Peoples Update Special :भोपाल में जर्जर भवनों का खतरा बरकरार, 3,435 इमारतें खतरनाक घोषित; 2,184 नोटिस के बावजूद सिर्फ 35 भवन हटे

शाहिद खान, भोपाल। पुराने शहर के बुधवारा क्षेत्र में कोतवाली थाने के सामने करीब 90 साल पुराना मकान ढहने की घटना ने एक बार फिर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई लेकिन यह घटना इस बात की चेतावनी है कि राजधानी में हजारों जर्जर इमारतें अब भी लोगों की जान के लिए खतरा बनी हुई हैं। हर साल मानसून से पहले नगर निगम जर्जर भवनों का सर्वे कर नोटिस जारी करता है और भवन मालिकों तथा रहवासियों से यह लिखवा लेता है कि यदि भवन गिरता है तो उसकी जिम्मेदारी उनकी होगी। इसके बाद कार्रवाई लगभग ठप पड़ जाती है। न तो भवनों को खाली कराया जाता है और न ही समय पर ध्वस्तीकरण होता है। नतीजा यह है कि हादसे होने के बाद ही व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।
रिकॉर्ड में 3,435 जर्जर भवन, कार्रवाई सिर्फ 35 पर
नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार राजधानी में 3,435 भवन जर्जर घोषित हैं। इनमें 2,464 सरकारी और 971 निजी भवन शामिल हैं। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि 757 भवन अति जर्जर श्रेणी में हैं जो कभी भी ढह सकते हैं। इनमें 740 सरकारी और 17 निजी भवन हैं। इसके बावजूद इस वर्ष नगर निगम ने केवल 2,184 नोटिस जारी किए और कार्रवाई के नाम पर अब तक सिर्फ 35 भवनों को ही हटाया गया है। यानी हजारों खतरनाक भवन आज भी जस के तस खड़े हैं।

ऐशबाग के 600 मकान आठ साल से इंतजार में
नगर निगम की कार्रवाई की धीमी रफ्तार का सबसे बड़ा उदाहरण ऐशबाग हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी है। यहां 600 मकानों को आठ वर्ष पहले जर्जर घोषित किया जा चुका है। हर साल नोटिस जारी किए जाते हैं, लेकिन पुनर्वास और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया आज तक पूरी नहीं हो सकी। रहवासी मकान छोड़ने को तैयार नहीं हैं जबकि प्रशासन वैकल्पिक आवास उपलब्ध नहीं करा पाया है। परिणामस्वरूप लोग आज भी खतरनाक इमारतों में रहने को मजबूर हैं।

कोतवाली हादसा बना बड़ा चेतावनी संकेत
बुधवारा में कोतवाली थाने के सामने मकान रात के समय गिरा इसलिए बड़ा हादसा टल गया। यदि यही भवन दिन में ढहता तो वहां से गुजर रहे राहगीर, दुकानदार और वाहन चालक इसकी चपेट में आ सकते थे। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक लोगों की जान किस्मत के भरोसे रहेगी।

मलबे के साथ सड़क पर गिरा युवक, मची अफरा-तफरी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भवन का छज्जा गिरते समय वहां खड़ा एक युवक भी उसके साथ सड़क पर आ गिरा। तेज धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस, नगर निगम और प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। अधिकारियों ने मलबे का निरीक्षण किया और एहतियात के तौर पर आसपास के क्षेत्र की आवाजाही रोक दी।
गोयल कॉम्पलेक्स में फिर रहने लगे लोग
बैरसिया रोड स्थित गोयल कॉम्पलेक्स को तीन वर्ष पहले नगर निगम और जिला प्रशासन ने जर्जर घोषित कर खाली कराया था। उस समय यहां रहने वाले 100 से अधिक परिवारों ने फ्लैट छोड़ दिए थे लेकिन बाद में लोग दोबारा वहीं रहने लगे। इससे एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

शहर के इन इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा
भोपाल के कई इलाके जर्जर भवनों की वजह से हाई रिस्क जोन बने हुए हैं-
- ओल्ड सुभाष नगर-गौतम नगर – 327 जर्जर भवन
- ऐशबाग – 600 हाउसिंग बोर्ड क्वार्टर
- अरेरा कॉलोनी – नाले के ऊपर बने 19 क्वार्टर
- जवाहर चौक-धोबी घाट – कई MIG, LIG और EWS ब्लॉक
- पुराना शहर – इब्राहिमपुरा, गुर्जरपुरा और काजीपुरा के निजी मकान
- सरस्वती नगर, टीटी नगर और जवाहर चौक
- जुमेराती, बुधवारा और इतवारा
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सिर्फ नोटिस नहीं कार्रवाई जरूरी
अब्दुल शकूर (बुधवारा) का कहना है कि यदि कोई भवन इतना खतरनाक है कि उसके लिए नोटिस जारी करना जरूरी है, तो उसे खाली कराकर सुरक्षित बनाना या ध्वस्त करना भी उतना ही जरूरी होना चाहिए।
मुबीन चौधरी (इब्राहिमपुरा) का कहना है कि केवल नोटिस देकर जिम्मेदारी भवन मालिकों और रहवासियों पर डाल देना कानूनी प्रक्रिया हो सकती है लेकिन इससे खतरा खत्म नहीं होता। लोगों की जान बचाने के लिए प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।
नगर निगम आयुक्त ने क्या कहा
नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने बताया कि ऐशबाग के 600 जर्जर मकानों को लेकर हाउसिंग बोर्ड को नोटिस भेजे गए हैं। मकानों को खाली कराना हाउसिंग बोर्ड की जिम्मेदारी है जबकि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नगर निगम करेगा। उन्होंने बताया कि इस वर्ष शहर में करीब 2,200 भवन मालिकों और सरकारी एजेंसियों को नोटिस जारी किए गए हैं।
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एक नजर में स्थिति
- कुल जर्जर भवन – 3,435
- सरकारी भवन – 2,464
- निजी भवन – 971
- अति जर्जर भवन – 757
- अति जर्जर सरकारी भवन – 740
- अति जर्जर निजी भवन – 17
- इस वर्ष जारी नोटिस – 2,184
- अब तक हटाए गए भवन – 35
- ऐशबाग में जर्जर घोषित क्वार्टर – 600 (8 वर्षों से कार्रवाई लंबित)
यह आंकड़े बताते हैं कि राजधानी में जर्जर भवनों का खतरा लगातार बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नोटिस जारी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। समय पर पुनर्वास, भवन खाली कराना और ध्वस्तीकरण जैसी ठोस कार्रवाई ही भविष्य में बड़े हादसों को रोक सकती है।












