PU Special :भोपाल में नसबंदी दोगुनी फिर भी डॉग बाइट के मामले बढ़े, 4 साल में 45 हजार से 96 हजार पहुंचा आंकड़ा

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। वर्ष 2022-23 में भोपाल में 9,291 कुत्तों की नसबंदी हुई थी और 45,205 लोग कुत्तों के काटने के बाद इलाज के लिए पहुंचे थे, जबकि 2025-26 में नसबंदी बढ़कर 28,541 हुई, लेकिन डॉग बाइट के मामले 96,857 तक पहुंच गए। मध्यप्रदेश में भी 2022 में 66,018 डॉग बाइट मामले दर्ज हुए थे, जो 2025 में बढ़कर 1,80,520 हो गए। 2026 में जून तक ही 1,00,260 मामले सामने आ चुके हैं। इंदौर में 2025 में 48,972 लोग उपचार के लिए पहुंचे, जबकि 2026 में अगस्त तक 30,696 मामले दर्ज हो चुके हैं। ग्वालियर में भी दो माह में 3,870 लोग डॉग बाइट का शिकार हो चुके हैं। सरकारी स्तर पर नसबंदी और वैक्सीनेशन का आंकड़ा बढ़ने के बावजूद इंसानों का डॉग बाइट से सामना कम नहीं हुआ है, जबकि लगातार डॉग बाइट के बाद भी स्ट्रीट डॉग के आंकड़े किसी के पास नहीं हैं। वर्ष 2001 में गिनती जरूर हुई थी, उसके बाद से सारे निगम अंदाजे पर ही काम कर रहे हैं।
भोपाल में रोज 240 तो इंदौर में 146 केस
इंदौर में अगस्त में अकेले 4,024 लोग डॉग बाइट के बाद अस्पताल पहुंचे, यानी हर दिन 135 से ज्यादा मामले अस्पताल पहुंचे। यह आंकड़े इसलिए भी डरावने हैं क्योंकि यह सिर्फ एक अस्पताल हुकुम चंद पॉलीक्लीनिक में पहुंचे मामले हैं। वहीं भोपाल में 2025 में जेपी और हमीदिया अस्पताल में 96,857 डॉग बाइट के मामले सामने आए, यानी हर दिन 240 मामले। इनमें निजी अस्पतालों के आंकड़े भी जोड़ दिए जाएं तो आंकड़े और भयावह हो जाएंगे।
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राजधानी में सवा लाख डॉग, शेल्टर की क्षमता सिर्फ 600
लगातार बढ़ रहे डॉग बाइट के मामलों के बीच राजधानी भोपाल में आवारा कुत्तों के लिए पर्याप्त शेल्टर तक नहीं है। नगर निगम के पास फिलहाल अरवलिया, आदमपुर छावनी और कजलीखेड़ा में तीन एनिमल बर्थ कंट्रोल यानी एबीसी सेंटर हैं, जिनकी कुल क्षमता सिर्फ 600 कुत्तों की है। जबकि शहर में सवा लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं और इन सेंटरों में रोज 20 से 25 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण हो रहा है।
कोर्ट के निर्देश के बाद भी स्थायी डॉग शेल्टर नहीं
नगर निगम के ये सेंटर केवल नसबंदी के लिए हैं, जबकि कोर्ट के निर्देश के मुताबिक स्थायी डॉग शेल्टर एक भी नहीं है। डॉग बाइट के लगातार बढ़ते मामलों के बीच आवारा कुत्तों की वास्तविक संख्या को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। वर्ष 2001 में स्ट्रीट डॉग की गिनती जरूर हुई थी, लेकिन उसके बाद से सारे निगम अंदाजे पर ही काम कर रहे हैं और कोई नया आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
डॉग बाइट के बाद तुरंत क्या करें?
कुत्ते के काटने या खरोंच लगने पर घाव को कम से कम 15 मिनट साबुन और बहते पानी से धोएं। मिर्च, हल्दी, तेल, मिट्टी या रसायन न लगाएं और इसके बाद तत्काल चिकित्सा केंद्र जाएं। एक्सपोजर की श्रेणी के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन दी जाती है, जबकि गंभीर एक्सपोजर में रेबीज इम्युनोग्लोब्युलिन की जरूरत पड़ सकती है।
महापौर बोलीं-रेबीज मुक्त शहर 2030 पर काम जारी
भोपाल महापौर मालती राय ने कहा कि रैबीज मुक्त शहर-2030 कार्यक्रम के तहत काम करने वाला भोपाल नगर निगम प्रदेश का अकेला शहर है। शहर में तीन केन्द्र चल रहे हैं और एक और बनने तैयार हो रहा है। उन्होंने कहा कि डॉग बाइट के मामले भी लगातार कम हो रहे हैं। वहीं नगर निगम ग्वालियर के नोडल अधिकारी केशव चौहान ने कहा कि डॉग बाइट के केसों के चलते पकड़ने व नसबंदी का काम लगातार जारी है, आगे शेल्टर हाउस बनने पर समस्या से कुछ आराम होगा।
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आंकड़े बता रहे नसबंदी और डॉग बाइट के बीच अंतर
भोपाल में वर्ष 2022-23 में 9,291 नसबंदी के मुकाबले 45,205 डॉग बाइट मामले दर्ज हुए। वर्ष 2023-24 में नसबंदी 18,497 और डॉग बाइट 55,874, वर्ष 2024-25 में नसबंदी 21,452 और डॉग बाइट 75,845 और वर्ष 2025-26 में नसबंदी 28,541 और डॉग बाइट 96,857 रहे। वहीं मध्यप्रदेश में डॉग बाइट के मामले 2022 में 66,018, 2023 में 1,13,499, 2024 में 1,42,948, 2025 में 1,80,520 और 2026 में जून तक 1,00,260 दर्ज हुए हैं।


















