Aakash Waghmare
19 Jan 2026
बिहार की नई विधानसभा की कार्यवाही अब उस चेहरे के हाथों में शुरू होगी, जो पिछले तीन दशकों से आलमनगर की राजनीति का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाता है। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने जेडीयू के दिग्गज नेता नरेंद्र नारायण यादव को प्रोटेम स्पीकर की शपथ दिलाई, जिसके साथ ही उनके राजनीतिक सफर में एक और अहम अध्याय जुड़ गया।
जेडीयू के वरिष्ठ नेता नरेंद्र नारायण यादव को सोमवार को बिहार के प्रोटेम स्पीकर पद की शपथ दिलाई गई। अब वही नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाएंगे। इस बार वे आलमनगर विधानसभा क्षेत्र से बड़ी जीत के साथ फिर से विधायक बने हैं। उन्होंने वीआईपी उम्मीदवार नबीन कुमार को 55,465 वोटों से हराया।
नरेंद्र नारायण यादव पहली बार 1955 में विधायक बने थे और तब से अब तक आलमनगर में लगातार मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता है और वे बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। लगातार सात बार विधायक बनने का उनका रिकॉर्ड उन्हें इस क्षेत्र का सबसे प्रभावशाली नेता बनाता है।
प्रोटेम स्पीकर को सदन का अस्थायी अध्यक्ष कहा जाता है। उनके मुख्य काम- सभी नए विधायकों को शपथ दिलाना, सदन की प्रारंभिक कार्यवाही को सुचारू रखना, स्थायी स्पीकर के चुने जाने तक सदन का संचालन करना, यह भूमिका इसलिए भी अहम होती है क्योंकि विधानसभा का पहला सत्र इन्हीं के नेतृत्व में चलता है।
मधेपुरा जिले की यह विधानसभा सीट सामान्य श्रेणी में आती है और राजनीतिक रूप से बेहद सक्रिय क्षेत्र माना जाता है। यह मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और इसके आसपास सहरसा, खगड़िया, भागलपुर, नवगछिया, कटिहार और पूर्णिया जैसे जिले हैं। इसी वजह से यहां राजनीतिक, सामाजिक और भौगोलिक विविधता देखने को मिलती है।
इस लंबे सफर में इस सीट की राजनीति पूरी तरह नरेंद्र नारायण यादव के इर्द-गिर्द रही है।
आलमनगर का चुनावी गणित काफी दिलचस्प है। यहां सबसे बड़ा प्रभाव यादव और मुस्लिम मतदाताओं का है। साथ ही राजपूत, ब्राह्मण, कोइरी, कुर्मी, रविदास और पासवान समुदाय भी बड़ी संख्या में हैं। इसी वजह से हर चुनाव में यहां जातीय संतुलन सबसे बड़ी चुनौती रहता है।