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सिनेमा से संसद तक :राजनीति में भी अपनी छाप छोड़ गए धर्मेंद्र, बीकानेर के सांसद बने थे, फिर चुनाव न लड़ने की खाई कसम 

89 साल की उम्र में अभिनेता और पूर्व सांसद धर्मेंद्र का निधन हो गया। फिल्मों में सफलता के बाद उन्होंने 2004 में राजनीति में कदम रखा था और बीजेपी के टिकट पर राजस्थान की बीकानेर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। हालांकि सांसद रहते उन्हें क्षेत्र से दूर रहने और कम उपस्थिति के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। 5 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद उन्होंने राजनीति छोड़ने का फैसला किया।
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राजनीति में भी अपनी छाप छोड़ गए धर्मेंद्र, बीकानेर के सांसद बने थे, फिर चुनाव न लड़ने की खाई कसम 
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा जगत के दिग्गज अभिनेता और लाखों दिलों की धड़कन रहे धर्मेंद्र अब नहीं रहे। 89 वर्ष की आयु में सोमवार, 24 नवंबर 2025 को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से बॉलीवुड, राजनीतिक गलियारों और देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है। 'ही-मैन' कहे जाने वाले धर्मेंद्र न सिर्फ सिनेमा के सुपरस्टार थे, बल्कि एक ऐसा नाम थे जिसने राजनीति से लेकर समाजसेवा तक की यात्रा सम्मान के साथ तय की।

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    धर्मेंद्र का राजनीतिक सफर

    फिल्मों में शानदार सफलता हासिल करने के बाद धर्मेंद्र ने राजनीति में कदम रखा और साल 2004 में बीजेपी के टिकट पर राजस्थान की बीकानेर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने अपने लोकप्रिय फिल्मी अंदाज़ और संवादों से जनता का दिल जीता।

    इस चुनाव में उनके दोनों बेटे- सनी देओल और बॉबी देओल भी सक्रिय प्रचार में शामिल हुए। परिणामस्वरूप धर्मेंद्र ने कांग्रेस उम्मीदवार रमेश्वर लाल डूडी को करीब 57–60 हजार वोटों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की।

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    सांसद रहते विवादों और चुनौतियों से सामना

    धर्मेंद्र की लोकप्रियता के बावजूद उनका संसदीय कार्यकाल चुनौतियों से भरा रहा। बीकानेर के मतदाताओं की यह शिकायत रही कि वे क्षेत्र में कम दिखाई देते थे। एक समय ऐसा भी आया जब उनके “लापता” होने के पोस्टर शहर में लगाए गए, जो राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में रहे।

    इस घटना के बाद धर्मेंद्र तीन दिन के दौरे पर बीकानेर पहुंचे और लोगों से मुलाकात की। हालांकि, राजनीति का यह अध्याय उनके लिए सहज नहीं रहा और वे बार–बार इस बात का जिक्र करते रहे कि राजनीति उनके स्वभाव और जीवनशैली से मेल नहीं खाती।

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    कभी राजनीति में नहीं लौटेंगे...

    5 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद धर्मेंद्र ने राजनीति से दूरी बना ली। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्हें चुनाव लड़ने का पछतावा है और वे फिर कभी राजनीति में नहीं लौटेंगे। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि सांसद रहते उन्होंने कई विकास कार्य करवाए, लेकिन उनके प्रयासों का श्रेय दूसरों को मिलता रहा, जिससे वे आहत हुए।

    परिवार की राजनीतिक विरासत

    धर्मेंद्र के राजनीतिक करियर भले ही लंबा नहीं रहा, लेकिन उनके परिवार के दो सदस्य- उनकी पत्नी हेमा मालिनी और पुत्र सनी देओल सक्रिय राजनीति का हिस्सा रहे।

    • हेमा मालिनी मथुरा से लगातार तीन बार सांसद बनीं और अभी लोकसभा सदस्य हैं।
    • सनी देओल ने 2019 में गुरदासपुर से सांसद बनकर जीत हासिल की, हालांकि 2024 में उन्होंने चुनाव न लड़ने का फैसला किया।

    सिनेमा के अमर सितारे

    राजनीति से दूर रहने के बावजूद धर्मेंद्र का असली पहचान सिनेमा ही रहा। ‘शोले’, ‘सितारा और सीता-गीता’, ‘धरम वीर’, ‘चुपके—चुपके’, ‘यादों की बारात’ जैसी अनगिनत फिल्मों से उन्होंने दर्शकों को मनोरंजन, भावनाएं और यादें दीं।

    उनकी छवि एक्शन हीरो, रोमांटिक स्टार और भावनाओं से जुड़े अभिनय के लिए सदियों तक याद की जाएगी। धर्मेंद्र के निधन के बाद सोशल मीडिया पर उनके चाहने वालों, फिल्म जगत और राजनीतिक नेताओं ने शोक संदेश साझा किए।

    Mithilesh Yadav
    By Mithilesh Yadav

    वर्तमान में पीपुल्स समाचार के डिजिटल विंग यानी 'पीपुल्स अपडेट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर कार्यरत हूं।...Read More

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