CG NEWS: युक्तियुक्तकरण नीति को दी मंजूरी, हाई कोर्ट ने शिक्षकों की 24 से ज्यादा याचिकाएं खारिज।

RAIPUR/ BILASPUR NEWS छत्तीसगढ़ सरकार की बहुचर्चित युक्तियुक्तकरण (Rationalisation) नीति को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब लगभग समाप्त हो गया है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले को पूरी तरह सही ठहराते हुए प्रदेशभर के शिक्षकों और शिक्षक संगठनों द्वारा दायर 24 से अधिक याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि सरकारी कर्मचारियों की पोस्टिंग और स्थानांतरण प्रशासनिक अधिकार का विषय है तथा किसी भी कर्मचारी को एक ही स्थान पर बने रहने का संवैधानिक या कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं है।
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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सरकार की नीति पर लगी न्यायिक मुहर
बिलासपुर हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार की युक्तियुक्तकरण नीति को वैध और जनहित में बताया है। जस्टिस बिभू दत्त गुरु की सिंगल बेंच ने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का असमान और तर्कहीन वितरण शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रहा था। ऐसे में सरकार द्वारा उठाया गया कदम प्रशासनिक आवश्यकता और सार्वजनिक हित में है।
24 से ज्यादा याचिकाएं एक साथ खारिज
इस नीति के विरोध में छत्तीसगढ़ विद्यालयीन शिक्षक कर्मचारी संघ सहित प्रदेशभर के शिक्षकों ने 24 से अधिक याचिकाएं दायर की थीं। सभी याचिकाओं में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी, लेकिन कोर्ट ने सभी दलीलों को अस्वीकार करते हुए एक साथ सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।
कोर्ट की दो टूक टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ट्रांसफर और पोस्टिंग सरकार के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का हिस्सा हैं। किसी भी सरकारी कर्मचारी को किसी एक स्थान पर स्थायी रूप से पदस्थ रहने का अधिकार नहीं है। यदि जनहित और प्रशासनिक जरूरत के अनुसार स्थानांतरण किया जाता है तो उसमें न्यायालय दखल नहीं देगा।
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16 हजार से ज्यादा शिक्षकों का हुआ युक्तियुक्तकरण
राज्य सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में संतुलन लाने के उद्देश्य से 16,165 शिक्षकों एवं प्राचार्यों का युक्तियुक्तकरण किया है। इस प्रक्रिया के तहत प्रदेश की 10,463 शालाओं को शामिल किया गया, जिनमें 10,297 ऐसे स्कूल हैं जो एक ही परिसर में संचालित हो रहे थे। सरकार का दावा है कि इससे शिक्षक विहीन और एकल शिक्षक वाले स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
सरकार का तर्क रहा कि प्रदेश के दूरस्थ और आदिवासी इलाकों में बड़ी संख्या में स्कूल शिक्षक विहीन या एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। वहीं कई शहरी और सुविधाजनक क्षेत्रों में जरूरत से अधिक शिक्षक पदस्थ थे। युक्तियुक्तकरण के माध्यम से इसी असंतुलन को दूर करने का प्रयास किया गया है।
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शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में अहम फैसला**
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब सरकार के लिए युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। माना जा रहा है कि इससे शिक्षकों की उपलब्धता संतुलित होगी और सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार आने की संभावना बढ़ेगी।












