Parliament Monsoon Session:लोकसभा में जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक पास, सोमवार तक स्थगित हुई कार्यवाही

लोकसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक पेश किया, जिसे ध्वनि मत से मंजूरी मिल गई। संशोधन के तहत एक वर्ष से ज्यादा और दो वर्ष के भीतर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण अब सक्षम अधिकारी की अनुमति से ही हो सकेगा। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया। वहीं राज्यसभा में नीट और अन्य मुद्दों को लेकर विपक्ष का विरोध जारी रहा।
हंगामे के बीच लोकसभा से विधेयक को मिली मंजूरी
शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के बीच लोकसभा की कार्यवाही चली। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक सदन में पेश किया, जिसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
विलंबित पंजीकरण के नियम हुए और सख्त
संशोधित प्रावधानों के अनुसार अगर किसी जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक वर्ष बाद, लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या जिला मजिस्ट्रेट की ओर से अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति के बाद ही किया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य समय पर जन्म और मृत्यु की रिपोर्टिंग को बढ़ावा देना और विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
किरण रिजिजू ने विपक्ष के रुख पर उठाए सवाल
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार चाहती थी कि सभी सांसद इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लें और इसके लिए बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में पर्याप्त समय भी निर्धारित किया गया था। उन्होंने विपक्ष से कहा कि बाद में यह आरोप न लगाया जाए कि विधेयक बिना चर्चा के पारित किया गया। वहीं राज्यसभा में नीट से जुड़े छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई सहित अन्य मुद्दों को लेकर विपक्ष ने जोरदार विरोध दर्ज कराया।
पीएम मोदी ने की कैबिनेट बैठक
संसद की कार्यवाही के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक भी हुई। इससे एक दिन पहले कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक में वेस्ट एशिया की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई थी। बैठक में इस बात पर चर्चा की गई कि किसी भी परिस्थिति में भारतीय नाविक की मौत के मामले को भारत सरकार गंभीरता से उठाएगी और ऐसे मामलों में राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।












