अंकित शर्मा हत्याकांड :ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद, जज बोले- समाज को झकझोर देने वाला अपराध

फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा सुनाते समय अदालत ने कहा कि यह बेहद गंभीर और समाज को झकझोर देने वाला अपराध था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अंकित शर्मा की बर्बर तरीके से हत्या की गई और उनके शव को जानवरों की तरह छोड़ दिया गया।
अदालत ने कहा- अपराध बेहद क्रूर था
कोर्ट ने कहा कि हत्या को जिस तरह अंजाम दिया गया, वह बेहद क्रूर था। अदालत के मुताबिक, हमलावरों ने अंकित शर्मा की मौत के बाद भी उनके शव को घसीटकर चांद बाग इलाके तक ले जाकर नाले में फेंक दिया। जज ने कहा कि इस घटना ने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया था।
13 जुलाई को दोषी करार दिए गए थे पांच आरोपी
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 13 जुलाई 2026 को ताहिर हुसैन, नजीम, कासिम, अनस और जावेद को दोषी ठहराया था। इसके बाद शुक्रवार, 31 जुलाई को सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
दिल्ली पुलिस ने मांगी थी फांसी की सजा
दिल्ली पुलिस और पीड़ित परिवार ने अदालत से सभी दोषियों को मौत की सजा देने की मांग की थी। पुलिस ने इस मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' यानी बेहद दुर्लभ और गंभीर अपराध बताया था। पुलिस के अनुसार, अंकित शर्मा के शरीर पर कुल 51 चोटों के निशान थे, जिनमें सात घाव जानलेवा थे। इनमें से 16 घाव धारदार हथियार से किए गए थे। पुलिस ने यह भी कहा था कि मौत के बाद भी अंकित शर्मा के शव के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।
बचाव पक्ष ने फांसी की मांग का किया विरोध
ताहिर हुसैन के वकील ने अदालत में मौत की सजा की मांग का विरोध किया था। उनका कहना था कि ताहिर हुसैन ने खुद पुलिस को फोन किया था। बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि केवल शरीर पर लगे घावों की संख्या के आधार पर किसी आरोपी को मौत की सजा नहीं दी जा सकती।
क्या था मामला?
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी। बाद में उनका शव चांद बाग इलाके के एक नाले से बरामद हुआ था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन समेत कई लोगों के खिलाफ हत्या और साजिश का मामला दर्ज किया था।











