भोपाल। प्रदेश के 32 कॉलेजों में शौचालय, भोजन कक्ष, खेल मैदान सहित कई तरह की अधोसंरचना और सुविधाएं मौजूद नहीं है, इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने इन कॉलेजों को मान्यता दे दी है। स्थिति यह है कि यह कॉलेज सुविधाएं न होने के बावजूद से विद्यार्थियों से वर्षों से भारी-भरकम फीस वसूल कर रहे हैं। महानियंत्रक लेखा परीक्षक (CAG) ने सुविधाओं के अभाव के बावजूद मान्यता दिए जाने पर आपत्ति जताई है।
CAG की रिपोर्ट में बताया गया है कि राजधानी में रायसेन रोड स्थित गणपति नर्सिंग कॉलेज में 40 स्टूडेंट के लिए नर्सिंग कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। जब इसका भौतिक सत्यापन किया गया तो कॉलेज में बहुउद्देशीय कक्ष, सभागार, विभागाध्यक्ष के लिए कमरा ही नहीं था। जबकि लोकल इंक्वारी कमेटी (LIC) की रिपोर्ट के अनुसार यह सब सुविधाएं कॉलेज में उपलब्ध बताई गई हैं।
इसी तरह नीलबड़ स्थित वीएनएस कॉलेज ऑफ नर्सिंग में भी दृश्य-श्रव्य सहायक का कक्ष, छात्रावास में अतिथि कक्ष, वाचनालय, भंडार गृह, मनोरंजन कक्ष उपलब्ध नहीं पाए गए। डॉ. एसपी सिंह विज्ञान एवं प्रबंधन कॉलेज खजूरी कला भोपाल में विभागाध्यक्ष के लिए कमरा ही नहीं है। नर्सिंग में संकाय कक्ष, छात्र कल्याण कक्ष, इंडोर खेल हॉल, खेल मैदान, छात्रावास में भवन, चिकित्सालय में प्रयोगशालाएं जैव रसायन की उपलब्ध नहीं हैं। चिकित्सालय चालू ही नहीं था। कस्तूरबा कॉलेज ऑफ नर्सिंग में वाचनालय, छात्र कल्याण कक्ष, इंडोर खेल हाल नहीं मिले।
इनके अलावा बैतूल, भिंड, इंदौर, जबलपुर, भोपाल, सतना, शहडोल, रतलाम, मंडला, सागर, झाबुआ, देवास, उज्जैन के कॉलेजों में अधोसंरचना का अभाव मिला। जबकि एलआईसी के अनुसार यह सभी सुविधाएं कॉलेजों में उपलब्ध मिली हैं। भौतिक सत्यापन में कुछ भी कमी नहीं मिली। CAG ने इस पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है।