कलेक्टर के नाम पर फर्जीवाड़ा? ‘प्रियंक मिश्रा IAS’ नाम से बनी Fake Facebook ID, प्रशासन ने दी चेतावनी

भोपाल। भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया पर एक फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले की जानकारी खुद भोपाल जिला प्रशासन के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से दी गई है। प्रशासन ने लोगों को इस फर्जी प्रोफाइल से सावधान रहने की सलाह दी है। जिला प्रशासन ने साफ कहा है कि इस फेसबुक आईडी को फॉलो या सब्सक्राइब न करें। इसके अलावा इस प्रोफाइल से आने वाले किसी भी संदेश का जवाब नहीं देने की अपील की गई है।
‘प्रियंक मिश्रा IAS’ नाम से बनाई गई प्रोफाइल
जानकारी के मुताबिक, फेसबुक पर ‘प्रियंक मिश्रा आईएस’ नाम से एक प्रोफाइल बनाई गई है। इस प्रोफाइल में भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है। प्रोफाइल में लगी तस्वीर में कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के साथ एडीएम सुमित पांडेय और जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी भी दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर के इस्तेमाल की वजह से किसी व्यक्ति को यह प्रोफाइल आधिकारिक होने का भ्रम हो सकता है। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन ने लोगों को सतर्क किया है और स्पष्ट किया है कि यह प्रोफाइल कलेक्टर की आधिकारिक फेसबुक आईडी नहीं है।

प्रशासन ने जारी किया जरूरी संदेश
भोपाल जिला प्रशासन के आधिकारिक अकाउंट से लोगों के लिए चेतावनी जारी की गई है। प्रशासन ने कहा है कि यह फर्जी प्रोफाइल है और लोग इससे दूरी बनाए रखें। लोगों से कहा गया है कि वे इस प्रोफाइल को फॉलो या सब्सक्राइब न करें। साथ ही, अगर इस प्रोफाइल से किसी तरह का संदेश आता है तो उसका जवाब न दें। प्रशासन ने लोगों से यह भी अपील की है कि वे फर्जी प्रोफाइल को तुरंत रिपोर्ट और ब्लॉक करें।
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पहले भी कलेक्टर के नाम पर हो चुकी है ठगी
यह पहली बार नहीं है जब भोपाल में किसी कलेक्टर के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाया गया हो। करीब दो साल पहले भोपाल के तत्कालीन कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के नाम से भी इसी तरह की फर्जी आईडी बनाकर लोगों से पैसे मांगने का मामला सामने आया था। उस समय ठगों ने कलेक्टर की तस्वीर का इस्तेमाल कर ऐसी प्रोफाइल तैयार की थी, जिससे लोगों को यह भरोसा हो सके कि सामने वाला व्यक्ति वास्तव में कलेक्टर ही है।

संबल योजना के नाम पर मांगे गए थे पैसे
पिछले मामले में ठगों ने ग्रामीणों को संबल योजना की राशि दिलाने का झांसा दिया था। इसके बदले उनसे करीब 3 हजार से 10 हजार रुपये तक मांगे गए थे। बताया गया था कि भोपाल के फंदा जनपद क्षेत्र में दो से तीन लोगों ने ठगों के बताए बैंक खाते में करीब 10 हजार रुपये तक ट्रांसफर भी कर दिए थे। मामला सामने आने के बाद इसकी जानकारी तत्कालीन कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह तक भी पहुंची थी।
सोशल मीडिया पर सावधानी जरूरी
कलेक्टर के नाम से सामने आई नई फर्जी फेसबुक आईडी के बाद एक बार फिर सोशल मीडिया पर सतर्क रहने की जरूरत सामने आई है। किसी भी अधिकारी या सरकारी विभाग के नाम से आने वाले संदेश पर तुरंत भरोसा करने के बजाय पहले यह जांचना जरूरी है कि अकाउंट आधिकारिक है या नहीं। खासकर अगर किसी सोशल मीडिया प्रोफाइल से पैसे, बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी या किसी अन्य निजी जानकारी की मांग की जाती है, तो बिना पुष्टि किए कोई जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।



















