PU Special :अमृत 2.0 अधूरा: सीवेज लाइन के लिए सड़कें खोदीं, पाइप डाले लेकिन मरम्मत करना भूले; अब कंपनियों पर होगी कार्रवाई

अशोक गौतम, भोपाल। शहरों में सीवेज और पेयजल नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए शुरू की गई अमृत 2.0 योजना कई जगह लोगों के लिए राहत के बजाय परेशानी का कारण बनती नजर आ रही है। सीवेज लाइन बिछाने के लिए सड़कें खोदी गईं, पाइप लाइन डाल दी गई, लेकिन कई जगह सड़क का रेस्टोरेशन नहीं किया गया। बारिश के मौसम में यही खोदी गई सड़कें अब कीचड़ और गड्ढों में बदल गई हैं जिससे लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। नर्मदा नगर भोपाल के रहने वाले प्रेमलाल पटेल बताते हैं कि करीब एक महीने पहले उनके घर के सामने सीवेज लाइन डालने के लिए सड़क खोदी गई थी। लाइन तो बिछा दी गई, लेकिन सड़क की मरम्मत अब तक नहीं हुई। बारिश में यहां से निकलना मुश्किल हो गया है। यह परेशानी सिर्फ नर्मदा नगर तक सीमित नहीं है। करोंद, कोलार, अरेरा-गायत्री विकास और होशंगाबाद रोड के एप्रोच रोड समेत कई इलाकों में भी सीवेज नेटवर्क के लिए सड़कें खोदी गई हैं। कई स्थानों पर लाइन डालने के बाद सड़कें पहले जैसी नहीं की गईं। ऐसे में सीवेज की समस्या दूर करने के लिए शुरू हुआ काम लोगों के सामने नई आवाजाही की समस्या खड़ी कर रहा है।
डेढ़-दो साल पुराने प्रोजेक्ट, काम की रफ्तार बेहद धीमी
अमृत 2.0 के तहत खंडवा, बुरहानपुर और देवास में शुरू की गई परियोजनाओं की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। इन परियोजनाओं को शुरू हुए करीब डेढ़ से दो साल हो चुके हैं, लेकिन काम की प्रगति बेहद धीमी है। खंडवा में करीब 23.96 फीसदी, बुरहानपुर में सिर्फ 4 फीसदी और देवास में 6 फीसदी काम ही पूरा हुआ है। इन तीनों परियोजनाओं का काम दिनेशचंद्र आर. अग्रवाल इंफ्राकॉन को दिया गया है। वहीं सतना की परियोजना में करीब 52 फीसदी काम पूरा होने की जानकारी है।
भोपाल के 4 पैकेज में भी काम की रफ्तार सुस्त
भोपाल में अमृत 2.0 के तहत सीवेज से जुड़े चार पैकेज की कुल लागत 1,113 करोड़ रुपए से ज्यादा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इनमें भी काम की रफ्तार एक जैसी नहीं है। पैकेज-1 की लागत 158.34 करोड़ रुपए है और इसमें करीब 19 फीसदी काम हुआ है। पैकेज-2 की लागत 472.32 करोड़ रुपए है और इसमें 35.01 फीसदी काम पूरा हुआ है। सबसे धीमी स्थिति पैकेज-3 की है। इसकी लागत 189.60 करोड़ रुपए है, लेकिन अब तक सिर्फ 6.2 फीसदी काम पूरा हुआ है। पैकेज-4 की लागत 293.21 करोड़ रुपए है और इसमें करीब 17.02 फीसदी काम हुआ है। यानी भोपाल के चार पैकेज में से दो में काम 20 फीसदी से भी कम हुआ है।
8 महीने पहले चेतावनी, फिर भी नहीं सुधरी स्थिति
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने करीब आठ महीने पहले धीमी गति से चल रही परियोजनाओं की समीक्षा की थी। संबंधित कंपनियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। लगातार धीमी रफ्तार और काम में लापरवाही को देखते हुए अब विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू की है। आयुक्त संकेत भोंडवे ने पांच कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया है।
इन 5 कंपनियों पर हुई कार्रवाई
ब्लैकलिस्ट की गई कंपनियों में भोपाल की अमृत 2.0 परियोजनाओं से जुड़ी जयवरूदी इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड और एलसी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, देवास की दिनेशचंद्र आर. अग्रवाल इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड, सतना की इनविराड प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और पीथमपुर की आर. एंड बी. इंफ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड शामिल हैं।
कहां कितना काम हुआ
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार
- खंडवा परियोजना की लागत 250.81 करोड़ रुपए है, जिसमें 23.96 फीसदी काम पूरा हुआ और 18.83 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।
- बुरहानपुर परियोजना की लागत 82.02 करोड़ रुपए है। यहां सिर्फ 4 फीसदी काम हुआ है और अब तक खर्च शून्य बताया गया है।
- देवास की परियोजना की लागत 65.97 करोड़ रुपए है और 6 फीसदी काम पूरा हुआ है। इस पर 2.79 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।
- सतना में 15.04 करोड़ रुपए की परियोजना का करीब 52 फीसदी काम पूरा हुआ है और 2.57 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।
- भोपाल में पैकेज-1 की लागत 158.34 करोड़ रुपए, काम 19 फीसदी और खर्च 11.86 करोड़ रुपए है।
- पैकेज-2 की लागत 472.32 करोड़ रुपए, काम 35.01 फीसदी और खर्च 70.08 करोड़ रुपए है।
- पैकेज-3 की लागत 189.60 करोड़ रुपए, काम 6.2 फीसदी है और खर्च शून्य बताया गया है।
- वहीं पैकेज-4 की लागत 293.21 करोड़ रुपए, काम 17.02 फीसदी और खर्च 12.78 करोड़ रुपए है।
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लोगों का सवाल- सड़क कब बनेगी?
अमृत 2.0 के काम को लेकर लोगों की सबसे बड़ी परेशानी सड़क की खुदाई और उसके बाद रेस्टोरेशन नहीं होने को लेकर है। लोगों का कहना है कि सीवेज लाइन डालने के लिए सड़क खोदना मजबूरी हो सकता है लेकिन काम पूरा होने के बाद सड़क को पहले जैसी स्थिति में लाना भी संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी है। अब सवाल उठ रहे हैं कि जिन परियोजनाओं की समय-सीमा लगातार पीछे जा रही है, उन्हें पूरा करने की अंतिम तारीख क्या है? सीवेज लाइन डालने के बाद सड़क की मरम्मत कब होगी और रेस्टोरेशन में देरी के लिए जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी?
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सड़कें खोदने के बाद रेस्टोरेशन नहीं किया तो कार्रवाई होगी
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि अमृत योजना के तहत विभिन्न शहरों में डाली जा रही सीवेज और पानी के नेटवर्क परियोजनाओं की लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों का काम खराब है, जिनकी गति धीमी है और जो सड़कें खोदने के बाद उनका रेस्टोरेशन नहीं कर रही हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। भोंडवे के मुताबिक काम में लापरवाही करने वाली कुछ कंपनियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। अमृत 2.0 का उद्देश्य शहरों में सीवेज और पानी की व्यवस्था को बेहतर बनाना है लेकिन परियोजनाओं की धीमी रफ्तार और सड़क रेस्टोरेशन में लापरवाही ने कई जगह लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि ब्लैकलिस्टिंग और विभागीय कार्रवाई के बाद इन परियोजनाओं की गति कितनी तेज होती है और खोदी गई सड़कों की मरम्मत कब तक पूरी होती है।












