UN में भूटान PM ने भारत को बताया सबसे करीबी और भरोसेमंद दोस्त, GMC के लिए मोदी सरकार के समर्थन का जिक्र

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग टोबगे ने भारत के साथ अपने रिश्तों का जिक्र करते हुए उसे भूटान का करीबी और भरोसेमंद दोस्त बताया। उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षी गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (GMC) परियोजना के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत सरकार और असम सरकार के समर्थन का भी उल्लेख किया। टोबगे ने कहा कि GMC की भौगोलिक स्थिति, कनेक्टिविटी, बड़े बाजारों तक पहुंच और भारत के साथ भरोसे का रिश्ता इस परियोजना की बड़ी ताकत हैं।
भारत को बताया भरोसेमंद साझेदार
UNGA में अपने संबोधन के दौरान त्शेरिंग टोबगे ने कहा कि गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी भूटान और भारत की सीमा से लगी हुई है। उनके मुताबिक, शहर की लोकेशन ऐसी जगह है जहां से भारत के बड़े और तेजी से बढ़ते बाजारों तक पहुंच बनाई जा सकती है। टोबगे ने कहा कि भारत के साथ कनेक्टिविटी GMC को दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों तक पहुंचने के लिए अहम रास्ता उपलब्ध करा सकती है। उन्होंने भारत को भूटान का सबसे करीबी दोस्त और भरोसेमंद साझेदार बताया। भारत और भूटान के बीच हाल के दिनों में भी ऊर्जा, कनेक्टिविटी और GMC समेत कई क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई है। 16 से 18 सितंबर 2026 के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर की भूटान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की थी और भारत ने GMC के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की थी।
GMC के लिए भारत के समर्थन का जिक्र
भूटान के प्रधानमंत्री ने कहा कि गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी के विजन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत सरकार और सीमा से लगे असम के समर्थन से मजबूती मिली है। उन्होंने इसे परियोजना के लिए महत्वपूर्ण बताया। GMC को भूटान के भविष्य के विकास से जुड़ी एक महत्वाकांक्षी परियोजना के तौर पर देखा जा रहा है। भारत और भूटान के बीच सितंबर में हुई बातचीत में भी इस परियोजना को लेकर सहयोग जारी रखने पर सहमति बनी थी। भारत ने असम के हाटीसार में इमिग्रेशन चेक पोस्ट स्थापित करने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई थी, जिससे गेलेफू आने-जाने वाले लोगों के लिए कनेक्टिविटी आसान हो सके।
बाजार और कनेक्टिविटी को बताया ताकत
टोबगे ने GMC की लोकेशन को परियोजना की अहम ताकतों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि भूटान की सीमा से लगे भारत में बड़ा बाजार मौजूद है और दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी GMC को क्षेत्रीय बाजारों से जोड़ने में मदद कर सकती है। उनके मुताबिक, यह शहर दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच एक संभावित गेटवे के रूप में काम कर सकता है। परियोजना के जरिए निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
ईरान से दूरी, भारत से नजदीकी! ट्रंप ने IMEC को लेकर किया बड़ा ऐलान, आखिर क्या है प्लान?
बोले- भरोसा खरीदा नहीं जा सकता
भूटान के प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भरोसे को भी देश की एक बड़ी ताकत के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि इसे खरीदा नहीं जा सकता। उनके मुताबिक, यह भरोसा शांति, राजनीतिक स्थिरता, कानून के राज और अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के रिकॉर्ड से तैयार होता है। टोबगे ने कहा कि लंबे समय के निवेशकों के लिए भरोसा काफी अहम होता है। इससे उन्हें भविष्य को लेकर स्थिरता का भरोसा मिलता है। उन्होंने GMC के संदर्भ में भी इस भरोसे को महत्वपूर्ण बताया।
भारत-भूटान सहयोग में GMC अहम
भारत और भूटान के बीच GMC को लेकर सहयोग हाल के महीनों में लगातार आगे बढ़ा है। सितंबर में जयशंकर की भूटान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने GMC से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त कार्य समूह के जरिए सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई थी। भारत ने भूटान के राजा की GMC की परिकल्पना के लिए समर्थन भी दोहराया। GMC के साथ-साथ दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग भी आगे बढ़ रहा है। सितंबर में भारत ने भूटान में ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 4,000 करोड़ रुपये की रियायती लाइन ऑफ क्रेडिट से जुड़े समझौते का स्वागत किया था। UNGA में त्शेरिंग टोबगे के बयान में भारत-भूटान संबंधों और गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी के लिए भारत के सहयोग पर खास जोर रहा। उन्होंने GMC की भौगोलिक स्थिति, बाजारों तक पहुंच, कनेक्टिविटी और दोनों देशों के बीच भरोसे को परियोजना की अहम बुनियाद के तौर पर सामने रखा।




















