बिहार विधानसभा में नया प्रोटेम स्पीकर :आलमनगर से लगातार जीतने वाले नरेंद्र नारायण यादव को बड़ी जिम्मेदारी

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आलमनगर से लगातार जीतने वाले नरेंद्र नारायण यादव को बड़ी जिम्मेदारी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    बिहार की नई विधानसभा की कार्यवाही अब उस चेहरे के हाथों में शुरू होगी, जो पिछले तीन दशकों से आलमनगर की राजनीति का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाता है। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने जेडीयू के दिग्गज नेता नरेंद्र नारायण यादव को प्रोटेम स्पीकर की शपथ दिलाई, जिसके साथ ही उनके राजनीतिक सफर में एक और अहम अध्याय जुड़ गया।

    प्रोटेम स्पीकर बने नरेंद्र नारायण यादव

    जेडीयू के वरिष्ठ नेता नरेंद्र नारायण यादव को सोमवार को बिहार के प्रोटेम स्पीकर पद की शपथ दिलाई गई। अब वही नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाएंगे। इस बार वे आलमनगर विधानसभा क्षेत्र से बड़ी जीत के साथ फिर से विधायक बने हैं। उन्होंने वीआईपी उम्मीदवार नबीन कुमार को 55,465 वोटों से हराया।

    • नरेंद्र नारायण यादव को मिले वोट: 1,38,401
    • नबीन कुमार को मिले वोट: 82,936
    • जन सुराज के सुबोध कुमार सुमन तीसरे स्थान पर रहे (8,934 वोट)
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    लंबा राजनीतिक अनुभव, कई बार मंत्री रह चुके

    नरेंद्र नारायण यादव पहली बार 1955 में विधायक बने थे और तब से अब तक आलमनगर में लगातार मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता है और वे बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। लगातार सात बार विधायक बनने का उनका रिकॉर्ड उन्हें इस क्षेत्र का सबसे प्रभावशाली नेता बनाता है।

    प्रोटेम स्पीकर की भूमिका क्या होती है?

    प्रोटेम स्पीकर को सदन का अस्थायी अध्यक्ष कहा जाता है। उनके मुख्य काम- सभी नए विधायकों को शपथ दिलाना, सदन की प्रारंभिक कार्यवाही को सुचारू रखना, स्थायी स्पीकर के चुने जाने तक सदन का संचालन करना, यह भूमिका इसलिए भी अहम होती है क्योंकि विधानसभा का पहला सत्र इन्हीं के नेतृत्व में चलता है।

    जानें आलमनगर सीट को

    मधेपुरा जिले की यह विधानसभा सीट सामान्य श्रेणी में आती है और राजनीतिक रूप से बेहद सक्रिय क्षेत्र माना जाता है। यह मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और इसके आसपास सहरसा, खगड़िया, भागलपुर, नवगछिया, कटिहार और पूर्णिया जैसे जिले हैं। इसी वजह से यहां राजनीतिक, सामाजिक और भौगोलिक विविधता देखने को मिलती है।

    आलमनगर सीट: कब कौन जीता?

    • 1952: तनुक लाल यादव (सोशलिस्ट पार्टी)
    • 1957–1972: कांग्रेस के यदुनंदन झा व विद्याकर कवि ने पांच बार जीत दर्ज की
    • 1977–1990: बीरेन्द्र कुमार सिंह ने जनता पार्टी, लोकदल, जनता दल से लगातार चार जीत हासिल की
    • 1995–अब तक: नरेंद्र नारायण यादव ने जनता दल और फिर जेडीयू के टिकट पर लगातार सात जीत

    इस लंबे सफर में इस सीट की राजनीति पूरी तरह नरेंद्र नारायण यादव के इर्द-गिर्द रही है।

    जातीय समीकरण

    आलमनगर का चुनावी गणित काफी दिलचस्प है। यहां सबसे बड़ा प्रभाव यादव और मुस्लिम मतदाताओं का है। साथ ही राजपूत, ब्राह्मण, कोइरी, कुर्मी, रविदास और पासवान समुदाय भी बड़ी संख्या में हैं। इसी वजह से हर चुनाव में यहां जातीय संतुलन सबसे बड़ी चुनौती रहता है।

     

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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