PU Special :ओल्ड ऐज होम संध्या छाया चलाने से पीछे हट रहा सेवा भारती, अब होगा एमपीटी के हवाले

अशोक गौतम, भोपाल। सामाजिक न्याय विभाग और पर्यटन विकास निगम के बीच एमओयू करने पर विचार किया जा रहा है। नई व्यवस्था में बुजुर्गों को रहने के लिए कमरे उपलब्ध कराने के साथ खाली कमरों का व्यावसायिक उपयोग भी किया जा सकेगा। पहले बुजुर्गों को प्राथमिकता के आधार पर कमरे आवंटित होंगे और इसके बाद भी कमरे खाली रहते हैं तो उन्हें होटल की तरह किराये पर दिया जा सकेगा।
सेवा भारती से अनुबंध समाप्त करने की चल रही कार्रवाई
भोपाल के लिंक रोड नंबर-3 स्थित पाटकर कॉलोनी में बने ‘संध्या छाया’ को बुजुर्गों के लिए आधुनिक आवासीय सुविधा के रूप में विकसित किया गया था। यहां रहने के लिए निर्धारित किराया भी सामान्य वृद्धाश्रमों की तुलना में अधिक रखा गया है। नतीजतन, बड़ी संख्या में कमरे खाली बने हुए हैं और अब विभाग इन कमरों का बेहतर उपयोग करने के विकल्प पर काम कर रहा है।
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अनुबंध की शर्तें पूरी करने में विफल रहा संस्थान
सेवा भारती संस्था अनुबंध की कई शर्तें पूरी करने में विफल रही, जिसके चलते अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई चल रही है। इसके लिए संस्था को दो महीने का नोटिस भी दिया गया था। विभाग के मुताबिक, बिजली बिल के भुगतान में देरी, सुरक्षा व्यवस्था, एयर कंडीशनर खराब होने और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी शिकायतें सामने आई थीं।
किराया 45 हजार से 87 हजार रुपए तक
‘संध्या छाया’ में कुल 34 कमरे हैं, जिनमें 56 बुजुर्गों के रहने की व्यवस्था है। इनमें सिंगल और डबल बेड श्रेणी के कमरे शामिल हैं। सिंगल बेड कमरे का मासिक किराया 45,990 से 49,990 रुपए और डबल बेड कमरे का किराया 76,980 से 86,980 रुपए निर्धारित है। इसके बावजूद यहां मुश्किल से आधा दर्जन बुजुर्ग ही रह रहे थे।
खाली कमरों के किराये पर भी था विवाद
अनुबंध समाप्त करने के पीछे खाली कमरों के किराये का भुगतान भी अहम मुद्दा है। सेवा भारती खाली कमरों का किराया देने के बजाय केवल आवंटित कमरों का किराया देने पर जोर दे रही थी। इस मुद्दे सहित अनुबंध की दूसरी शर्तों पर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन सकी।
खाली कमरों का होटल की तरह हो सकेगा इस्तेमाल
अब पर्यटन विकास निगम के माध्यम से संचालन की नई व्यवस्था बनाने की तैयारी है। इसमें बुजुर्गों के लिए आवासीय सुविधा की प्राथमिकता बरकरार रखते हुए खाली कमरों से आय अर्जित करने का रास्ता निकाला जाएगा। पहले बुजुर्गों को कमरे आवंटित होंगे और इसके बाद भी कमरे खाली रहते हैं तो उन्हें होटल की तरह किराये पर दिया जा सकेगा।
एमपीटी को देने पर अभी अंतिम निर्णय नहीं
सामाजिक न्याय विभाग की प्रमुख सचिव सोनाली पोंक्षे वायंगणकर ने बताया कि एमपीटी को देने पर अभी फाइनल निर्णय नहीं हो पाया है। सेवा भारती इसे ठीक से चला नहीं पा रहा था। एमपीटी इसे बेहतर संचालित करेगा। वहीं, एमपीटी के सचिव इलैया राजा टी ने कहा कि सरकार स्तर पर एमपीटी को देने के संबंध में सिर्फ चर्चा की गई है, अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार अब इसे एमपीटी को देने का निर्णय लेती है तो बेहतर तरीके से संचालित किया जाएगा।




















