भोपाल का मास्टर प्लान बदलने से नहीं बदलेगा जमीन का उपयोग, कारोबारियों को फिलहाल राहत नहीं

भोपाल। आवासीय क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम की कार्रवाई के बीच नए मास्टर प्लान से कारोबारियों को फिलहाल राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। व्यापारियों की मांग थी कि नए मास्टर प्लान में मौजूदा व्यावसायिक गतिविधियों के अनुरूप भू-उपयोग बदला जाए। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को भोपाल के नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी है, लेकिन स्पष्ट किया है कि किसी संपत्ति या निर्माण की वैधता का आधार मौजूदा मास्टर प्लान और लागू भवन की अनुमतियों के नियम के हिसाब से ही होगा।
अगली सुनवाई 23 नवंबर को
कोर्ट ने अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि विशेष रूप से आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित न हों। ऐसे क्षेत्रों में कारोबार मिलता है तो पहले चरण में ही परिसर सील करने के निर्देश हैं। जहां भूमि या भवन का उपयोग स्पष्ट रूप से किसी एक श्रेणी में तय नहीं है, वहां मिश्रित उपयोग का सवाल उठ सकता है। ऐसे मामलों में फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने को कहा गया है, हालांकि कागजी प्रक्रिया जारी रखी जा सकती है। बता दें कि मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। इससे एक सप्ताह पहले राज्य सरकार और नगर निगम प्रशासन को अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी।
सील करने के बाद फिर खोले तो उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट में न्यायमित्र अजीत कुमार सिन्हा ने भोपाल में सीलिंग कार्रवाई को लेकर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि कुछ परिसरों को सील करने के बाद कुछ घंटों या दिनों में बिना किसी नए आदेश अथवा प्रक्रिया के दोबारा खोल दिया गया। कोर्ट ने अधिकारियों को बिना भेदभाव कार्रवाई करने और चयनात्मक कार्रवाई से बचने के निर्देश दिए हैं।
रिहायशी इलाके में कारोबार मिला तो सीलिंग
कोर्ट के निर्देश के अनुसार जमीन या भवन के स्वामित्व को लेकर विवाद अदालत में लंबित होने के बावजूद यदि उसका उपयोग स्वीकृत उद्देश्य के विपरीत पाया जाता है तो कार्रवाई की जा सकती है। आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत भवन में व्यावसायिक गतिविधि मिलने पर परिसर सील किया जा सकेगा। पूरी तरह अनधिकृत और बिना सक्षम अनुमति के बने निर्माण पर सीलिंग की कार्रवाई भी जारी रहेगी।
सरकार ने समिति बनाने का फैसला वापस लिया
आवासीय क्षेत्रों में चल रहे कारोबार पर निगम की कार्रवाई के दौरान 2 अगस्त को राज्य सरकार ने एक समिति गठित की थी। इसके बाद निगम ने कार्रवाई रोक दी थी। 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में निगम ने बताया था कि समिति गठित होने के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है। कोर्ट ने उस प्रस्ताव पर रोक लगा दी थी। अब सरकार ने समिति गठित करने का फैसला वापस लेने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने इसे रिकॉर्ड पर लेते हुए एक सप्ताह में प्रक्रिया पूरी करने की अपेक्षा की है।
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62 हजार से ज्यादा प्रतिष्ठान रिहायशी इलाकों में हैं
नगर निगम के सर्वे अनुसार भोपाल के आवासीय क्षेत्रों में 62 हजार से अधिक व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं। नगर निगम बड़ी संख्या में प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी कर चुका है, जबकि 190 से अधिक के खिलाफ कारोबार बंद कराने की कार्रवाई की गई है। कार्रवाई के विरोध में व्यापारी नए मास्टर प्लान में मौजूदा कारोबार के अनुरूप भू-उपयोग बदलने की मांग कर रहे थे। इसी बीच सरकार ने नए ड्राफ्ट मास्टर प्लान की प्रक्रिया शुरू की है।
इनका कहना है…
यदि सरकार की सही मंशा है तो नए मास्टर प्लान में करोबारियों के को राहत दे सकती है। उज्जैन व ग्वालियर विकास योजना-2035 में जमीनों पर मिक्स यूज की व्याख्या की गई है। नए मास्टर प्लान में मिश्रित उपयोग किया जा सकता है। कैबिनेट को यह अधिकार हैं, वह नए मास्टर प्लान में ऐसा बदलाव कर सकती है, जिससे व्यवसायी प्रभावित न हों।
-मनोज मीक,अध्यक्ष, क्रेडाई, भोपाल
नया मास्टर सरकार को लाना है। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 23 नवंबर को है। ऐसे में दीपावली तक व्यवसायियों को राहत है, लेकिन नया मास्टर प्लान व्वसायियों के हितों को देखते हुए आना चाहिए। किसी के व्यवसाय बंद नहीं होने चाहिए।
-गोविंद गोयल,अध्यक्ष भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज
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