भोपाल मास्टर प्लान को मिली हरी झंडी, सीलिंग की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; SC ने ड्राफ्ट जारी करने की दी मंजूरी

भोपाल। कोर्ट ने कहा कि मास्टर प्लान का फाइनल प्रकाशन होने पर इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को देनी होगी। वहीं, रहवासी इलाकों में चल रहे प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई जारी रहेगी और अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।
मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी करने की मिली अनुमति
मंगलवार को दोपहर 2 बजे शुरू हुई सुनवाई शाम 5 बजे के बाद तक चली। सरकार की ओर से एडवोकेट ने भोपाल मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी करने की अनुमति मांगी, जिस पर कोर्ट ने हरी झंडी दे दी। वर्तमान में शहर का विकास वर्ष 2005 के मास्टर प्लान के आधार पर हो रहा है, जबकि 21 साल बाद भी नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो सका है।
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शाम को खुल रहे प्रतिष्ठानों पर कोर्ट नाराज
सुनवाई से पहले रहवासियों की ओर से 10 शिकायतें कोर्ट में दी गई थीं। इनमें आरोप लगाया गया कि अगस्त में नगर निगम ने जिन प्रतिष्ठानों को सील किया था, उनमें से कई सुबह बंद रहने के बाद शाम को दोबारा खुल जाते हैं। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और सीलिंग की कार्रवाई में लापरवाही नहीं करने के सख्त निर्देश दिए। अब नगर निगम और सरकार को 23 नवंबर की सुनवाई में अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।
8084 प्रतिष्ठानों को दिए गए थे नोटिस
5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने आवासीय इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस देने की कार्रवाई शुरू की थी। करीब 15 दिन तक चले अभियान में लिस्टेड 62 हजार 500 प्रतिष्ठानों में से 8084 को नोटिस दिए गए और इसके बाद तीन दिन में 190 प्रतिष्ठान सील किए गए। व्यापारियों के विरोध के बाद कार्रवाई रोक दी गई और पिछले 22 दिनों से सीलिंग नहीं हुई है।
निगम की कार्रवाई पर याचिकाकर्ता ने उठाए सवाल
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने नगर निगम की एक्शन टेकन रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपने दस्तावेज पेश किए हैं। उनका आरोप है कि निगम ने कागजों में कार्रवाई दिखाई, जबकि सील किए गए कई प्रतिष्ठान दोबारा खुल गए। दूसरी ओर, रहवासियों ने भी निगम के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई में पक्षपात करने के आरोप लगाए हैं।
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शोर, भीड़ और ट्रैफिक से सुरक्षा पर चिंता
रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे शोर, भीड़ और सार्वजनिक शांति भंग होने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। उनका दावा है कि असामाजिक गतिविधियों के साथ सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है, वहीं स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर भी असर पड़ रहा है। बढ़ते ट्रैफिक के कारण हादसों का खतरा भी बताया गया है।



















