
देशभर में प्राइवेट स्कूलों द्वारा छात्रों और अभिभावकों पर महंगी किताबें खरीदने के दबाव को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी राज्य सरकारों और शिक्षा मंत्रालय से जवाब मांगा है। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।
देश के अलग अलग राज्यों से अभिभावकों ने शिकायतें दर्ज कराई थीं कि कई प्राइवेट स्कूल छात्रों पर खास प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें खरीदने का दबाव बनाते हैं। इन किताबों की कीमतें बहुत ज्यादा होती हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। इन्हीं शिकायतों के आधार पर NHRC ने इस पूरे मामले को संज्ञान में लिया और जांच प्रक्रिया शुरू की। आयोग ने कहा कि बच्चों की शिक्षा को किसी भी तरह से व्यापार का रूप नहीं दिया जा सकता और सभी को समान अवसर मिलना चाहिए।
इस मामले में आयोग की खंडपीठ, जिसकी अध्यक्षता प्रियंक कानूनगो कर रहे हैं ने सभी राज्य सरकारों को नोटिस भेजा है। इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय से जवाब मांगा गया है। आयोग ने राज्यों से कहा है कि वे बताए कि राष्ट्रीय स्कूल बैग नीति और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के नियमों का पालन किस तरह किया जा रहा है। इसके साथ ही सभी राज्यों से रिपोर्ट भी मांगी गई है ताकि स्थिति की वास्तविक जानकारी सामने आ सके।
NHRC ने यह भी सवाल उठाया है कि जब सरकारी स्कूलों में छात्रों को NCERT या SCERT की किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं तो प्राइवेट स्कूलों में अलग और महंगी किताबें क्यों लागू की जाती हैं। आयोग का कहना है कि अगर शिक्षा एक समान अधिकार है तो पाठ्यक्रम और किताबों में इतना बड़ा अंतर नहीं होना चाहिए। ऐसा करना बच्चों के साथ अकादमिक भेदभाव की श्रेणी में आता है।
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आयोग ने यह सुझाव भी दिया है कि कक्षा 8 तक सभी स्कूलों में NCERT या SCERT की किताबों का ही उपयोग किया जाना चाहिए। इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में समानता आएगी बल्कि अभिभावकों पर आर्थिक दबाव भी कम होगा। आज कई प्राइवेट स्कूल अपने हिसाब से किताबें तय करते हैं जो कई बार NCERT की तुलना में कई गुना महंगी होती हैं। इससे हर साल अभिभावकों को भारी खर्च करना पड़ता है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मुद्दा महंगी किताबों का है। अक्सर देखा गया है कि प्राइवेट स्कूल हर साल नई किताबें बदल देते हैं जिससे अभिभावकों को बार बार नई किताबें खरीदनी पड़ती हैं। NHRC की सख्ती के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि इस पर रोक लग सकती है। आयोग ने संकेत दिए हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी।
आयोग ने नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी 2020 को सख्ती से लागू करने की बात कही है। इसका मकसद बच्चों के स्कूल बैग का वजन कम करना है। आज कई स्कूलों में बच्चों के बैग का वजन बहुत ज्यादा होता है, जिससे उनकी सेहत पर भी असर पड़ता है। NHRC का मानना है कि शिक्षा का बोझ बच्चों के कंधों पर नहीं डाला जाना चाहिए।
NHRC ने शिक्षा मंत्रालय से यह भी पूछा है कि कक्षा 8 तक का पाठ्यक्रम अलग अलग क्यों है और इसे एक समान क्यों नहीं किया जा सकता। आयोग ने यह भी कहा है कि अगर सरकारी मानकों के अनुसार पाठ्यक्रम तय किया गया है, तो प्राइवेट स्कूलों को भी उसी का पालन करना चाहिए।
इस पूरे मामले में सभी राज्य सरकारों और संबंधित विभागों को 30 दिनों के अंदर रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। इस रिपोर्ट में यह बताना होगा कि स्कूलों में किताबों का चयन कैसे किया जाता है और क्या किसी भी तरह की अनियमितता हो रही है या नहीं।
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