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मजदूरों का हल्ला बोल!भोपाल के बीमा अस्पताल में जोरदार प्रदर्शन, बेहतर इलाज और दवाओं की उठी मांग

भोपाल के सोनागिरी स्थित बीमा अस्पताल की खराब स्वास्थ्य सेवाओं के खिलाफ शनिवार, 20 जून 2026 को मजदूरों ने जोरदार प्रदर्शन किया। अस्पताल में इलाज, दवाओं की कमी और रेफरल व्यवस्था ठप होने से परेशान होकर बड़ी संख्या में भेल के ठेका कर्मचारी और मजदूर संगठन के सदस्य अस्पताल परिसर में एकत्र हुए और प्रशासन व केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
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भोपाल के बीमा अस्पताल में जोरदार प्रदर्शन, बेहतर इलाज और दवाओं की उठी मांग

भोपाल। राजधानी भोपाल के सोनागिरी स्थित कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) अस्पताल की खराब होती स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मजदूरों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। अस्पताल में इलाज, दवाओं और रेफरल सुविधाओं की कमी से परेशान मजदूरों ने आज अस्पताल परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में भेल के ठेका कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए और अस्पताल प्रशासन तथा केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

मजदूरों का कहना है कि जब से ESI अस्पताल का संचालन केंद्र सरकार के अधीन हुआ है, तब से अस्पताल की व्यवस्थाएं लगातार कमजोर होती जा रही हैं। अस्पताल में आने वाले श्रमिकों और उनके परिवारों को समय पर इलाज नहीं मिल रहा है। कई आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं और गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करने की व्यवस्था भी लगभग ठप हो चुकी है।

इलाज के लिए भटक रहे मजदूर

प्रदर्शन में शामिल मजदूरों ने बताया कि वे हर महीने अपनी कमाई का एक हिस्सा ईएसआई योजना में जमा करते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें और उनके परिवार को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। लेकिन वर्तमान में अस्पताल की स्थिति ऐसी हो गई है कि मरीजों को छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है।

मजदूरों का आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी के कारण मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार आवश्यक जांच समय पर नहीं हो पाती और मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।

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दवाओं की भारी कमी से बढ़ी परेशानी

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अस्पताल में लंबे समय से जरूरी दवाओं की कमी बनी हुई है। मरीजों को डॉक्टर द्वारा लिखी गई कई दवाएं अस्पताल से नहीं मिलतीं और उन्हें बाजार से खरीदनी पड़ती हैं।

मजदूर नेताओं का कहना है कि गरीब और मध्यम वर्ग के श्रमिकों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। जिन सुविधाओं के लिए वे नियमित अंशदान देते हैं, वही सुविधाएं उन्हें समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। प्रदर्शन में शामिल कई मजदूरों ने अपनी समस्याएं साझा करते हुए बताया कि अस्पताल में दवा नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी मेडिकल स्टोर से महंगी कीमतों पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।

रेफर सुविधा बंद होने से गंभीर मरीजों को खतरा

मजदूरों ने अस्पताल की रेफर व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि गंभीर मरीजों को उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों में भेजने की प्रक्रिया बेहद धीमी और जटिल हो गई है।

पहले मरीजों को जरूरत पड़ने पर आसानी से बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाता था, लेकिन अब कई मामलों में मरीजों को समय पर अनुमति नहीं मिलती। इससे गंभीर रोगियों की जान तक जोखिम में पड़ सकती है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे मजदूरों और उनके परिवारों के जीवन को प्रभावित करती है। इसलिए इस समस्या का जल्द समाधान होना चाहिए।

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सोनागिरी अस्पताल परिसर में हुआ प्रदर्शन

आज बड़ी संख्या में मजदूर और भेल के ठेका कर्मचारी सोनागिरी स्थित ESI अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल परिसर में एकत्र होकर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने हाथों में तख्तियां लेकर अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएं मजदूरों का अधिकार हैं और इसके लिए उन्हें संघर्ष करना पड़े तो वे पीछे नहीं हटेंगे। अस्पताल प्रशासन और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने जल्द से जल्द व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की मांग रखी।

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दीपक गुप्ता के नेतृत्व में हुआ आंदोलन

यह प्रदर्शन मजदूर नेता दीपक गुप्ता के नेतृत्व में आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि अस्पताल की बदहाल स्थिति को लेकर कई बार जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

उन्होंने कहा कि ESI अस्पताल मजदूरों और उनके परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र है। यदि यहां उचित इलाज, दवाएं और रेफरल सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी तो हजारों श्रमिक प्रभावित होंगे। दीपक गुप्ता ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

मजदूर प्रतिनिधियों ने दिया समर्थन

प्रदर्शन के दौरान कई सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने भी मजदूरों का समर्थन किया। टी.आर. गहलोत, सुशील प्रजापति सहित कांग्रेस के कई नेता और मजदूर संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।

नेताओं ने कहा कि श्रमिक वर्ग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और उनके स्वास्थ्य अधिकारों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने सरकार से अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुधारने और मजदूरों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग की।

मजदूरों का संदेश- ‘इलाज हमारा हक है’

प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने एक स्वर में कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं कोई सुविधा नहीं बल्कि उनका अधिकार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक अस्पताल में दवाओं की उपलब्धता, बेहतर इलाज और रेफरल व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

मजदूरों का कहना है कि वे केवल अपने लिए नहीं बल्कि उन हजारों श्रमिक परिवारों के लिए आवाज उठा रहे हैं जो ईएसआई अस्पताल पर निर्भर हैं।

जल्द समाधान की मांग

प्रदर्शन के अंत में मजदूरों ने प्रशासन और सरकार से मांग की कि ईएसआई अस्पताल में डॉक्टरों की पर्याप्त नियुक्ति की जाए, दवाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और रेफर सुविधा को तत्काल प्रभाव से सुचारू बनाया जाए। मजदूर नेताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि श्रमिकों के स्वास्थ्य से जुड़ा यह मुद्दा किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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