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बिहार में 15 साल से बांध का इंतजार, 20 दिन से पानी में डूबा मदरौनी गांव; 1500 से ज्यादा लोगों की जिंदगी बेहाल

बिहार के नवगछिया में मदरौनी गांव करीब 20 दिनों से कोसी की बाढ़ में डूबा है। 1500 से ज्यादा लोगों के घर प्रभावित हैं। ग्रामीणों का दावा है कि 15 साल पहले टूटा रिंग बांध आज तक दुरुस्त नहीं हुआ।
बिहार में 15 साल से बांध का इंतजार, 20 दिन से पानी में डूबा मदरौनी गांव; 1500 से ज्यादा लोगों की जिंदगी बेहाल

नवगछिया के रंगरा प्रखंड का मदरौनी गांव करीब 20 दिनों से कोसी के बाढ़ के पानी में घिरा हुआ है। गांव की सड़कें और घर पानी में डूबे हैं। 1500 से ज्यादा लोगों के घर प्रभावित हैं, जबकि 700 से ज्यादा परिवार बाढ़ की मार झेल रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि करीब 15 साल पहले टूटा रिंग बांध आज तक दुरुस्त नहीं हुआ है। उनका कहना है कि बांध बन जाता तो हर साल होने वाली बाढ़ की परेशानी से हजारों लोगों को राहत मिल सकती थी।

20 दिन से पानी में डूबा गांव

मदरौनी में बाढ़ का पानी घरों के अंदर तक पहुंच चुका है। जिन रास्तों पर रोजाना लोगों की आवाजाही होती थी, वहां अब पानी भरा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। जरूरी सामान, राशन और दवा के लिए भी लोगों को पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कुछ लोग अपने घरों की छतों पर दिन गुजार रहे हैं, जबकि कुछ परिवार रेलवे पटरी के किनारे रहने को मजबूर हैं। गांव का संपर्क भी प्रभावित हुआ है। ऐसे में नाव ही लोगों के लिए आने-जाने का सबसे बड़ा सहारा बनी हुई है।

ग्रामीणों का दावा-15 साल पहले टूटा था रिंग बांध

ग्रामीणों की सबसे बड़ी शिकायत सिर्फ मौजूदा बाढ़ को लेकर नहीं है। उनका कहना है कि करीब 15 साल पहले रिंग बांध टूट गया था, लेकिन आज तक उसका निर्माण नहीं हो पाया। ग्रामीणों के मुताबिक अगर बांध दुरुस्त होता तो मदरौनी के साथ सहोड़ा, बनिया और सधुआ चापर पंचायतों के लोगों को हर साल बाढ़ के बीच जिंदगी नहीं गुजारनी पड़ती ग्रामीणों का दावा है कि इन पंचायतों की दो लाख से ज्यादा आबादी हर साल बाढ़ की चपेट में आती है। उनका कहना है कि अगस्त से नवंबर तक बाढ़ का खतरा बना रहता है। हर साल पानी आता है, घर और फसलें प्रभावित होती हैं और लोगों को नाव के सहारे जिंदगी चलानी पड़ती है।

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राहत को लेकर भी ग्रामीणों ने उठाए सवाल

ग्रामीणों के मुताबिक इस बार भी बाढ़ के बीच उन्हें राहत का इंतजार है। उनका दावा है कि प्रशासन की ओर से अभी तक पॉलीथिन, सूखा राशन और मवेशियों के चारे की व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सामुदायिक किचन अब तक शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने घर और सामान बचाने के साथ-साथ भोजन और दूसरी जरूरी चीजों की चिंता भी बनी हुई है। मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था नहीं होने से पशुपालकों की परेशानी भी बढ़ गई है।

हर साल दोहराई जाती है बाढ़ की कहानी

मदरौनी और आसपास के इलाकों में बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक हर साल अगस्त से नवंबर के बीच बाढ़ का खतरा बना रहता है। पानी बढ़ने के साथ घर और फसलें प्रभावित होती हैं और नाव लोगों की जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा बन जाती है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद राहत और बचाव का दौर खत्म हो जाता है, लेकिन स्थायी समाधान का इंतजार बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से यही सिलसिला चल रहा है और अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

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अब सिर्फ राहत नहीं, स्थायी समाधान की मांग

फिलहाल बाढ़ से घिरे लोगों को नाव, भोजन, पेयजल और जरूरी राहत सामग्री की जरूरत है। लेकिन ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग रिंग बांध के स्थायी निर्माण की है। उनका कहना है कि मुद्दा सिर्फ इस साल की बाढ़ से जुड़ा नहीं है, बल्कि 15 साल से चले आ रहे इंतजार का है। फिलहाल मदरौनी पानी में डूबा है, घरों और रास्तों में पानी भरा है और लोगों की जिंदगी मुश्किल में है। ग्रामीणों के सामने अब यही सवाल है कि 15 साल से जिस रिंग बांध के बनने का इंतजार किया जा रहा है, वह आखिर कब पूरा होगा।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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