चंद्र ग्रहण का असर :सूतक काल शुरू होते ही देशभर के मंदिरों के कपाट बंद, शुद्धिकरण के बाद ही खुलेंगे द्वार

धर्म डेस्क। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लगने वाले चंद्र ग्रहण का असर देशभर के मंदिरों में भी देखने को मिल रहा है। ग्रहण से पहले लगने वाले सूतक काल के कारण भारत के कई प्रसिद्ध और स्थानीय मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल को अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान मंदिरों में नियमित पूजा-पाठ, आरती और दर्शन नहीं होते। मंदिर प्रशासन ने सुबह से ही श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह के द्वार बंद कर दिए हैं और ग्रहण समाप्त होने के बाद ही दोबारा दर्शन शुरू किए जाएंगे।
आज लग रहा चंद्र ग्रहण, भारत में भी दिखाई देगा
3 मार्च को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा। खगोल और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस ग्रहण का सूतक काल भी मान्य है, इसलिए मंदिरों में विशेष नियम लागू किए गए हैं।
चंद्र ग्रहण का समय
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घटना |
समय |
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सूतक काल शुरू |
सुबह 6:21 बजे |
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चंद्र ग्रहण शुरू |
दोपहर 3:21 बजे |
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चंद्र ग्रहण समाप्त |
शाम 6:47 बजे |
भारत में शाम के समय चंद्रमा ग्रहण की अवस्था में ही उदित होगा, इसलिए इसका धार्मिक महत्व और भी अधिक माना जा रहा है।
सूतक काल शुरू होते ही बंद हुए मंदिर
चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। जैसे ही सूतक काल शुरू हुआ, वैसे ही देश के कई प्रसिद्ध मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस अवधि में-
- मंदिरों में दर्शन बंद कर दिए जाते हैं।
- नियमित पूजा-पाठ और आरती नहीं होती।
- गर्भगृह के द्वार बंद रखे जाते हैं।
मंदिरों के पुजारियों के अनुसार, ग्रहण समाप्त होने के बाद शुद्धिकरण के साथ ही मंदिर दोबारा श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे।
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ग्रहण खत्म होने के बाद होगा शुद्धिकरण
धार्मिक परंपराओं के मुताबिक ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों और घरों में शुद्धिकरण की प्रक्रिया की जाती है।
शाम को ग्रहण खत्म होने के बाद-
- पहले स्नान किया जाता है।
- मंदिरों में गंगाजल छिड़का जाता है।
- देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्नान कराया जाता है।
- फिर विधि-विधान से पूजा और आरती की जाती है।
इसके बाद मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोल दिए जाते हैं।
ग्रहण के कारण कई जगह टली धुलंडी
इस साल चंद्र ग्रहण का असर होली के उत्सव पर भी पड़ा है। हालांकि, 2 मार्च की रात होलिका दहन किया गया था, लेकिन 3 मार्च को लगने वाले ग्रहण के कारण कई क्षेत्रों में आज रंगों की होली यानी धुलंडी नहीं मनाई जा रही है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण और सूतक काल के दौरान रंग-गुलाल खेलना और उत्सव मनाना शुभ नहीं माना जाता। इसी वजह से कई पंडितों और ज्योतिषाचार्यों ने 4 मार्च को होली खेलने की सलाह दी है।
सूतक काल में क्या करें
ग्रहण और सूतक काल के दौरान पूजा-पाठ और मांगलिक कार्य भले ही वर्जित माने जाते हों, लेकिन कुछ धार्मिक कार्य करना शुभ माना जाता है।
सूतक काल में करें ये काम
- भगवान का ध्यान और मंत्र जाप
- दान-पुण्य करना
- जरूरतमंद लोगों की सहायता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
इन चीजों का दान करना माना जाता है शुभ
ग्रहण के समय जरूरतमंदों को कई प्रकार की वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है।
- दान की वस्तु
- अनाज
- भोजन
- कपड़े
- धन
- जूते-चप्पल
इसके अलावा गोशाला में गायों की सेवा के लिए दान करना और गायों को हरी घास खिलाना भी पुण्यदायक माना जाता है।
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जीव-जंतुओं को भोजन कराने की परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान जीव-जंतुओं को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है।
इस दौरान लोग-
- गायों को हरी घास खिलाते हैं।
- मछलियों को आटे की गोलियां खिलाते हैं।
- चींटियों के लिए आटा और शक्कर डालते हैं।
- ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
सूतक काल में इन कामों से बचें
सूतक काल और ग्रहण के दौरान कुछ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है।
इन कार्यों से बचना चाहिए-
- पूजा-पाठ और आरती
- विवाह या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य
- मंदिरों में दर्शन
- रंग-गुलाल खेलना
- नए शुभ कार्य शुरू करना
इसी वजह से आज कई जगह धार्मिक गतिविधियां सीमित रखी गई हैं।











