांव में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला है। इससे न केवल बच्चों का भविष्य सुरक्षित होगा बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई दिशा मिलेगी। अब जिम्मेदारी व्यवस्था मजबूत करने की स्कूल खुल जाना बड़ी उपलब्धि जरूर है, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पर्याप्त शिक्षक, बेहतर भवन, पुस्तकालय, डिजिटल संसाधन और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की है। यदि शासन-प्रशासन इन व्यवस्थाओं को मजबूत करता है तो यही बच्चे आने वाले समय में बस्तर के विकास की नई पहचान बनेंगे।

PREM

मै प्रेम निर्मलकर मैने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की, विगत 18 वर्षों से मुझे पत...Read More

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