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अमेरिका-ईरान तनाव:अब पानी बना नया निशाना, डिसैलिनेशन प्लांट्स पर हमलों से बढ़ा संकट

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच अब डिसैलिनेशन प्लांट निशाने पर हैं। ईरान ने अमेरिकी हमले में होर्मोजगान के वाटर प्लांट के तबाह होने का दावा किया, जबकि कुवैत ने ईरान पर पानी के प्लांट पर हमले का आरोप लगाया।
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अब पानी बना नया निशाना, डिसैलिनेशन प्लांट्स पर हमलों से बढ़ा संकट
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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। दोनों देशों के बीच जारी टकराव में अब समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाने वाले डिसैलिनेशन प्लांट्स भी निशाने पर आ गए हैं। इन हमलों से केवल सैन्य तनाव ही नहीं बल्कि लाखों लोगों की पेयजल सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

ईरान का दावा- अमेरिकी हमले में बोंजी वाटर प्लांट तबाह

ईरान ने शनिवार को दावा किया कि अमेरिका ने होर्मोजगान प्रांत में हवाई हमला कर बोंजी डिसैलिनेशन प्लांट को पूरी तरह तबाह कर दिया। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले के बाद आसपास के करीब 20 गांवों के लगभग 10 हजार लोगों की पेयजल आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई है। स्थानीय प्रशासन वैकल्पिक जल आपूर्ति की व्यवस्था करने में जुटा है, लेकिन प्रभावित इलाकों में पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया है।

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कुवैत का आरोप- लगातार दूसरे दिन पानी के प्लांट को बनाया निशाना

दूसरी ओर कुवैत ने आरोप लगाया है कि ईरान ने लगातार दूसरे दिन उसके डिसैलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया है। कुवैती अधिकारियों का कहना है कि देश की पेयजल व्यवस्था का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट्स पर निर्भर करता है। कुवैत ने चेतावनी दी है कि यदि इन संयंत्रों का संचालन प्रभावित होता है तो रेगिस्तानी देश में पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है जिससे आम लोगों का जीवन प्रभावित होगा।

पानी के बुनियादी ढांचे पर हमलों से बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के दौरान पेयजल जैसी आवश्यक नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाना मानवीय संकट को और गहरा कर सकता है। डिसैलिनेशन प्लांट मध्य पूर्व के कई देशों के लिए जीवनरेखा हैं क्योंकि यहां प्राकृतिक मीठे पानी के स्रोत बेहद सीमित हैं। यदि इस तरह के हमले जारी रहते हैं तो क्षेत्र में जल संकट, मानवीय समस्याएं और क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ सकती है।

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मध्य पूर्व में बढ़ सकता है जल संकट

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गया है। पानी जैसी बुनियादी जरूरत से जुड़े ढांचे पर हमलों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और मानवीय स्थिति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। आने वाले दिनों में दोनों देशों की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का रुख इस संकट की दिशा तय करेगा।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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